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आपकी आवाज:आपके व्यक्तित्व का दर्पण(Your Voice: A Mirror of Your Personality)

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आपके व्यक्तित्व का दर्पण
मेरे एक सहकर्मी अपनी मधुर आवाज और मनमोहक व्यवहार के कारण अत्यंत लोकप्रिय हैं। उनके काम अपेक्षाकृत अधिक आसानी और सहजता से हो जाते हैं। परिचितों में भी उन्हंे आदर की दृष्टि से देखा जाता है।
संपूर्ण व्यक्तित्व के निर्माण में शारीरिक सौंदर्य के अतिरिक्त, सुरीली और कर्णप्रिय आवाज का अपना एक महत्वपूर्ण योगदान होता है। यदि सौंदर्य एक कशिश, एक आकर्षण है, तो मधुर आवाज एक सम्मोहन, एक जादू है। आज के प्रतिस्पद्र्धात्मक युग में सधी हुई प्रभावशाली आवाज एक आवश्यक योग्यता है। हर कंपनी या व्यवसाय अपने उपभोक्ताओं को सर्वोत्तम सेवाएं उपलब्ध कराना चाहता है। अतएव बड़ी-बड़ी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों की नियुक्ति या पदोन्नति में उम्मीदवार के संपूर्ण व्यक्तित्व का एक अनिवार्य अंग है।
जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आवाज के योगदान का अपना महत्व है। खास-तौर पर रोजगार-संबंधी कार्यों में तो यह बड़ी अहम भूमिका निभाती है। हाल ही में एयर इंडिया के दिल्ली स्थित कार्यालय में सहायिका के पद हेतु बीसियों युवतियां पहुंचीं, लेकिन चयन हुआ एक अपेक्षाकृत कम शैक्षणिक योग्यतावाली युवती का। उसकी सबसे बड़ी योग्यता थी – आत्मविश्वास से परिपूर्ण सुस्पष्ट और प्रभावशाली मधुर आवाज। संतुलित व्यवहार और सधी हुई आवाज लोगों को शीघ्र प्रभावित करती है।
वस्तुतः आवाज आपके व्यक्तित्व का आईना होती है। भद्दी और फटी हुई अस्पष्ट आवाज जहां व्यक्ति के फूहड़ होने का द्योतक है, वहीं अपरिमर्जित व कर्कश आवाज आदमी की बेवकूफी और असावधानी को रेखांकित करती है। आलसी, कर्महीन तथा भाग्यवादी व्यक्ति आमतौर पर आवाज के मामले में कतई फूहड़ पाए जाते हंै। बिना उतार-चढ़ाव वाली सपाट आवाज प्रायः असहाय अथवा आत्मकेंद्रित व्यक्तियों की होती है। आवश्यकता से अधिक ऊंची आवाज आदमी के क्रोधी और असंतुलित स्वभाव को प्रकट करती हैं। बेसुरी आवाज वाले व्यक्ति प्रायः असभ्य, स्वार्थी व अशालीन होते है। हीन-बोध से ग्रसित व्यक्तियों की आवाज प्रायः कांपती हुई होयह सच है कि मात्र पांच प्रतिशत व्यक्तियों की आवाज ही प्राकृतिक रूप से मधुर और सुरीली होती है। प्रकृति का यह उपहार बहुत कम लोगों को नसीब होता है, किन्तु शेष व्यक्ति अपनी मेहनत और अभ्यास से परिष्कृत आवाज हासिल कर सकते हैं। निरंतर अभ्यास से अपनी आवाज को सुमधुर बना सकते हैं।
सबसे पहले आप अपनी आवाज की कमियांे और कमजोरियों की पड़ताल करें। इसके लिए टेपरिकाॅर्डर सबसे अच्छा माध्यम है। अपनी रिकाॅर्ड की हुई आवाज को कई बार सुनें। उसमें कमियां तलाशें और निरंतर अभ्यास के द्वारा उन्हें दूर करने का प्रयास करें। आप अपनी आवाज सुधारने की प्रक्रिया में अपने मनपसंद अभिनेता या वक्ता की शैली का अनुसरण भी कर सकते हैं। दूरदर्शन पर समाचार पढ़ने वालों का आप गहराई से अध्ययन करें। उनकी आवाज के उतार-चढ़ावों, वाक्य-विन्यास आदि पर गौर करंे। प्रतिदिन एकांत में जोर से कुछ पढ़िये, गीत गाइये, गुनगुनाइए। याद रखिये, इस कार्य में अभ्यास की निरंतरता और पर्याप्त धैर्य आवश्यक है।
आवाज को सुरीली बनाने के लिए कुछ घरेलू साधन भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। शुद्ध कस्तूरी, छोटी इलाइची के दाने तथा लौंग बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इस चूर्ण को शहद अथवा शुद्ध घी में मिलाकर दिन में तीन बार लेने से आवाज खुलती है। इसके अलावा दस ग्राम काली मिर्च, दस ग्राम मुलहठी तथा बीस ग्राम मिश्री पीसकर चूर्ण बना लें। बाद में, प्रतिदिन सुबह-शाम इस चूर्ण को शहद में मिलाकर लें। अच्छे गले के लिए आपको अधिक खट्टी वस्तुओं और अधिक गर्म व अधिक ठंडी वस्तुओं से परहेज रखना चाहिए। गले की सफाई पर भी ध्यान नियमित रूप से दें। गले में कफ आदि होने पर गर्म पानी में नमक को मिलाकर गरारे किए जा सकते हैं।
इनके अलावा, आजकल तो बड़े शहरों में सार्वजनिक संभाषण-कला (पब्लिक स्पीकिंग) का विधिवत प्रशिक्षण देने वाले केन्द्र खुल गए हैं। हालांकि यह केन्द्र काफी महंगे पड़ते हैं, लेकिन फिर भी कई लोग यहां अपनी आवाज को आकर्षक और प्रभावी बनाने के लिए आते हैं।
याद रखिये, शिष्ट, शालीन, मधुर, स्पष्ट और कर्णप्रिय आवाज की बदौलत आप न केवल दूसरों का दिल जीत सकते हैं, बल्कि यह आप में भी आत्म-विश्वास की भावना पैदा करती है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में मधुर आवाज आपके लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलती है। आपके व्यक्ति को संपूर्णता प्रदान करती है। इसलिए इस ओर जरूर ध्यान दीजिए।