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राज सफलता के

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‘सफलता‘ सिर्फ सफलता होती है उसका कोई विकल्प नहीं होता। कामयाब आदमी के पीछे जमाना चलता है, उसके पदचिन्ह अपने आप सफलता के सोपान बन जाते है। सफलता आपको आत्म विश्वास से भर देती है। आपकी बात ध्यान से सुनी जाती है, आपकी शख्सियत को वजन दिया जाता है। कामयाबी आपको रहनुमाई की ताकत देती है।
कामयाबी यूंही हासिल नहीं हो जाती। किसी भी कामयाब आदमी से पूछिये – उसकी सफलता के पीछे कितना धैर्य, कितनी मेहनत और कितनी असफलताएं छुपी पड़ी है? सफलता रास्ते में पड़ा हीरा नहीं है, जिसे कोई भी उठा ले। विश्वविख्यात उद्योगपति सर हेनरी फोर्ड कहते हैं -‘‘ कामयाबी की कोशिश करने वाले शख्स को हर हालात के लिए तैयार रहना चाहिए। जीत-हार, फायदे-नुकसान की तरह सफलता और असफलता भी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। असफलता से निराश होने के बजाए धीरज के साथ पुनः कामयाबी के लिए कोशिश करना ही सफलता का मूल मंत्र है।‘‘
कामयाबी के साथ सब्र का रिश्ता बहुत गहरा है। दार्शनिक जान रस्किन कहते हंै- ‘‘ धैर्य समस्त शक्तियों और आनंद का मूल है। धैर्यवान व्यक्ति कभी भी नाकामयाबी से निराश नहीं होता, बल्कि हर असफलता उसे और अधिक प्रेरित करती है अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए। इतिहास में ऐसे कोई उदाहरण नहीं है, जब आदमी के धैर्यपूर्ण प्रयत्न कभी असफल हुए हो। उतावलापन और कामयाबी एक दूसरे के प्रतिकूल भाव हैं। सफलता कभी जल्दबाजी में नहीं मिलती और जल्दबाजी में मिली सफलता कभी स्थायी नहीं होती।‘‘
सफलता का दूसरा मूल मंत्र है – अपने मकसद अपने लक्ष्य की शनाख्त या पहचान। आपके सामने अपना लक्ष्य बिल्कुल साफ और स्पष्ट होना चाहिए। अपने लक्ष्य के प्रति किसी भी प्रकार का भ्रम, आपकी सफलता को संदिग्ध बना सकता है। लक्ष्य निर्धारित करते समय अपनी सीमाओं व क्षमताओं का आकलन अवश्य कीजिए। अपनी सीमा व क्षमता से बड़ा लक्ष्य आपकी सफलता की राह में अवरोध बनकर खड़ा हो सकता है। यदि हम अपनी योग्यताओं का समुचित मूल्यांकन कर अपने लक्ष्य निर्धारित करंेगे तो निश्चित ही सफलता हमारे कदम चूमेगी।
बिना मेहनत के कामयाबी की आस करना मृग मरीचिका के समान है। परिश्रम सफलता और तरक्की की आधारशिला है। ऐसे कई उदाहरण मिलेंगे, जिनमें आदमी ने अपनी कठोर मेहनत व लगन से असंभव नजर आने वाले कामों को पूरा कर दिखाया है, दरअसल आज की समूची दुनिया इंसानी मेहनत के दम पर सृजित की हुई है। सभ्यता के विकास से पूर्व ही आदमी ने अपने परिश्रम से इस दुनिया की शक्ल बदलना शुरू कर दिया था। जीवन के हर क्षेत्र में परिश्रम से लोगों ने अभूतपूर्व सफलताएं अर्जित की हैं। आदमी ने अपनी मेहनत के बल पर दुर्गम पर्वत, चोटियों पर कामयाबी के झंडे गाड़े है तो असीम सागर की गहराईयों को नाप लिया है। किसी कवि ने ठीक कहा है –
‘‘आंसू को पसीने में बदलो, मेहनत से नसीब बदलता है।
यह उतना ही सच है, जितना सूरज हर रोज निकलता है।‘‘
जो व्यक्ति सफलता प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध होते हैं, वह अवसर का इंतजार नहीं करते बल्कि वह अपने अवसर खुद बनाते हैं। समय के एक-एक पल का सदुपयोग अपने लक्ष्य की प्राप्ति हेतु कीजिए। समय की ताकत को पहचानिए और अपनी सफलता के लिए वक्त का इस्तेमाल कीजिए। ‘समय ही नहीं मिलता‘, ‘फुरसत कहां है?‘ जैसे बहाने व्यर्थ और अर्थहीन है। इनका कोई औचित्य नहीं है। हर महान व्यक्ति ने अपनी सफलता के लिए अपनी तमाम व्यस्ताओं के बीच से ही वक्त चुराया है। अवसर की प्रतीक्षा में वक्त बरबाद मत कीजिए। आपके आस-पास ही अवसर बिखरे पड़े हैं। उन्हें समेटकर सफलता के मार्ग पर अग्रसर हो जाइए।
अपनी महान संभावनाओं पर पूरा भरोसा कीजिए। अपनी सोच को सकारात्मक दिशा दीजिए। ‘आप सबकुछ कर सकते है।‘ यह आत्म विश्वास अपने भीतर पैदा कीजिए। विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आत्मविश्वास को डगमगाने नहीं दें। निरन्तर संघर्षरत रहें, आपकी सफलता सुनिश्चित है।
वस्तुतः सफलता र्कइं-एक गुणों व प्रयत्नों का एक समन्वित स्वरूप है। सम्पूर्ण सफलता इन गुणों के समुचित संगम से ही संभव है। समय-समय पर अपनी सफलताओं का सिंहावलोकन भी अपनी सफलता की राह को अधिक प्रशस्त करेगा, आप आज ही सफलता का संकल्प लें और साबित करें कि आप एक कामयाब इंसान हंै।
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