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तुलसी

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तुलसी भारत के प्रायः हर घर में पाया जाने वाला चमत्कारिक पौधा है, जो अपने में सैंकड़ो बीमारियों का उपचार समाये हैं। आइये, तुलसी के द्वारा विभिन्न महिला-रोगों के उपचार के तरीकें जानें।
जिन महिलाओं को अनियमित मासिक धर्म की समस्या है, वे तुलसी की जड़ का चूर्ण और मुलेहठी बराबर लेकर एक सादा मीठे पान में डालकर खाएं। इस रोग में तुलसी और पान साथ-साथ लेने पड़ते हैं।
संतान की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए तुलसी के 25 बीज लें और उन्हें पीस कर कपडे़ में छान लें। मासिक धर्म के तीन दिनों में चूर्ण की तीन मात्राएं बनाकर खिला दें, लाभ होगा। अगर अमाशय में दूषण अधिक होगा, तो तुलसी बीज चबाने, पीस कर फांकने या काढ़ा बनाकर पीने का नियम लम्बे समय तक जारी रखना पड़ेगा। यह अवधि पूरे साल भर तक भी हो सकती है।
जिन दिनांे मासिक धर्म हो, तुलसी के दस-बारह बीज पानी में पीसिए और तीन दिन पीजिए। पŸाों और बीजों का प्रभाव अलग-अलग है। पत्तो का काढ़ा गर्भाधान को रोकता है, तो बीज पीस कर पीने से गर्भ ठहर सकता है।
गर्भ निरोधक: मासिक धर्म के बाद तुलसी के पत्तो का काढ़ा तीन दिनों तक पीने से गर्भ नहीं ठहरेगा और कष्ट भी नहीं होगा।
गर्भिणी के पेट और छाती में खुजली होने लगे, तो तुलसी का ठीक ढंग से लेप बनाकर लगाएं। ‘कर्पूरी तुलसी‘ विशेष हितकारी है, जो बेल की तरह बढ़ती है और जिसके पत्तो से कपूर की गंध आती है।
तुलसी-रस एक चम्मच पीने से उल्टी आनी बंद हो जाती है। तुलसी-रस में शहद मिलाकर चाटने से भी तुंरत लाभ होता है। तुलसी-रस गले में उतरते ही अपना चमत्कार दिखा देता है।
तुलसी-दल का रस पिलाने से पीड़ा या तो होगी नहीं या कम होगी। तुलसी बीज पानी में भिगो दें। जब पानी में बीजों का लुआब घुल जाए, तो मिश्री घोलकर पिला दें। प्रसव की वेदना में कमी आ जाएगी।
अगर बच्चे के लिए मां का दूध पर्याप्त न आए, तो तुलसी-रस और मकई के पत्तियों का रस दस-दस मिलीलीटर, असगंध का रस और गूदा पांच मिलीलीटर शहद के साथ एक सप्ताह तक प्रसूता को पिलाएं। इससे दूध शुद्ध होगा और बच्चे के लिए पौष्टिक रहेगा।
आमतौर पर त्वचा के रोग तुलसी-जड़ के ऊपर की मिट्टी गीली करके लेपने से ही दूर हो जाते हैं। फोड़े-फुंसी निकल आएं, तो तुलसी और नीबू रस मिलाकर मालिश करनी चाहिए। तुलसी का तेल भी बड़ा गुणकारी है और इसके लिए ढाई सौ ग्राम तुलसी-दल पीसकर लेई-सी घोंट लें। उसे आंच पर पकाकर पानी सुखा दें, तो बाकी तुलसी तेल बच जाएगा।
योनि से अनचाहा स्त्राव निकलते रहना स्त्री को निचोड़ कर रख देता है। श्वेत प्रदर हो तो तुलसी-रस में शहद चटाएं। तुलसी-रस में जीरा मिलाकर गाय के दूध के साथ सेवन करने से प्रदर से मुक्ति मिल जाती है। रक्त प्रदर हो, तो तुलसी-रस में शहद की जगह मिश्री मिलाकर सेवन करें। दो सप्ताह तक यह इलाज जारी रखें।
समय से पूर्व बाल पकना नर-नारी को शोभाहीन बना देता है। चुटकी भर आंवला-चूर्ण और ग्यारह तुलसी-दल पीसकर पानी में घोल लें। पानी इतना ही मात्रा में लें कि यह घोल पूरी तरह सिर के बालों की जड़ों तक लग सके। 15-20 मिनट तक इस घोल को असर करने दें। सूख जाने पर सिर धोएं और मन भाता तेल लगा दें। नियमानुसार यह घोल रोज लगाते रहें। असर दो सप्ताह के अन्दर ही सामने आ जाएगा, मगर आप जल्दीबाजी न करें और प्रयोग तीन महीने जारी रखें।
हिस्टोरिया की रोगी महिला को तुलसी के बीज जटामांसी, ब्राह्मी, पुष्पी, असगंध ओर बच का समान मात्रा में चूर्ण लेकर एक-एक छोटी चम्मच दिन में दो बार दूध से सेवन कराना हितकारी रहेगा।