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चांदी: चमचमाता इतिहास | silver Information in hindi

सोना और चांदी दोनों धातुएं सदियों से आदमी के लिए इस्तेमाल से ज्यादा कौतूहल व जिज्ञासा का विषय रही हैं। जहां सोना अमीर-वर्ग की बपौती रहा है, वहीं चांदी अपनी जगमगाहट के साथ निर्धन और साधारण वर्ग को आकर्षित करती रही हैं। यह बात अलग बात है कि इस दौर में चांदी अपने निरंतर बढ़ते मूल्य के कारण आम आदमी की पहंुच से बाहर हो चुकी है, किन्तु फिर भी चांदी ‘गरीबों का सोना‘ कहलाने की हकदार तो है ही। हम चांदी के बारे में आपको जानकारी देते है !

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चांदी का इतिहास

चांदी का चमकता इतिहास शायद आदमी की उस आदिम मनोवृति जितना ही पुराना है, जिसके तहत उसने बहुमूल्य वस्तुओं को खोजना और संचय-संग्रह करना प्रारम्भ किया। हमारे प्राचीन धर्मग्रन्थों में रजत कलश के उपयोग का उल्लेख कई स्थानों पर मिलता है। उस युग में रजत-कलश शुभ एवं पवित्र माने जाते थे। मिस्त्र के पिरामिडों से प्राप्त चार हजार साल पुरानी चांदी की वस्तुएं इस द्यातु की प्राचीनता और महत्व को भली प्रकार स्पष्ट करती हैं। मिस्त्र के सम्राट मीनेस के संबंधित एक विवरण में उल्लेख मिलता है कि उस युग में सोने का मूल्य चांदी की अपेक्षा ढाई गुना अधिक था। यूनान व रोम में ईसा से आठ सौ वर्ष पूर्व के रजत – सिक्के प्राप्त हुए हैं।

चांदी को लैटिन भाषा में ‘अर्जेन्टस‘ तथा संस्कृत में ‘अर्जेन्टा‘ कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है – ‘हल्के रंग वाला‘। स्पेनिश भाषा में चांदी को ‘ला प्लाटा‘ कहा जाता है। स्पेन की एक नदी का नाम लाप्लाटा है। इसी प्रकार अर्जेन्टीना का नाम भी चांदी के सम्मान में रखा गया ।

प्राचीन काल में चांदी का इस्तेमाल मुख्य रूप से मुद्रा के रूप में होता था। कहा जाता है कि दुनिया में स्वर्ण मुद्रा के चलन से कोई पचास वर्ष पूर्व ही रजत मुद्रा प्रचलन में आ चुकी थी। प्राचीन भारत में प्रचलित रजत मुद्रा को ‘कार्षापण‘ कहा जाता था। गुप्त कालीन, व मुगलकालीन चांदी के सिक्के भारत में मुद्रा के रूप में चांदी के उपयोग की पुष्टि करते हैं।

सिक्कों के अतिरिक्त चांदी प्राचीन काल से आज तक आभूषणों के निर्माण हेतु प्रयुक्त होती रही है। प्राचीन काल में रूस, यूनान, चीन व मिस्त्र में बने चांदी के जेवर अत्यधिक लोकप्रिय थे। इनकी बारीक नक्काशी व कलात्मक सुन्दरता उस युग में उपलब्ध सीमित साधनों को देखते हुए सचमुच आश्चर्यजनक थी। आज तो विश्व के प्रत्येक देश में रजत – आभूषणांे का चलन है किन्तु इटली, जर्मनी व फ्रांस में निर्मित चांदी के आभूषणों को सुन्दरता व शुद्धता की दृष्टि से श्रेष्ठ माना जाता है। भारत में चांदी के गहने राजस्थान, आन्ध्रप्रदेश, कोल्हापुर, गुजरात, उड़ीसा व राजकोट में अधिक बनते है, राजस्थान की चांदी की मीनाकारी तथा बंगाल के चांदी के गजरे अधिक मशहूर हैं, चांदी के आभूषणों में पायजेब, झुमके, हार, बिछिया, चूड़ियां, कमरबंद आदि मुख्य हैं। पहले इनका चलन गांवों में या शहरों के निर्धन वर्ग में अधिक था किन्तु अब धनिक वर्ग में भी चांदी के जेवरों का चलन हो गया है। मुम्बई के एक जौहरी के पास चांदी के गहनों की दस हजार से भी अधिक डिजाइनों के सेट हैं। इतने अधिक डिजाइन सेट सोने में उपलब्ध नहीं हैं।

चांदी के बर्तन

चांदी के बर्तन भी बहुत पुराने समय से इस्तेमाल किये जाते रहे हैं। सिकन्दर ने जब हिन्दुस्तान पर आक्रमण किया, जो यकायक यूनानी सैनिकों की किसी बीमारी से मृत्यु होने लगी। यह आश्चर्य की बात थी कि सेना के उच्चाधिकारी व कमांडर उस अज्ञात बीमारी से बिल्कुल बचे रहे। बाद में जब इस विषय पर गहन शोध किया गया तो यह तथ्य सामने आया कि कमांडर व उच्चाधिकारी चांदी के बर्तनों में भोजन करने के कारण उस बीमारी से अपनी रक्षा करने में समर्थ हो सके क्योंकि चांदी बेक्टिरिया-नाशक क्षमता होती है। प्राचीन काल में शासक-वर्ग तथा सम्पन्न लोग चांदी के बर्तनों में ही भोजन किया करते थे। काउंट ओरलोव के पास 20 क्विंटल शुद्ध चांदी से बना 3275 वस्तुओं का अत्यंत मूल्यवान डिनरसेट था। हमारे यहां सिंधिया राज परिवार में चांदी से निर्मित एक छोटी-सी खूबसूरत रेलगाड़ी है, जो भोजन सामग्री लेकर डाइनिंग टेबल पर चारों तरफ चक्कर लगाती है। आज भी समृद्ध परिवारों में चांदी के डिनर-सैट, लैमन सैट, आइसक्रीम सैट, बीयर मग, पानदान, फूलदान आदि वस्तुएं मिल जाती हैं।

चांदी का औषधिय उपयोग

शायद कम लोगों को मालूम होगा कि चांदी का औषधीय उपयोग भी होता है। 37 राष्ट्रों के लिए चांदी के प्रयोग पर शोध कार्य कर रहे सिल्वर इन्स्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक रिचार्ड एल. डेविस के अनुसार अब तक औषधियों में रजत के 87 उपयोग जाने गए हैं। हृदय-रोग तथा जोड़ो के दर्द में चांदी से बनी दवाओं का इस्तेमाल पुराने जमाने से होता आ रहा है। पेट के अल्सर, सिफलिस, हैजा, मलेरिया आदि कई बीमारियों में चांदी के उपयोग बनी औषधियां काम आती है। चांदी से बने अत्यंत महीन वर्क मिठाईयों, पान तथा अनेक व्यंजनों को सजाने के साथ-साथ वर्द्धक भी होते है।

चांदी एक बहु -उपयोगी धातु

आज चांदी एक बहुउपयोगी धातु बन चुकी है। फिल्म और फोटोग्राफी का कार्य तो चांदी के बिना बिल्कुल असंभव है। फिल्म के प्रत्येक रोल पर एक औंस का एक हजारवां हिस्सा चांदी लगी होती है। आज सर्वाधिक चांदी की खपत फोटाग्राफी तथा फिल्म डेवलपर में ही हो रही है। अमेरिका की ईस्टमैन कोडक कम्पनी की इस कार्य में चांदी की वार्षिक खपत दो हजार टन से भी अधिक है।
चांदी के बहुआयामी उपयोग के अन्तर्गत कार, टेलीफोन, कम्प्यूटर, आइनो, डाक्टरी औजारों से सूक्ष्मदर्शी, परमाणु उपकरणों, अंतरिक्ष राकेटों, कैमरो, श्रवण यंत्रो आदि के निर्माण में चांदी का उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त दंत-क्षय को रोकने के लिए दांतों में चांदी भरवाने का रिवाज भी आम है। अकेले अमेरिका में प्रतिवर्ष साठ टन चांदी इस कार्य में लग जाती है।

चांदी एक ऐसी द्यातु है, जो अपनी विशिष्ट संरचना के कारण अनेकों खूबियां रखती है। इसकी तन्यता स्वर्ण से भी अधिक हैं। इसकी तन्य-क्षमता का प्रमाण इस तथ्य से स्पष्ट रूप से मिल जाता है कि केवल एक ग्राम चांदी से दो किलोमीटर लम्बा तार आसानी से निकाला जा सकता है। दुनिया की कोई भी अन्य धातु प्रकाश परावर्तन क्षमता में रजत का मुकाबला नहीं कर सकती। चांदी की पतली से पतली परत भी अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश का 95 प्रतिशत परावर्तित कर सकती है। इसी प्रकार ताप व विद्युत को संवाहित व प्रसारित करने की क्षमता में चांदी के सामने कोई धातु नहीं ठहरती। सोने की तरह चांदी में भी कभी जंग नहीं लगता।

पानी के शुद्धिकरण के लिए चांदी

चांदी पानी के शुद्धिकरण का सर्वोŸाम साधन है। यह पानी में आक्सीजन को इतना सक्रिय कर देती है कि पानी के हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। अच्छे स्विमिंग पुलो के चारकोल फिल्टरों में पानी के शुद्धिकरण हेतु चांदी का इस्तेमाल किया जाता है। इससे पानी में क्लोरिन मिलाने की जरूरत नहीं रहती। एक लीटर पानी के शुद्धिकरण हेतु एक ग्राम चांदी का एक करोड़वां भाग पर्याप्त होता है। हवाई जहाजों में पीने का पानी चांदी से ही शुद्ध किया जाता है। हड्डियों की मरम्मत के लिए सर्जन चांदी के लवण मिले ‘सीमेंट‘ का उपयोग करते हैं। आजकल तो कृत्रिम वर्षा के लिए चांदी के आयोडाईड रवों का इस्तेमाल किया जाता है। चांदी दरअसल एक सूखा प्राकृतिक स्नेहक है, जो मशीनों को अत्यधिक ताप व घर्षण से बचाता है। यही वजह है कि जेट इंजिनों और डीजल चालित इंजनों के बेयरिंग चांदी की प्लेट से बनाए जाते हैं।

एक अनुमान के अनुसार विश्व में प्रतिवर्ष 26 प्रतिशत चांदी फोटोग्राफी, 23 प्रतिशत विद्युत व इलेक्ट्रोनिक्स उपकरणों के निर्माण, 11 प्रतिशत पदकों, कप, ट्राफी, 24 प्रतिशत बर्तनों, आभूषणों के निर्माण तथा शेष 16 प्रतिशत अन्य कार्यो में खर्च होती है।

अद्द्भुत धातु चांदी

विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले पांच हजार सालों में नौ सो तैंतीस हजार टन चांदी खदानों से खोदकर निकाली जा चुकी है। यदि शुद्ध चांदी की एक-एक औंस की सिल्लियां बनाई जाएं तो अब तक प्राप्त चांदी से एक बारह मील लम्बा ऐसा राजमार्ग निर्मित किया जा सकता है, जिस पर चार कारें एक साथ दौड सके। अब तक खोदी गई चांदी से ताजमहल जैसी भव्य व विशाल इमारत शुद्ध चांदी की तैयार की जा सकती है। यदि हम इस चांदी को दुनिया की पूरी आबादी के बीच बांटना चाहें तो प्रति व्यक्ति 6 औंस चांदी हिस्से में आएगी।

दुनिया का 15 प्रतिशत रजत राकी मांऊटेंस और मैक्सिको की रजत खदानों से प्राप्त होता है। मैक्सिको में 1978 में खदानों से पांच करोड़ औंस चांदी निकाली गई। रजत उत्पादन में रूस, पेरू और अमेरिका क्रमशः दूसरे, तीसरे व चैथे स्थान पर हैं। किसी जमाने में रजत भंडार में पेरू प्रथम स्थान पर था किन्तु 16वीं शताब्दी स्पेनियों ने वहां विपुल रजत भंडार लूट लिया। तीस स्पेनी जहाजों में भरा यह चांदी का विशाल भंडार दुर्भाग्यवश समुद्र में डूब गया।

जहां तक भारत का प्रश्न है, यहां बिहार और राजस्थान में चांदी की कुछ खदानें अवश्य हैं, किंतु उनसे प्राप्त होने वाली चांदी नाममात्र की है। फिर भी भारत के पास विश्व के कुल रजत भंडार की लगभग 15 प्रतिशत चांदी है। एक अनुमान के अनुसार इस समय देश में चार से पांच अरब औंस तक का रजत भंडार है जिसमें से एक तिहाई सरकारी खजाने में तथा शेष दो तिहाई आम जनता के पास आभूषणों, बर्तनांे आदि के रूप में है। चांदी की तस्करी से दिनों दिन देश का रजत भंडार कम होता जा रहा है।

औद्योगिक क्षेत्रों तथा अन्य क्षेत्रों में दिनोंदिन चांदी की मांग बढ़ती जा रही है, खदानों से प्राप्त रजत द्वारा इस मांग की पूर्ति संभव नहीं है। तिजोरियों में बंद चांदी को बाहर लाना ही अब एक मात्र विकल्प है।