Loneliness - Zindagi Today

अकेलापन क्या है और अकेलापन महसूस हो तो क्या करना चाहिए ?

यह सच है कि सभ्यता के उद्भव के पूर्व आदमी अकेला था और अकेले रहना पसंद करता था। लेकिन सभ्यता के क्रमिक विकास ने परिवार, विवाह, समाज जैसी संस्थाओं को जन्म दिया। मनुष्य ने समूह के रूप में रहना और सामाजिक नियमों का पालन करना शरू किया। वस्तुतः यह आदमी की अकेलपन से जंग की शुरूआत थी। विवाह और परिवार संस्थाओं ने आदमी को अकेलपन से निजात दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस लेख में हम जानेगे क्या है अकेलापन, इसके प्रमुख कारण और अकेलापन महसूस हो तो क्या करना चाहिए

अकेलापन महसूस हो तो क्या करना चाहिए
अकेलापन

अकेलेपन या एकाकी जीवन का अभिशाप अभी तक दुनिया से खत्म नहीं हो सका है। इस भरी दुनिया की रंगीनियों के बीच भी लाखों लोग बिल्कुल अकेले हैं। अकेलेपन के शिकार लोगों में मुख्यतः अविवाहित, विधवाएं, विधुर, तलाकशुदा या परित्यक्त स्त्री-पुरूष शामिल हैं। वैसे परिवारविहीन व्यक्ति भी एकाकी जीवन व्यतीत करने हेतु अभिशप्त हैं।

अकेलापन क्या है ?

जब आप सबसे अलग और दुःखी महसुस करते है। इसमें आप धीरे-धीरे अपने मन के सारे दरवाज़े बंद करते जाते है। आपको ऐसा महसूस अगर आप एक सप्ताह से ज्यादा ऐसा महसुस करते है तो आपको ध्यान देने की आवश्यता है।

कब होता है अकेलापन ?

सभी कभी न कभी अकेलापन महसुस करते है, जब हमें अकेले लंच करना पड़े, जब आप किसी नयी जगह शिफ्ट हुए हो या फिर आपको वीकेंड में कोई भी आपके साथ न हो, आपके दोस्त आपको किसी पार्टी में आमंत्रित न करे और भी कई वज़ह । ये एक सामान्य सी बात थी, लेकिन कुछ दशकों में लाखों लोगो के लिए यह एक विकराल समस्या बनती जा रही है, जो कि कई और मानसिक समस्याओं को जन्म देती है। खासकर शहरों में लोग दोस्तहीन, एकाकी और अवसाद से ग्रस्त महसुस कर रहे है।

अकेलापन और उदासी में अंतर ?

उदासी अकेलेपन का एक प्रभाव है, उदासी के कई कारण हो सकते है, जैसी कि अप्रिय घटना, अकेलापन, अपने सपने न पुरे कर पाना वगैरह, लेकिन यह अकेलेपन से काफी अलग है।

अकेलेपन के लक्षण

– अकेलपन का शिकार व्यक्ति हरदम अपने आप को परेशान व त्रस्त पाता है।
– अकेलेपन को भोगता हुआ समाज से परिवार से दोस्तो से कटने लगता है।
– आत्मविश्वास कमजोर हो जाता है।
– चुप-चाप, गुमसुम अपने आप मेें खोया रहना।
– किसी काम में दिल नहीं लगना, दुनिया में कुछ भी अच्छा नहीं लगना।
– अपने अस्तित्व का व्यर्थ महसूस करना।

अकेलेपन के कारण

सच्चाई यह है कि एकाकीपन या अकेलापन एक मानसिक रोग है और वस्तुतः जीवन के प्रति गलत व स्वार्थपूर्ण नजरिया इसका मुख्य कारण है।

अकेलापन के प्रभाव

कैंसर जैसे रोग के शिकार लोगों में भी ऐसे व्यक्ति सामान्य से अधिक संख्या में हैं, जो एकाकी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वैज्ञानिक अनुसंधानों से यह तथ्य सामने आया है कि अकेलेपन के शिकार लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में प्रायः कमी हो जाती है।

कई बार व्यक्ति निराशा से छुटकारा पाने के लिए वर्जित दिशाओं में मुड़ जाता है। सिगरेट, शराब या किसी दूसरे नशे का सहारा लेकर अपने अकेलेपन से मुक्ति का प्रयास करता है। ऐसे प्रयास प्रायः उसे स्वास्थ्य की दृष्टि से पतन की ओर ले जाते है। अन्य रोगों से ग्रस्त होकर वह कुंठित हो जाता है।

बढ़ता हुआ अकेलापन

भौतिकतावाद से उपजी नई बीमारियों की तरह ‘अकेलापन‘ भी मूलतः पाश्चात्य जगत की देन है। पहले सभी सयुंक्त परिवार में रहते थे, पड़ोसी पड़ोसी कम रिश्तेदार होते थे। आज जहा परिवार एकल होते जा रहे हैं वहीं सच्चे पड़ोसी और दोस्त खत्म होते जा रहे है।

अकेलापन महसूस हो तो क्या करना चाहिए ? क्या कोई दवा हैं ?

वैसे तो अकेलेपन की कोई खास दवा है नहीं, आप यहाँ दिए गए सुझाव अपना सकते हैं :
1. आत्मविश्लेषण करे – विचार करें कि आप क्या किसी विशेष बात को लेकर नकारात्मक (negative) सोच रहे है, किस पॉइंट पर आप अकेलेपन में प्रवेश करते है। अपने आप से कुछ सवाल पूछे –
– कब आप सबसे ज्यादा अकेला महसूस करते है ?
– क्या आप किसी व्यक्ति विशेष के साथ ज्यादा अकेला महसुस करते है ?
– कितने समय से आप ऐसा महसूस कर रहे हैं ?
– अकेलापन आपको क्या करने पर मजबूर करता है ?
इन सब बातों को नोट करे और विश्लेषण करें।
2. सोशल बने – किसी NGO का हिस्सा बने, लोगों की मदद करे। समाज को अपना योगदान दे।
3. पालतू पशु पाले
– कुत्ता, बिल्ली, खरगोश आदि पालतू जानवर बहुत ही अच्छे साथी होते हैं, ये अपने मालिक का हमेशा साथ निभाते है। ये कुछ ही समय में अपने मालिक के साथ गहरा रिश्ता बना लेते हैं।
4. कुछ नया सीखे – music, कोई स्पोर्ट्स, डांस ग्रुप इत्यादि अकेलेपन में काफी मदद करते हैं।
5. Zym / मार्निंग वॉक स्टार्ट करे –
दिन की शुरुआत workout या jogging से करे
6. मेडिटेशन करें – नेगेटिव एनर्जी को हटाये और पाजिटिविटी पर ध्यान केंद्रित करे।
7. मिलनसार बने –
अपने आप को नए लोगों से मिलने झूलने के लिए प्रेरित करे, फिर से नयी शुरुआत करे, किसी क्लब या समूह का हिस्सा बने जो आपके समान रूचि रखता हो जैसे की म्यूजिक, ट्रेवल या फिर स्विमिंग क्लब 🙂


आदमी का केवल खुद के लिए सोचना, खुद के लिए जीना, उसे स्वार्थी तथा आत्म-केन्द्रित बनाते हैं। अपने ओढ़े हुए अकेलपन के लबादे से बाहर निकलकर देखिए, यह दुनिया कितनी खूबसूरत है! जीवन के बसंत में कोयल की कूक सुनिए, झरनों के संगीत को अपनी आत्मा में उतार लीजिए, निरन्तर चलती दुनिया की रफ्तार से अपने कदमों की ताल मिलाइए। फिर देखिए, कहां आप अकेले है?

दोस्त बनाइए, अपने आसपास के परिवेश में, उनकी खुशियों और गम में शरीक हो जाइए। मासूम बच्चों की किलकारियों और लोगों की निश्छल मुस्कराहटों में अपने अकेलेपन का इलाज तलाशिए, गाइए गुनगुनाइए..

किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार,

किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार!

किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार …

जीना इसी का नाम है!


याद रखिए, यह अकेलापन आपका अपना बुना हुआ है, और आप ही को यह जाल काट कर बाहर आना है।

References:

Youtube video – Kurzgesagt – In a Nutshell

WikiHow

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