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टमाटर में सेहत भरी है

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टमाटर एक खूबसूरत फल है, जो सर्वसुलभ और सस्ता होने के साथ-साथ पौष्टिक तत्वों से भरपूर है। टमाटर का उपयोग फल और सब्जी दोनों तरह से किया जा सकता है। कच्चे हरे टमाटर भी सब्जी बनाने में प्रयुक्त होते हैं। देश के प्रत्येक भाग में टमाटर की उपज होती है। हर वर्ग और आयु के लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। आज टमाटर की सब्जी, सलाद, सूप, चटनी इत्यादि कितनी ही चीजें बनती हैं।
टमाटर की खोज आज से करीब चार शताब्दी पूर्व सन् 1628 ई में सर वाल्टर रेले ने ‘रोल‘ नामक एक अमरीकी द्वीप में की थी। लेकिन उन्नीसवीं शताब्दी की शुरूआत तक इसे एक विषैला फल माना जाता था और इसका उपयोग खाद्य पदार्थ के रूप में वर्जित था। लेकिन सन् 1820 ई0 में डेविड जानसन नामक एक वनस्पतिशास्त्री ने इस ‘जहरीले फल‘ को सार्वजनिक रूप से खाने की घोषणा की। डेविड की इस घोषणा से जन-साधारण में काफी हलचल मच गई। स्थानीय पुलिस प्रदर्शन-स्थल पर पहुंच गई क्योंकि उसकी नजर में यह ‘आत्मघात का प्रयास‘ था। डेविड जानसन ने अपनी घोषणा के अनुसार, तीन-चार लाल टमाटर खाकर दिखाए। किन्तु उन्हें कुछ नहीं हुआ। तब इस सदियों पुरानी भ्रांत धारणा की इति-श्री हुई कि टमाटर जहरीला फल है।
टमाटर की रासायनिक संरचना के अनुसार, प्रति सौ ग्राम टमाटर में 0.9 ग्राम प्रोटीन, 0.2 ग्राम वसा, 3.6 ग्राम कार्बोहाइड्रेट आदि पोषक तत्व होते हैं। इसके अतिरिक्त, इसमें विटामिन ‘ए‘, विटामिन ‘सी‘, कैल्शियम, आयरन आदि पौष्टिक तत्व भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं। प्रति सौ ग्राम टमाटर से शरीर 20 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त करता है। टमाटर एक बलवर्द्धक फल है। यह शरीर की पाचन-शक्ति में वृद्धि करता है तथा शरीर के लिए जरूरी विटामिन की आपूर्ति कर रक्त की प्रक्रिया को सुचारू गति देता है। सामान्य कमजोरी में टमाटर का सेवन लाभकारी है।
टमाटर के नियमित सेवन से विटामिन ‘सी‘ की कमी से होने वाले रोग जैसे जुकाम, स्कर्वी, रक्त-स्त्राव, दंत-रोग आदि से बचा जा सकता है। इसी प्रकार टमाटर से उपलब्ध विटामिन ‘ए‘ नेत्र-रोगों जैसे रतौंधी, नेत्र-पटल की खुश्की, आंखों की कमजोरी आदि में अचूक औषधि का काम करता है।
मिट्टी खाने वाले बच्चों को अक्सर पांडु नामक रोग हो जाता है। इस रोग में यकृत की कार्य क्षमता समाप्त हो जाती है और शरीर में रक्त का अभाव सा हो जाता है। ऐसी सूरत में बच्चों को पर्याप्त मात्रा में टमाटर का रस देने से काफी लाभ हो सकता है। मधुमेह के रोगियों के लिए भी टमाटर का सेवन उपयोगी व लाभप्रद है। प्रचुर मात्रा में कैल्शियम होने के कारण टमाटर दांत की विविध-बीमारियों को दूर करता है। जिन व्यक्तियों के मसूढे़ कमजोर हो गए हैं और उनमें से खून आता हो, उन्हें नियमित रूप से प्रतिदिन दिन में चार बार टमाटर का रस पच्चीस-पच्चीस ग्राम पीना चाहिए। कच्चा टमाटर खाना भी लाभकारी है।
खाना खाने से पहले लाल टमाटर का सेवन पाचन-तंत्र का सक्षम बनाता है। भोजन इससे जल्दी हजम हो जाता है और खट्टी डकारें आना, पेट व सीने में जलन तथा भारीपन की शिकायत दूर होती है। टमाटर रक्त शुद्धिकरण की प्रक्रिया में भी उपयोगी है। इस वजह से टमाटर के नियमित सेवन से चर्म-रोग दूर होते हैं और शरीर की त्वचा मुलायम व कांतिवान बनती है। टमाटर के 10 ग्राम रस में 20 ग्राम नारियल का तेल मिलाकर मालिश करने से खुजली में राहत मिलती है। टमाटर का एक चैकोर टुकड़ा काटकर चेहरे के काले दागों पर बांधने से दाग दूर हो जाते हैं। टमाटर के रस का सबेरे के समय रोजाना सेवन त्वचा की खुश्की को दूर करता है। टमाटर के रस के उबटन से भी त्वचा निरोग होती है। पथरी के रोगियों को टमाटर का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगो के लिए टमाटर हानिकारक सिद्ध हो सकता है। आमतौर पर एक दिन में अधिक से अधिक दो सौ पचास ग्राम टमाटर का सेवन करना चाहिए। टमाटर का सेवन करने से पूर्व सतर्कतापूर्वक उन्हें देख लेना ठीक रहता है। सड़े-गले और दूषित टमाटर फायदे के स्थान पर नुकसान भी कर सकते हैं।
टमाटर न केवल रोग-निवारक और स्वादिष्ट फल है बल्कि इसके बहुतेरे अन्य इस्तेमाल भी हैं। अदरक, नमक, गर्म मसाला, लाल-काली मिर्च, शक्कर, सोडियम बेंजोएट आदि मिलाकर टमाटरों का उत्तम कोटि का रूचिकर साॅस बनाया जा सकता है। इसी प्रकार भोजन से पहले टमाटर का सूप बनाकर पीने से भूख बढ़ती है। टमाटर के कईं स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाए जा सकते हैं। टमाटरों के विविध उपयोग लघु गृह-उद्योग के रूप में विकसित हो रहे हैं और विदेशों में भी टमाटरों से निर्मित चीजों की मांग व लोकप्रियता बढ़ रही है।