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वीडियो-गेम्स

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मेसाचुसेट्स विश्वविद्यालय के छात्र रूसेल ने 1962 में कम्प्यूटर पर एक खेल की योजना बनाई, जिसे ‘आकाश युद्ध‘ का नाम दिया। इसे कम्प्यूटर पर खेला जा सकता था। किंतु कम्प्यूटर का थोड़ा-सा भी समय, जिसे ‘कम्प्यूटर समय‘ कहा जाता है, काफी मंहगा होता है। एक शोध कंपनी ने हिसाब लगाया कि ‘आकाश युद्ध‘ के इस कम्प्यूटर खेल ने कई कंपनियों ( जिनके पास कम्प्यूटर थे ) का लाखों डाॅलर का नुकसान कर दिया क्योंकि कर्मचारी अपने कम्प्यूटर पर वास्तविक काम छोड़ कर लड़ाकू वायुयानों एवं पनडुब्बियों को मार्गदर्शन दिया करते थे एवं उनसे नतीजे प्राप्त करते रहते थे। यह आकाश युद्ध साठ के दशक के अंत तक लोकप्रिय रहा। इन दिनों दो विद्यार्थी उताह विश्वविद्यालय के नोलन बुशनेल तथा स्टेफोर्ड विश्वविद्यालय के बिल पिट्स ने अपने काॅलेज के कम्प्यूटर पर एक खेल सीखा। बाद में दोनों अलग-अलग रूप से इस खेल का व्यावसायीकरण करने में जुट गए। बुशनेल ने पहले माॅडल ‘कम्प्यूटर स्पेस‘ बनाया। 1970 में यद्यपि बुशनेल ने खुद इसे बनाना शुरू नहीं किया ( दूसरी कंपनी को बेच दिया ) लेकिन कम्प्यूटर स्पेस पर इतना काम कर चुकने के बाद उसने काफी ज्ञान जुटा लिया था। कम्प्यूटर स्पेस को ज्यादा सफलता नहीं मिली क्योंकि यह अधिकांश लोगों के लिए बहुत कठिन था।
1972 में बुशनेल ने एक कंपनी स्थापित की तथा इसके लिए उसने एक आसान इलेक्ट्राॅनिक टेबल-टेनिस खेल ‘पाॅग‘ बनाया, जो सिक्के डालने पर चलता था। इसे उसने एक बार में लगा दिया। दो दिन बाद इस मशीन ने चलना बंद कर दिया। उसने पूरी मशीन खोलकर सारे पुर्जों की जांच कर ली लेकिन उसे गलती नहीं मिली। अंत में उसने सिक्कों वाला बक्सा खोला तो पाया कि बक्सा पूरा भर चुका था, जिसके कारण मशीन जाम हो गई थी। यह बुशनेल की सफलता थी। इसी दौरान पिट्स ने भी अपना माॅडल पूरा कर लिया, जिसे उसने ‘गैलेक्सी गेम‘ नाम दिया। उसने उसे एक काफी हाउस में लगाया जो कि बुशनेल के माॅडल से कुछ ही दूर था। इसमें एक सांख्यिक मीटर था, जो खिलाड़ी द्वारा प्राप्त किए गए अंको को भी बताता था किंतु चुनौती कम लोगों को देता था तथा हतोत्साहित अधिक लोगों को करता था, अतः यह खेल असफल रहा।
इस समय इलेक्ट्रिाॅनिक खेल में एक सफल रहा था (पाॅग) तथा दो असफल रहे थे ( कम्प्यूटर स्पेस तथा गेलेक्सी गेम्स )। लेकिन नोलन बुशनेल ने अपने उद्योग से विभिन्न किस्म के इलेक्ट्रोनिक खेल बनाना जारी रखा। सिक्कों से चलने वाली मशीनों के साथ-साथ घर के लिए भी विडियो गेम्स बनाना शुरू किया। 1976 के अंत तक 70 कंपनियों ने इन टेलीविजन खेलों को बनाना शुरू कर दिया।
राल्फ बेर को घरेलू टेलीविजन खेलों का पितामह कहा जाता है। उसने 1966 में 500 इंजीनियरों के साथ काम करना शुरू किया। बाद में बिल हेरिसन और बिल रश को भी अपने साथ जोड़ा। यह कार्य बहुत गुप्त रखा जाता था। बिल हेरिसन और बिल रश को काम करते वक्त गिटार बजाने का शौक था। अतः जब ये अपने बंद कमरे में काम करते थे तो इनके कमरे से आती गिटार की आवाज से अन्य कर्मचारी समझते थे कि इलेक्ट्रिाॅनिक गिटार को विकसित किया जा रहा है। 1967 के मध्य में इसका माॅडल तैयार हो गया। इस खेल में एक कंपनी ने और सुधार किया तथा मई 1972 में यह अमेरिका के बाजार में आया जिसे ‘ओडिसी‘ नाम दिया गया था। बाद में उसमें कई सुधार हुए तथा इसी तर्ज पर विभिन्न खेल बाजार में उपलब्ध हुए।