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बच्चों को उपहार देते समय …!

                   
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बच्चों का उपहारों का मूल्याकंन करने का अपना अलग नजरिया होता है इसलिए बच्चों की उम्र और शौक को ध्यान में रखकर दिया गया उपहार ही उनके लिए उपयोगी रहता है। मेरे एक मित्र ने अपने निकट के संबंधी के चार वर्षीय पुत्र के जन्म दिवस पर सोने की चेन उपहार में दी। इस कीमती उपहार को पाकर बच्चे के माता-पिता तो जरूर प्रसन्न हुए, किंतु बच्चे के लिए इस उपहार की कोई सार्थकता व उपयोग न था। बच्चों के लिए उपहारों का चयन करते समय बच्चे की व्यक्तिगत अभिरूचि, उसके अभिभावकों से संबंध और आर्थिक सामथ्र्य को ध्यान में रखना अति आवश्यक है। उपहार देने से पूर्व उसके प्राप्तकर्ता के लिए उसकी उपयोगिता और स्थायित्व के संबंध में पर्याप्त ध्यान दीजिए। मात्र औपचारिकता निर्वाह के लिए दिया गया उपहार पाने वाले को कतई प्रभावित नहीं कर पाएगा।
बिल्कुल नन्हे बच्चे (एक वर्ष की आयु तक के) को सुंदर रंगीला खिलौना, नैपकिन सेट, बाबा सूट, पालना, मच्छरदानी, बच्चों के प्रसाधन का स्तरीय सामान, बेबी सोप, बेबी पाउडर, बेबी आॅइल आदि में से कोई भी वस्तु उपहार में दी जा सकती है।
दो से तीन वर्ष तक की आयु-वर्ग के बच्चे के लिए उसकी उम्र के अनुरूप विभिन्न प्रकार के खिलौने, सूट, टाॅफी या बिस्किट का डिब्बा, ट्रायसिकल, चाॅकलेट आदि उपहार में दिए जा सकते हैं। रंगीन तस्वीरों वाली पुस्तकें भी इस आयु वर्ग के बच्चों के लिए आकर्षक और मनभावन तोहफा हैं।
चार से पांच वर्ष की आयु तक का बच्चा बाहरी दुनिया से अच्छी-खासी पहचान स्थापित कर चुका होता है। इस आयु वर्ग के बच्चों को उपहार में दी जाने वाली वस्तुएं ऐसी होनी चाहिए, जो उसकी जिज्ञासाओं को शांत करने के साथ ही उसकी सोचने-समझने की क्षमता में वृद्धि करने मे भी सहायक हों। ऐसे बच्चों को उपहार में दिए जाने वाले खिलौनों का स्वरूप भी ऐसा ही होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, उन्हें कहानी, कविता आदि की पुस्तकें, चित्रकथाएं, पिक्चर-पोस्टकार्ड, सूट, स्टीकर्स आदि वस्तुएं भी तोहफे में दी जा सकती हैं।
पांच वर्ष की आयु के बाद बच्चों का जिज्ञासा संसार क्रमशः विस्तृत होता चला जाता है। इस अवधि में बच्चा अंक-अक्षर ज्ञान के साथ ही काफी कुछ सीख लेता है। ऐसे बच्चों को पढ़ने के लिए काॅमिक्स, बच्चों की दूसरी पुस्तकें, मनावैज्ञानिक खिलौने आदि उपहार में दिए जा सकते हैं। इस आयु में खेलकूद के प्रति भी अभिरूचि जागृत हो जाती है। उसे मिनी क्रिकेट-सेट, मिनी बैडमिंटन सेट, गेंद आदि आकर्षक उपहार दिया जाना उचित है। इन-डोर गेम्स में कैरम, सांप-सीढ़ी, लूडो, व्यापार आदि खेल सामग्री दी जा सकती है। पेंसिल बाॅक्स, स्कूल बैग, नोट-बुक, डायरी, आकर्षक पेन-बाॅलपेन आदि भी इस आयु वर्ग के बच्चे के वास्ते उपयुक्त उपहार हैं।
तेरह से सोलह वर्ष की आयु के बच्चे किशोर-वर्ग में आते हैं। इस आयु के बच्चे काफी संवेदनशील और समझदार हो चुके होते हैं। उनका कल्पना-संसार भी अत्यंत व्यापक हो चुका होता है। इस आयु के बच्चे किसी भी वस्तु की सुरक्षा और संभाल के महत्व को भली-भांति समझ चुके होते हैं। इन्हें पेन सेट, बाॅल-पेन सेट, फाईल, डायरी, कैमरा, क्रिकेट किट आदि वस्तुएं उपहार में दी जा सकती हैं। इसके अलावा, सामान्य ज्ञान की किताबें, किसी बाल पत्रिका की वार्षिक सदस्यता, शब्द कोष आदि भी उपयोगी तोहफे हैं। डाक-टिकट संग्रह में रूचि रखने वाले बच्चों को डाक-टिकट एलबम, चित्रकला के प्रति रूझान रखने वाले बच्चों को पेटिंग किट दिए जाने चाहिए। इस आयु की लड़कियों को एम्ब्राॅयडरी निटिंग-सेट, हेयर पिन सेट, बिंदिया आदि उपहार में दिए जा सकते हैं।
उपहार देते समय प्राप्तकर्ता की अभिरूचि, आवश्यकता और उपयोग को दृष्टिगत रखते हुए ही उपहार का चयन कीजिए। बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं और आपकी ओर से उपयुक्त और आकर्षक उपहार पाकर वह न केवल वह प्रसन्न होंगे अपितु उनकी पंसद को समझने के लिए वह आपके प्रति आभारी भी होंगे। वह आपकी इज्जत करेंगे।
अंत में, उपहार देते समय अपनी कलात्मक अभिरूचि का परिचय अवश्य दीजिए, वस्तु को आकर्षक ढंग से सुंदर, रंगीन और चिकने कागज में सलीके से पैक कीजिए, आप बाजार में मिलने वाले गिफ्ट-कार्ड का उपयोग भी कर सकते हैं। उपहार के पैकेट पर प्राप्तकर्ता को शुभकामनाएं देते हुए एक कोने पर रंगीन पेन से अपना नाम पता अवश्य अंकित कीजिए ताकि उपहार पाने वाले को भ्रांति न हो। पूरे आत्मविश्वास और सहजता से उपहार दीजिए।
इस तरह उपहार देते समय आप इन कुछ छोटी-छोटी किंतु जरूरी बातों ध्यान रखेंगे तो आपका उपहार और अधिक कीमती और उपयोगी हो जाएगा।