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sword | तलवार 1900

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युद्ध और हिंसा मानव का आदिम स्वभाव रहा है। मानव सभ्यता के शुरूआती दौर में पाषाण काल के नुकीले पत्थरों के हथियारों से शुरू हुआ, यह सफरनामा आज आधुनिक युग के परमाणु बम तक आ पहुंचा है।

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इतिहास में तलवार

इतिहास की इस शस्त्र यात्रा में ‘तलवार’ एक अत्यंत महत्वपूर्ण हथियार रही है। हालांकि आज युद्ध के बदलते तौर-तरीकों में इस शस्त्र की उपयोगिता अप्रांसगिक हो चुकी है। लेकिन दुनिया में एक युग तलवार का भी रहा है। यह वही तलवार है, जिसके धारदार फर से लाखों-करोड़ों इंसानों के सिर धड़ से अलग हो गये।

तलवार या खड्ग एक अत्यन्त प्राचीन हथियार है। पुराने जमाने में युद्ध के दौरान तलवार का खास तौर पर प्रयोग होता था । तलवार के दो हिस्से मुख्य रूप से होते हैं। एक मूठ तथा दूसरा लम्बी पत्ती। इस बात के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलते हैं कि इस हथियार की खोज सबसे पहले किसने और कब की, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह हजारों बरस पुराना शस्त्र है।

महाभारत में भी तलवार जैसे शस्त्र के अस्तित्व में होने के उल्लेख मिलते हैं। प्राचीन काल में इसे ‘असि’ कहा जाता था, यह तलवार के मौलिक रूप से कुछ भिन्‍न किस्म का एक शस्त्र था। इसमें मुख्य अंतर फल (ब्लेड) का था। तलवार का फल कुछ गोलाई लिये होता था ,  जबकि असि का फल सीधा होता था। प्राचीन युग में तांबे की तलवार बनती थी। ईसा के 200 वर्ष पूर्व पीतल की तलवार बनने लगी थी। इसके पश्चात लोहे की तलवार का प्रचलन हुआ।

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तलवार पर आराध्य का अंकन

कई तलवार के धनी अपनी तलवार पर अपने आराध्य देव जैसे गणेश, शिव, हनुमान आदि के चित्र अंकित करवाते थे। उनकी मान्यता थी कि ऐसा करने से युद्ध में ईश्वर उनकी सहायता करेगा। मुस्लिम बादशाहों के शासन काल में तलवारों पर चंद्रमा के चिन्ह अंकित किये जाते थे। इसके अतिरिक्त अरबी और फारसी की इबादत लिखी तलवारें भी बनायी जाती थीं। भारत के राष्ट्रीय संग्रहालय में आज भी बादशाह जहांगीर की बेशकीमती तलवार मौजूद है , जिस पर ‘शाह जहांगीर बादशाह गाजी’  शब्द खुदे हुए हैं।

म्यान भी जरुरी

तलवार की धार को बरकरार रखने के लिए ‘म्यान’ एक निहायत जरूरी चीज है। यदि तलवार को खुला रख दिया जाए, तो कुछ अरसे बाद उसकी धार कुंद हो जाती हैं। म्यान चांदी,  चंदन,  पीतल,  कीमखान आदि से बनायी जाती है। तलवार के बारे में अत्यन्त प्राचीन धारणा है कि शुद्ध वर्ण मृदु स्पर्श, लचकदार और तेज धार वाली तलवार सर्वश्रेष्ठ होती है। प्राचीन वैज्ञानिक वाराह मिहिर के मुताबिक,  तलवार लगभग 50 इंच लम्बी होनी चाहिए। यदि उसे जमीन पर खड़ा किया जाए तो उसे नाभि तक जरूर पहुंचना चाहिए। तलवार के रख-रखाव व उपयोग के सम्बन्ध में प्राचीन युद्ध-शास्त्रों में काफी विवरण प्राप्त होता है।

आज तलवार का महत्व अवश्य ही कम हुआ है। लेकिन फिर भी तलवार अपना स्थान इतिहास में निर्धारित कर चुकी है। आज भी आत्मरक्षा हेतु तलवार एक उपयुक्त शस्त्र है।                 

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