shridhar vembu teaching kids

कौन हैं श्रीधर वैंबू जिन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया | Sridhar Vembu who got awarded Padam shri

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picture : twitter/svembu पद्मश्री 2021 सम्मानित श्रीधर वेम्बू

सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के बेताज बादशाह श्रीधर वैंबू की कहानी फिल्मी भले ही प्रतीत होती है। मगर भारत की माटी का असल सबूत है वह! श्रीधर 18000 करोड़ की संपत्ति का मालिक है, मगर उसका मन भारत के गांव की मिट्टी की ओर भागता है। zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बू की कहानी जिन्हे हाल ही में यूनियन मिनिस्ट्री द्वारा पदम श्री से सम्मानित किया गया। वेम्बू 59th सबसे अमीर भारतीय है, उनकी जोहो में 88 % भगीदारी है।

श्रीधर वेम्बू – सम्पूर्ण जानकारी

जन्म1967 (आयु 54 वर्ष)  – तेनकाशी( चिदंबरमपुरम, तंजौर) तमिलनाडु (भारत)
व्यवसाय जोहो (Zoho) कॉरपोरेशन – फाउंडर सीईओ (CEO)
संपत्ति250000 बिलियन अमेरिकी डॉलर
शिक्षाभारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मद्रास) IIT Madras – B. tech. (1989 )
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी (न्यू जर्सी) – एमएस (MS), पीएचडी (PhD)
सम्मान / अवार्ड्स – Ernst & Young “Entrepreneur of the Year Award” – 2019
– पद्मश्री अवार्ड – 2021
शौकगरीब बच्चों को निशुल्क ट्यूशन और उनके साथ क्रिकेट खेलना
पत्नीप्रमिला श्रीनिवासन
भाईराधा वैंबू , कुमार वेम्बू
श्रीधर वेम्बू का परिचय

सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में पढ़े हैं श्रीधर

आपको यह जानकर हैरत होगी कि श्रीधर ने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा तमिलनाडु के एक छोटे से गांव में सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में प्राप्त की। मद्रास आईआईटी से इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में पीएचडी की।पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स में उनकी गहरी दिलचस्पी है । उन्होंने जापान, सिंगापुर और ताइवान के बाजार की सफलता के बारे में अध्ययन भी किया।

छोटे- से अपार्टमेंट में शुरू की अपनी कंपनी!

बाद में उन्होंने सैनडिएगो स्थित क्वालकॉम में नौकरी की ।दो साल बाद जॉब छोड़ कर भारत आए। 1996 में अमेरिका के एक छोटे से अपार्टमेंट में टोनी थॉमस के साथ एक सॉफ्टवेयर कंपनी ‘एड्वेंटम ‘ के नाम से शुरू की । बाद में, किन्ही कारणों से इस कंपनी का नाम 2009 में ‘जोहो कारपोरेशन’ (zoho corporation) कर दिया गया!

किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि सॉफ्टवेयर डेवलपर का व्यवसाय वैंबू को इस कदर रास आ जाएगा उन्होंने आश्चर्यजनक तेजी से कामयाबी पाई और उनकी कुल संपत्ति वर्तमान में 18000 करोड रुपए हैं। जोहो कॉरपोरेशन अमेरिका के अलावा मेक्सिको और जापान में भी कार्य करती है। भारत के 76 में सबसे अमीर आदमी श्रीधर वैंबू 8000 से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं। कोरोना काल में प्रधानमंत्री की अपील पर उन्होंने प्रधानमंत्री के पीएम केयर्स में 25 करोड़ रुपए दान भी दिये।

भारत की प्रतिभा पर जबरदस्त विश्वास

भारत सरकार के एक बड़े अधिकारी ने एक बार उनसे पूछा- “ट्रंप प्रशासन ने भारतीयों के अमेरिका में प्रवेश वाले वीजा H-1/B पर बैन लगा रहा है; इस बारे में आपका क्या कहना है?”

तब श्रीधर वैंबू बोले-  “अरे वाह! यह तो भारत की दृष्टि से बहुत अच्छा है। इससे प्रतिभाशाली भारतीय युवा भारत में ही अपने सॉफ्टवेयर ब्रांड और कंपनियां खड़े करने लगेंगे। आखिरकार इस पॉलिसी का भारत को बड़ा लाभ होगा।”

अमेरिका से तमिलनाडु के छोटे से गांव ले गए अपनी कंपनी का हेड क्वार्टर!

लोग उनकी कामयाबी से भौंचक्के थे। मगर चौंकने के लिए अभी बहुत कुछ बाकी था ।2019 में श्रीधर वैंबू ने कैलिफोर्निया के वेग एरिया में अपनी कंपनी का ग्लोबल मुख्यालय चेन्नई से 650 किलोमीटर दूर तामिलनाडु के एक छोटे से गांव मकालपुर में स्थानांतरित करने का निर्णय लेकर सभी को अचंभित कर दिया।

जीवन शैली – साइकिल और ऑटो से आते- जाते हैं

गांव में आने के बाद श्रीधर वैंबू की जीवन – शैली काफी कुछ बदल गई और वह सादगी की जीती जागती मिसाल बन गए। वैंबू के जमीन से जुड़े होने का बेहतरीन उदाहरण है कि वह साइकिल और आटो का ही उपयोग कहीं आने – जाने के लिए करते हैं।

बच्चों को निशुल्क ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया कोरोना काल में लॉकडाउन में उन्होंने तमिलनाडु के एक छोटे से गांव ट्रेन तेनकाशी में बच्चों को निशुल्क पढ़ाना प्रारंभ किया ।शुरू में केवल तीन बच्चे उनके पास पढ़ने के लिए आते थे। बाद में पढ़ने आने वाले बच्चों की तादाद में जबरदस्त इजाफा हो गया ।तब श्रीधर ने एक और फैसला लिया- एक ऐसा स्कूल खोलने का ! जहां पर गरीब बच्चों को न केवल मुफ्त शिक्षा और पौष्टिक भोजन दिया जाएगा बल्कि उनमें हुनर पैदा करने के प्रयास भी किए जाएंगे। वह शिक्षा का ऐसा मॉडल खड़ा करना चाहते हैं!

जिसमें डिग्री और नंबरों का महत्व ना हो। उनका मकसद बच्चों को हुनरमंद बनाना है। 

श्रीधर वैंबू

इसके लिए पेपर- वर्क भी कर लिया गया है। श्रीधर वैंबू ने तमिलनाडु के दस छोटे गांव- कस्बों में अपनी कंपनी स्थापित की; ताकि वहां अपने गांव /अपनी मिट्टी छोड़कर पलायन न करें! अमेरिका में उनकी जोहो यूनिवर्सिटी में 90% तमिलनाडु के युवा दिन अध्ययन करते हैं ।वहां वह बिना फीस स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देते हैं।2004 में, उन्होंने औपचारिक विश्वविद्यालय शिक्षा के विकल्प के रूप में ग्रामीण छात्रों को व्यावसायिक सॉफ्टवेयर विकास शिक्षा प्रदान करने के लिए ज़ोहो स्कूल की स्थापना की।