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स्मरण शक्ति कैसे बढ़ाएं? याददाश्त बढ़ाने के उपाय

यह सच है कि मस्तिष्ककीय क्षमताएं ईश्वर प्रदत्त होती है, किंतु यह सोचना गलत होगा कि उनके अभिवर्द्धन और उपार्जन के मामले में आदमी असहाय है। आजकल मोबाइल और इंटरनेट के दौर में इंसान कुछ याद ही नहीं रखना चाहता है , साधारण सा जोड़ बाकी कैलकुलेटर से करता है, ऐसे में याददाश्त कमजोर होना सामान्य सी बात है, इस लेख में हम आपको बतायेंगे याददाश्त के बारे में बहुत कुछ, साथ ही बढ़ाने के उपाय

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स्मरण शक्ति (याददाश्त) कैसे बढ़ाएं?

प्रयास से बढ़ाएं स्मरण शक्ति

स्मरण शक्ति का सीधा संबंध मस्तिष्क से है। मानव मस्तिष्क में अनगिनत क्षमताओं और विशेषताओं के खजाने छुपे हुए हैं। यह सच है कि मस्तिष्ककीय क्षमताएं ईश्वर प्रदत्त होती है, किंतु यह सोचना गलत होगा कि उनके अभिवर्द्धन और उपार्जन के मामले में आदमी असहाय है। सतत प्रयासों द्वारा मस्तिष्क की क्षमता में आश्चर्यजनक अभिवृद्धि के अनेकों उदाहरण हमारे समक्ष मौजूद हैं।

प्राचीन काल में ग्रंथ कंठस्थ करने की परम्परा

मस्तिष्क की अनगिनत क्षमताओं में स्मरण शक्ति का बहुत बड़ा योगदान है । आज जो हम पढ़ते- लिखते सुनते- देखते हैं , उसे यदि कल हम भूल जाएं तो कैसी विचित्र स्थिति निर्मित होगी ? इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है। अतीत की स्मृतियों के आधार पर ही हम आज की समस्याओं के समाधान खोज पाने में सफल होते हैं। प्राचीन- काल में तो स्मरण शक्ति को अत्यधिक महत्व दिया जाता था।वेद मंत्रों को श्रुति तथा स्वास्थ्य  संहिताओं को स्मृति कहा जाता था ।

यह श्रुति और स्मृति केवल पुस्तकों तक ही सीमित नहीं  रखी जाती थी, अपितु व्यक्ति इसे कंठस्थ कर अपनी स्मृति का स्थायी अंग बना लिया करते थे। आज की आधुनिक शिक्षा पद्धति में प्राय: सबक को कंठस्थ करने पर जोर नहीं दिया जाता तथा इसे ‘तोता रटंत’ तक कहकर उपहास उड़ाया जाता है । किंतु पश्चिमी मनोविज्ञानी गेट्स वर्ग पुनरावृति पर बहुत जोर देते हैं तथा इस प्राचीन पद्धति को स्मरण शक्ति बढ़ाने में उपयोगी मानते हैं।

शारीरिक संरचना की दृष्टि से सभी मनुष्यों के मस्तिष्क में नगण्य – सा अंतर होता है।  फिर क्या कारण है कि एक व्यक्ति की स्मरण शक्ति तो असाधारण रूप से तेज होती है, जबकि दूसरा व्यक्ति याददाश्त के मामले में बहुत कमजोर होता है । जैसा कि ऊपर कहा गया है, स्मरण शक्ति और स्मृति – क्षमता जन्मजात होती है।

अदभुत स्मरण शक्ति के धनी

  • राजा भोज के दरबार में दरबारी विद्वान श्रुतिधर एक घड़ी (24 मिनट) तक सुने गए किसी भी भाषा के प्रश्न को बिना त्रुटि तत्काल ज्यों का त्यों सुना सकते थे।
  • फ्रांस के प्रधानमंत्री लियान मैम्ब्रेज संसद में दिए गए विपक्षी नेताओं के भाषण तथा पिछले 10 सालों के संपूर्ण बजट आंकड़ों सहित तुरंत सुना सकते थे ।
  • सोलमन वेनियामिनोव नामक रूसी पत्रकार सालों पहले सरसरी तौर पर पढ़े गए रेलवे टाइम टेबल को आसानी के साथ दोहरा सकते थे ।

कमजोर याददाश्त के कारण

मोबाइल और इंटरनेट का युग

आज के मशीनी जीवन में याददाश्त या स्मरण शक्ति कमजोर होना एक व्यापक समस्या बनता जा रहा है। विद्यार्थियों को अपनी पाठ्य पुस्तकों से किया गया अध्ययन  याद नहीं रहता। किसी को व्यक्ति के चेहरे, नाम- पते याद नहीं रहते। कुछ लोग अपनी आवश्यक वस्तुएं कहीं रखकर भूल जाते हैं। कई लोग अपने आवश्यक दैनिक कामकाज तक भूल जाते हैं।

बुढ़ापे में कमजोर होती याददाश्त

वैसे तो स्मरण शक्ति का स्तर बचपन के प्रारंभिक काल से प्रौढ़ावस्था तक लगभग एक जैसा बना रहता है । अलबत्ता वृद्धावस्था में अन्य शारीरिक अंगों की भांति स्मरण शक्ति भी क्षीण हो जाती है।

सामान्य अवस्था में स्मरण शक्ति कमजोर होने के कारण

जो शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के हो सकते हैं।  मस्तिष्क का अविकसित होना, मस्तिष्क की जन्मजात विकृति, किसी गंभीर दुर्घटना से सिर पर चोट लगना, गंभीर रोग या कुपोषण का शिकार होना, निरंतर चिंतित और तनावग्रस्त रहना, जीवन में लगातार हताशा और विफलता प्राप्त होना, आत्मविश्वास का अत्यधिक अभाव होना, किसी प्रियजन की आकस्मिक मृत्यु अथवा कोई गहरा मानसिक आघात लगना आदि अनेकों कारण स्मरण शक्ति कमजोर होने के लिए उत्तरदायी हैं।

एक विख्यात मनोविज्ञानी ने  विस्मरण के तीन मुख्य कारण बताए हैं।

  • प्रथम, किसी बात को स्मरण रखने की पूर्व -इच्छा का अभाव,
  • द्वितीय -प्रस्तुत विषयों को पूरे मनोयोग से समझने का प्रयत्न न करना तथा
  • तृतीय पक्ष- प्रसंग में अरुचि तथा उपेक्षा का भाव होना व उनके महत्व को स्वीकार नहीं करना।

दवाओं से अधिक एकाग्रता उपयोगी

स्मरण- शक्ति की कमजोरी को दूर कर उसे  तेज करने के उपायों में दवाओं से अधिक महत्व मानसिक एकाग्रता और संबंधित विषय में गहन अभिरुचि जागृत करने का है ।पश्चिमी देशों में तो स्मरण शक्ति को बढ़ाने के उपायों पर व्यापक अनुसंधान किए जा रहे हैं ।अमेरिका के याददाश्त व एकाग्रता बढ़ाने के विद्यालय (school of memory and consultatin) के अध्यक्ष डॉक्टर ब्रूनो फर्स्ट के अनुसार,  स्मरण शक्ति बढ़ाने संबंधी उपाय बचपन से ही अपनाया जाना चाहिए क्योंकि बच्चों में भूलने की आदत बाल्यकाल से ही पड़ जाती है। डॉक्टर ब्रूनो ने बच्चों में याददाश्त की कमजोरी को  दूर करने के लिए एक सर्वथा नवीन पद्धति विकसित की है,  जिसके अंतर्गत खेल-खेल में स्वाभाविक रूप से स्मरण शक्ति को परीक्षण करने के बहुत आसान उपाय सुझाए गए हैं। अमेरिका के बाद यह पद्धति विश्व के कई देशों में लोकप्रिय हो रही है।

मन:शास्त्री वार्ड लेट का कहना है कि जिन तथ्यों के भविष्य में याद रखने की आवश्यकता अनुभव की जाए, उनमें गहरी रुचि  उत्पन्न करनी चाहिए और यह चिंतन करना चाहिए कि स्मरण शक्ति से क्या लाभ होगा एवं विस्मरण से क्या हानि हो सकती है ? इस चिंतन के उपरांत किन्ही तथ्यों की परत मस्तिष्क पर जमाई जाएगी तो वह लंबे समय तक स्थायी बनी रहेगी और उन प्रसंगों को भूल जाने की कठिनाई उत्पन्न नहीं होगी।

प्रोफेसर ईवेगार्ड्स का कहना है कि प्रसंगों को न केवल कल्पना चित्र के रूप में बल्कि उनके तात्पर्य और फलितार्थ को भी ध्यान में रखते हुए मानस पटल पर बैठाया जाए तो वह अधिक स्थायी रूप से स्मृति में बने रहेंगे। 

याद रखने योग्य प्रसंगों ,तथ्यों और घटनाओं का उचित चयन भी स्मरण शक्ति को सुदृढ़ बनाने हेतु आवश्यक है। उपयोगी तथ्यों को गंभीरतापूर्वक समझने का प्रयत्न करना चाहिए तथा उन्हें कई कई बार शब्दों में वह स्मृति में दोहराना चाहिए । आवश्यक होने पर नोट भी करना चाहिए।

छोटी – छोटी बातें स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक

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छोटी – छोटी बातें स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक

कई छोटी-छोटी लगने वाली बातें भी स्मार्ट शक्ति बढ़ाने में सहायक होती है।  दैनिक जीवन के आवश्यक कार्यों की एक सूची बनाकर रख लेने से आप उस दिन किए जाने वाले कार्यों को याद रखने की जहमत से बच सकते हैं। विद्यार्थी वर्ग अपने सबक को याद रखने के लिए विषय में गहन अभिरुचि जागृत करें तथा पूरी एकाग्रता के साथ अध्ययन शुरू करें। एक ही बैठक या एक ही समय में पूरा अध्याय समाप्त करना आवश्यक नहीं है। उसे आप अलग-अलग खंडों में विभाजित कर अधिक सरलता से समझ सकते हैं । पढ़े हुए की पुनरावृति स्मरण शक्ति को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होती है।

यदि आपने अपनी याददाश्त को तेज बनाने का दृढ़ निश्चय कर लिया है तो यथासंभव आप चिंताओं व तनाव से दूर रहने का प्रयास करें । मानसिक तनाव स्मरण शक्ति को क्षति पहुंचाता है।असंगत, अनावश्यक और दूषित विचारों को अपने मस्तिष्क में स्थान न दीजिए ।अपनी पूरी एकाग्रता संबंधित विषय पर केंद्रित कीजिए।

सोने से पूर्व दिन-भर की गतिविधिंयों का दोहराव

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सोने से पूर्व दिन-भर की गतिविधिंयों का दोहराव

रात को शयन से पहले दिन – भर की गतिविधियों को सिलसिलेवार याद करने का प्रयास कीजिए। ऐसा आप कम से कम  दो बार करें। आप पाएंगे कि दूसरी बार में आपको कई भूली हुई बातें भी याद आ जाएंगी। इसका निरंतर अभ्यास याददाश्त को प्रखर बनाता है । हां ,एक बात याद रखिए। दिन – भर की बातों का यह दोहराव दिन में घटी किसी अप्रिय घटना को लेकर तनाव बढ़ाने के लिए नहीं है। यह तो केवल स्मरण शक्ति की परख के लिए है।विषय के संक्षिप्तीकरण का तरीका भी तथ्यों को आसानी से याद रखने में मदद करता है। पूरे विषय को विशद रूप में याद करने के स्थान पर उसे छोटे-छोटे शीर्षकों और उपशीर्षकों में बांटकर स्मरण रखना अधिक उपयोगी है।

स्वस्थ जीवन – शैली भी याददाश्त बढ़ाने में मददगार

स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है अतः स्वयं को हमेशा शारीरिक रूप से चुस्त दुरस्त रखिए। नियमित रूप से व्यायाम करना; प्रातः कालीन भ्रमण करना; सामान्य सामान्य स्वास्थ्य नियमों का पालन करना आदि बातें व्यक्ति को न केवल शारीरिक रूप से प्रफुल्लित रखती हैं, बल्कि स्मरण शक्ति की वृद्धि में आश्चर्यजनक योगदान प्रदान करती हैं। संतुलित आहार लेना , नियमित जीवन व्यतीत करना, अत्यधिक गर्म व तेज मसाले वाले खाद्य पदार्थों से परहेज रखना, सात्विक वातावरण में रहना आदि तथ्य भी स्मरण शक्ति की वृद्धि में सहायक होते हैं। कमजोर स्मरण शक्ति वाले व्यक्तियों को पर्याप्त मात्रा में दूध, बादाम आदि पौष्टिक पदार्थों का सेवन करना चाहिए। आंवला ,ब्राह्मी, शंखपुष्पी आदि का सेवन भी उपयोगी है।

यह नहीं मानना चाहिए कि स्मरण शक्ति तो केवल ईश्वर प्रदत्त और जन्मजात प्रतिभा होती है। निरंतर अभ्यास और प्रयासों से आप भी विलक्षण स्मरण शक्ति प्राप्त कर सकते हैं । मन में पूरा भरोसा रखिए।