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छींक : दिलचस्प जानकारी

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‘छींक‘ के सम्बन्ध में सदियों से विभिन्न प्रकार की भ्रान्तियां और धारणाएं प्रचलित हैं। हमारे यहां आम तौर पर छींक को एक अशुभ लक्षण माना जाता है तथा किसी शुभ अवसर पर छींक होने पर विघ्न का संकेत समझा जाता है। घर से बाहर निकलते समय यदि कोई छींक देता है, तो उसे अशुभ और अनिष्टकारी मानकर प्रस्थान को कुछ समय के लिए स्थगित कर देना एक सामान्य बात है। किसी शुभ कार्य के प्रारम्भ में छींक का बड़ा दोष माना जाता है। छींक के कारण लोग उस कार्य की सफलता के प्रति आशंकित हो जाते हैं। हमारे देश में अशिक्षित और ग्रामीण लोगों की बात छोड़ भी दी जाए तो लाखों-करोड़ों सुशिक्षित व्यक्ति भी छींक के अंधविश्वास के शिकार है। परिवार में किसी बच्चे द्वारा छींक दिए जाने के तुरन्त बाद उसकी दीर्घायु की कामना की जाती है।
छींक के बारे में भ्रान्तियां केवल भारत में ही हों, ऐसी बात नहीं है। कई यूरोपीय देशों में भी छींक के बारे में विचित्र मान्यताएं प्रचलित हैं। अंतर सिर्फ यह है कि हमारे यहां छींक को अशुभ माना जाता है, जबकि स्काटलैंड आयरलैंड जैसे देशों में छींक को एक शुभ-संकेत व सफलता की संभावना का प्रतीक समझा जाता है। वहां छींक को सुदृढ़ मानसिक शक्ति का परिचायक समझा जाता है। छींकने वाले व्यक्ति को पर्याप्त सम्मान दिया जाता है।
सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में तो यूरोप में छींक को अत्यधिक महत्व दिया जाता था। वहां यह परम्परा प्रचलित थी कि यदि कोई व्यक्ति अनायास छींकता है तो उसके आस-पास बैठे व्यक्ति अपना हैट उतार कर उसका अभिवादन करते थे। इस परम्परा की पृष्ठभूमि में उनका यह अंधविश्वास था कि कोई अलौकिक शक्ति प्रकट होती है। उसी अलौकिक सत्ता के प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए टोप उतार कर अभिवादन करने की प्रथा शुरू हुई। सन् 1772 में एक विख्यात ईसाई धर्मगुरू ने लिखा था कि जो शख्स अपने किसी परिचित के छींकने पर टोप उतार कर उसका अभिवादन नहीं करता, वह अपने परिचित का हित चिंतक नहीं हो सकता। साथ ही वह प्रभु का भी अपराधी होता है।
अमेरिका के रेड इंडियन कबीले में छींक के बारे में एक विचित्र विश्वास प्रचलित हैं। अनपढ़ लोगो के इस कबीले में यदि किसी व्यक्ति को जुकाम के कारण बार-बार छींके आने लगती है तो यह समझा जाता है कि कोई दुष्ट प्रेतात्मा उसके शरीर में प्रविष्ट हो गई है। उस प्रेतात्मा से मुक्ति के लिए ये लोग तरह-तरह के अनुष्ठान करते हैं। अनुष्ठान में जुकाम-नाशक जड़ी बूटियां काम में लाई जाती हैं। जुकाम ठीक हो जाने के बाद परिवार जन पीड़ित व्यक्ति का नाम परिवर्तित कर देते हैं। उनका विश्वास है कि नाम बदलने से दुष्ट प्रेतात्मा उस व्यक्ति को मुक्त कर देती है।
कुछ अफ्रीकी देशों में छींक को दैवीय कोप का संकेत समझा जाता है। अफ्रीकी कबीलों में यह विश्वास प्रचलित है कि छींक के माध्यम से दैविक-शक्ति किसी भावी अनिष्ट की आशंका का संकेत देती है। यहां दैविक शक्ति को प्रसन्न करने के लिए छींकने वाले व्यक्ति की पूजा की जाती है। अत्यधिक छींके होने की स्थिति में हवन की तरह का एक विशेष अनुष्ठान किया जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार की वस्तुओ की आहूति दी जाती है।
चीन तथा सुदूर पूर्वी देशों में छींक को स्वास्थ्य-लाभ के संकेत के रूप में लिया जाता है, छींक आने का अर्थ अच्छे स्वास्थ्य के प्रति विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
यदि प्रचलित अंधविश्वासो और भ्रान्तियों से अलग हटकर देखे तो छींक आना विशुद्ध रूप से एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, जिसका सौभाग्य अथवा दुर्भाग्य से कोई सम्बन्ध नहीं है। जब नाक की न्यूकस झिल्ली के तंत्रिका छोर पर कोई हलचल या सुगबुगाहट होती है तो वायु का एक फव्वारा सा पानी की बूंदों के साथ तीव्र गति से नाक के रास्ते बाहर निकलता है और उससे जो ध्वनि उत्पन्न होती है, उसे छींक कहा जाता है। इसके कई कारण हो सकते है जैसे – किसी बाहरी चीज का यकायक नाक में घुसना, तम्बाकू या किसी अजनबी तीखी गंध का नासिका मंे प्रवेश करना आदि। इसके अतिरिक्त जुकाम छींक का सबसे प्रमुख कारण है। ऐसा माना जाता है कि जुकाम शारीरिक विकारों के उन्मूलन में सहायक होता है। प्रायः छींकें आने से सिर का भारीपन तो दूर होता ही है, साथ ही एक हल्कापन भी महसूस होता है। छींकें आना शीघ्र आरोग्य-प्राप्ति का लक्षण माना जाता है। कभी छींक नहीं आना एक प्रकार का शारीरिक विकार है। कई लोग छींक नही आने पर तम्बाकू आदि सूंघ कर कृत्रिम रूप से छींकने का प्रयत्न करते हैं।
अब चलते-चलते छींको के दिलचस्प कीर्तिमान पर भी एक नजर! डोना ग्रिफिथ नामक एक महिला 13 जनवरी 1981 से 15 सितम्बर 1983 तक अर्थात लगातार 978 दिन छींकती रही। इस दौरान उसने लगभग दस लाख बार छींका। एक साहब ने छींक की गति नापने का प्रयत्न किया तो पाया कि छींक की अधिकतम गति 103.6 मील प्रति घंटा है। छींक के बारे में एक दिलचस्प तथ्य यह है कि आप छींकते वक्त कभी भी आंखे खुली नहीं रख सकते।
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