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वेलेन्टाइन डे

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वेलेन्टाइन डे प्रेमियों का खास दिन है। इस दिन युवाओं की दिल की धड़कनें अचानक तेज हो जाती है क्योंकि यह अपने प्यार का इजहार करने का दिन जो है। वेलेन्टाइन डे 14 फरवरी को आता है, जब तकरीबन सारे संसार में वसंत छाया रहता है। वंसत का मौसम यूं भी मौज-मस्ती का मौसम है, इसलिए इस मौसम में वेलेन्टाइन डे का आना युवाओं पर मस्ती की बौछार-सी कर देता है। यूं यह पर्व पश्चिमी देशों में बहुत अर्से से लोकप्रिय है, लेकिन विगत डेढ़ दशक से वेलेन्टाइन डे हम हिन्दुस्तानियों को भी अपनी मस्ती से सराबोर करने लगा।
वेलेन्टाइन डे की शुरूआत कब, कहाॅं और कैसे हुई – यह बिल्कुल निश्चित तौर पर बता पाना मुमकिन नहीं । वैसे 15वीं शताब्दी में इंग्लैण्ड में इस दिन प्रेमी अपनी प्रेमिका को प्रेम संदेश भेजा करते थे। आम आदमी से लेकर राजा तक सभी इस दिन को ’ प्रेम दिवस ’ मानकर अपनी प्रेमिकाओं को प्रेम संदेश और प्यार भरे तोहफे भेजा करते थे। वैसे कुछ इतिहासकारों का मत है कि प्रेम-दिवस की शुरूआत रोम से हुई। रोम के लोगों का मानना है कि पक्षी वसंत में अपनी जोड़ी बनाते है, अतएव वहाॅं के युवाओं ने भी अपना जीवन साथी चुनने के वास्ते इसी दिन को अपना लिया। इस मौके पर युवक-युवतियाॅं एक निश्चित स्थान पर इकट्ठा हो जाते थे। फिर उनके नामों की पर्चियां एक मटके में डालकर एक-एक पर्ची निकालकर जोड़ियां बना ली जाती थी। कुछ अर्सा व्यतीत होने के बाद इन जोड़ियों की परस्पर शादी करवा दी जाती थी।
रोम में प्राचीन समय में ’ लूपरकेलिया ’ नाम से 15 फरवरी के दिन एक प्रेम-पर्व भी मनाया जाता था। इस दिन शाम को आग जलाकर उसके आस-पास नृत्य कर प्राचीन रोमवासी भगवान से संतान मांगते थे और मौज-मस्ती करते थे। इसके पश्चात, जब रोम ब्रिटेन का उपनिवेश बन गया, तब वहां पर एक पर्व वेलेन्टाइन-डे के तौर पर उत्साह से मनाया जाने लगा।
वेलेन्टाईन डे से जुड़ा एक किस्सा खासतौर पर प्रचलित है। यह किस्सा भी रोम से ही संबंधित है। कहा जाता है कि तीसरी सदी में रोम में सम्राट क्लाजियस का शासन था। क्लाजियस एक तानाशाह किस्म का सम्राट था और वह जो ठान लेता, वह अपनी प्रजा पर थोपकर ही दम लेता था। सम्राट के विचार में शादी करने से पुरूष की शक्ति और विवेक नष्ट हो जाते हैं, इसलिए उसने पूरे रोम में सैनिकों, अधिकारियों और राजकाज से जुडे़ कर्मचारियों पर
विवाह न करने की पाबंदी लगा दी। उसके राज्य में इन लोगों में कोई शादी करता, तो राजाज्ञा का उल्लघंन करने के आरोप में शादी करने वाले दम्पŸिा और शादी सम्पन्न करवाने वाले पादरी को प्राण दंड दे दिया जाता। रोम में निवास करने वाले संत वेलेन्टाइन को राजा का यह नियम प्रकृति के खिलाफ लगा और उन्होंने इसका विरोध करने का संकल्प लिया। संत ने प्यार करने वाले जोड़ो कों विवाह के पावन संस्कार में बांधने का कार्य शुरू किया। उनके उत्साहवर्द्धन करने और प्रेरणा देने से शनैः शनैः अधिकारियों और सैनिकों में साहस आया और कुछ ही समय में सैकड़ों जोड़ों ने राजाज्ञा का खुले आम उल्लघंन करते हुए विवाह कर लिया। अपनी आज्ञा की इस तरह अवहेलना करने पर सम्राट क्लाजियस गुस्से से आग बबूला हो उठा और उसने संत वेलेन्टाइन को मृत्युदण्ड दे डाला। मोहब्बत करने वालों को आपस में मिलाने वाले संत वेलेन्टाइन को जिस दिन फासी के तख्ते पर चढ़ाया गया, उसी दिन 14 फरवरी थी। बस…..तभी से प्यार के लिए अपने जीवन की कुर्बानी देने वाले संत वेलेन्टाइन की पावन स्मृति में हर वर्ष चैदह फरवरी को ’ वेलेन्टाइन डे ’ के रूप में प्रेम-दिवस मनाया जाने लगा।
संत वेलेन्टाइन से जुड़ी एक और कथा है। संत वेलेन्टाइन को किसी जेल के जेलर की अंधी बेटी से मोहब्बत हो गई। संत के इस प्यार को अपराध मानकर उन्हें मृत्युदण्ड की सजा दी गई। वेलेन्टाइन ने इस सजा को भी अपनी मोहब्बत का तोहफा माना और सहज भाव से स्वीकारा। मौत के समय अपनी दोनों आॅंखें अपनी प्रेमिका को भेंट कर गए। संत के इस अनमोल उपहार ने उन्हें प्रेमियों की दुनिया में अमर कर दिया। मृत्युदण्ड के दिन 14 फरवरी थी, इसलिए उसी दिन से उनके नाम से प्रेम-दिवस मनाने का रिवाज आरंभ हुआ।
इंग्लैण्ड में 17वीं शताब्दी में यह पंरपरा चलन में थी कि चैदह फरवरी के दिन सवेरे कोई भी युवती सबसे पहले जिस युवक को देखती थी, वह उसका ’ वेलेन्टाइन ’ अर्थात प्रेमी मान लिया जाता था। रोम की पौराणिक गाथाओं में प्रेम की देवी के रूप में ’ जुना ’ का जिक्र मिलता है। इसलिए 14 फरवरी को जुना की स्मृति में प्रणय-दिवस मनाया जाता हैं। 14 फरवरी के दिन बड़ी तादाद में रोमवासी इस विश्वास के साथ विवाह करते हेै कि इस दिन विवाह करने वाले दंपŸिायों का प्रेम अमर रहता है।
समय की स्निग्ध धारा के साथ-साथ धीरे-धीरे रोम से शुरू हुआ प्रेम पर्व सारी दुनिया में फैलता गया और 14 फरवरी को पूरी दुनिया में वेलेन्टाइन डे के रूप में प्रेम-दिवस मनाया जाने लगा।
विदेशों में बरसों से इस दिन अखबारों में प्रेमियों द्वारा दिए गए संदेश छपते हैं। अब तो यह परम्परा हमारे यहांॅं भी आरंभ हो चुकी है। हमारे देश में ’ वेलेन्टाइन डे ’ को लोकप्रियता प्रदान करने में आर्चीज काड्र्स वालों की खास भूमिका है। आर्चीज ने ही सर्वप्रथम वेलेंटाइ्रन डे के कार्ड भारत में छापे और उनके चलन को आम बनाया।