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सफरनामा घोड़े का

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घोड़े मानव सभ्यता के विकास से बहुत पहले ही अस्तित्व में आ चुके थे। पौराणिक काल से आधुनिक काल तक के लम्बे समय में कई ऐसे घोड़े हुए हैं, जिन्होंने समय की रेत पर अपनी टापों के अमिट निशान छोड़े हैः आइए आज आपको लिय चलते हंै घोड़ो की एक ऐसी दुनिया में, जहां आप मिलेंगे कई पौराणिक, ऐतिहासिक और आधुनिक युग के इतिहास प्रसिद्ध अश्वों से!
देवताओं के और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन में जो चैदह रत्न निकले, उनमें से एक था ‘उच्चैःश्रवा‘ नामक अत्यन्त उच्च कोटि का घोड़ा! यह घोड़ा बाद में आकाश मार्ग से देव लोक की ओर प्रस्थान कर गया।
पौराणिक कथाओं में भगवान विष्णु द्वारा कलियुग में ‘कल्कि अवतार‘ नामक सफेद घोडे़ के रूप में प्रकट होने का वर्णन मिलता है। इसी प्रकार विष्णु ने ‘हयग्रीव‘ नामक अश्व के रूप में भी अवतार लिया, जिसका सिर अश्व का तथा धड़ मनुष्य का था।
सूर्य देवता के सात घोड़ांे वाले रथ में जोते जाने वाले प्रसिद्ध घोडे़ के क्रमशः गायत्री, बृहती, उष्णिक, जगती, त्रिष्ठुम, अनुष्टम और पंक्ति थे। इन घोड़ों को एलोरा की गुफाओ और कोणार्क के सूर्य-मंदिर में बड़ी कलात्मकता के साथ उत्कीर्ण किया गया है।
‘अश्व-शास्त्र‘ नकुल द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इस पौराणिक ग्रंथ में इन्द्र के घोड़े का रंग हरा, चन्द्रमा के अश्व का श्वेत, यम के अश्व का रंग श्यामवर्ण अग्नि का अश्व पीत वर्ण, तथा धन-देवता कुबेर के अश्व का रंग नीला बताया गया है।
धार्मिक ग्रंथ ‘रामायण‘ में कई स्थानों पर घोड़ो का उल्लेख मिलता है। श्रीराम द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले अश्व का नाम ‘जंग बदन‘ था। भरत का चपल और द्रुतगामी घोड़ा ‘रंगीला था शत्रुघ्न का घोड़ा ‘ंचंपा‘ सुन्दरता की दृष्टि से बेमिसाल था, लक्ष्मण का शक्तिशाली घोड़ा ‘लक्खी‘ अपने युग का अद्वितीय अश्व था!
महाभारत के एक प्रसंग में वर्णन आता है कि भगवान श्री कृष्ण के जिस स्वर्ण रथ में अर्जुन ने सुभद्रा का हरण किया, उसमें जुते हुए दोनों घोड़े क्रमशः ‘जैव्य‘ तथा ‘सुग्रीव‘ की गति बादलों के गर्जन से भी अधिक भयानक थी।
गौतम बुद्ध ने महाभिनिष्क्रमण ( गृह त्याग ) अपने अतिप्रिय घोड़े ‘कंयक‘ पर बैठकर ही किया था।
घोड़ों के पौराणिक आख्यान के बाद आइए, अब कुछ ऐतिहासिक घोड़ों की बात की जाए। सिकन्दर का ‘ब्यूरोसेफेलस‘ नाम का सफेद अरबी नस्ल का घोड़ा अत्यन्त सुन्दर बुद्धिमान, स्वामी भक्त और साहसी था। सिकन्दर अपने इस घोड़े से बेहद प्यार करता था। कहा जाता है कि वह पामीर के पठार से भरत तक आया था। पंजाब के एक युद्ध के दौरान ‘ब्यूरोसेफेलस‘ मारा गया, अपने प्रिय घोड़े की मौत ने सिकन्दर महान को बहुत उद्वेलित किया। उसकी स्मृति में सिकन्दर ने झेलम नदी के किनारे उसके नाम पर एक शहर बसाया। ‘मेरेंगो‘ नेपोलियन बोनापार्ट के ताकतवर और युद्ध-कौशल में दक्ष घोड़े का नाम था। इस घोड़े के साथ नेपोलियन ने कई युद्ध सफलतापूर्वक जीते ।
स्वाधीनता और स्वाभिमान की जलती मशाल महाराणा प्रताप के साथ उनके बहादुर और जाबांज घोड़े ‘चेतक‘ का नाम भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। चेतक को प्रताप अपना दायां हाथ मानते थे। हल्दी घाटी की मशहूर जंग में अपने मालिक महाराणा प्रताप की जान बचाते हुए चेतक शहीद हो गया। हल्दी घाटी में आज भी चेतक की समाधि बनी हुई है और कई कहानी किस्से और किवदन्तियां उसके साथ जुड़ी हुई है।
महाराणा प्रताप के ही समकालीन प्रतिद्वंदी बादशाह अकबर ने अपने सफेद रंग के घोड़े पर सन् 1523 में नौ दिनों की अल्पावधि में छह सौ मील की यात्रा की थी। उस घोड़े का नाम था ‘नूरबेजा‘। अकबर को अपने इस घोड़े पर बड़ा नाज था।
टीपू सुल्तान के स्वामीभक्त घोड़े ‘दिलखुश‘ ने अपनी जान पर खेलकर अपने मालिक की जान बचाई थी। जब धोखे से टीपू पर आक्रमण किया गया तो दिलखुश अचानक चारों पैरो से उछल पड़ा और तोप का गोला टीपू के बदले उसे आकर लगा।
छत्रपति शिवाजी को अपनी श्यामवर्णी घोड़ी ‘कृष्णा‘ से बेहद लगाव था। इसी घोड़ी पर बैठकर शिवाजी ने तेरह दिनों में एक हजार मील की यात्रा की और पन्हाला के किले को फतह किया।
सिक्ख धर्म के दसवें गुरू गोविन्द सिंह के घोड़े का नाम ‘नीला‘ था। विशेष अवसरों पर गुरू गोविन्दसिंह इस घोड़े पर सवारी करते थे।
पंजाब के महाराजा रणजीतसिंह एक कुशल घुड़सवार थे। उनकी चंचल चपल घोड़ी का नाम था ‘ लैली ‘, जो अरबी नस्ल की एक शानदार घोड़ी थी। रणजीतसिंह को घोड़े पालने का बड़ा शौक था। उनके अस्तबल में उम्दा नस्लों के करीब एक हजार घोड़े थे, जिनमें अरबी नस्ल की ‘गौहरबार‘ और ‘सफेद परी‘ नामक घोड़ियां मुख्य थीं।
मेन के प्रेस्क द्वीप का घोड़ा ‘जान आर. बे्रडन‘ अपने आप में अद्भुत था। उसने अपने जीवन में हर दौड़ में जीत हासिल की। शहर के नागरिक ‘बेडन‘ का बेहद सम्मान करते थे। उसे एक वरिष्ठ नागरिक के रूप में सम्मान दिया जाता था। ब्रेडन का बैंक में अपने नाम से अलग खाता था, जिसमें उसके द्वारा जीते गए इनामों की राशि जमा की जाती थी। जान ब्रेडन के निधन पर पूरे प्रेस्क द्वीप में शोक मनाया गया और पूरे राजकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया। ब्रेडन अपने पीछे डेढ़ लाख डाॅलर छोड़ गया था, जिनका उपयोग बाद में शहर में नया टाऊन हाॅल, लाईब्रेरी, बाल उद्यान और एक अस्पताल बनवाने हेतु किया गया।
बीसवीं शताब्दी की शुरूआत में पैदा हुआ ‘क्लेवर हंस‘ नाम का घोड़ा आज भी अपनी विलक्षण बुद्धिमता के लिए याद किया जाता है। क्लेवर न सिर्फ पढ़ सकता था बल्कि वह गणित के सवाल तक हल कर लेता था। जैसे यह पूछे जाने पर कि चार और पांच कितने होते है? क्लेवर नौ बार अपने पैरों की थपकी देकर सही जवाब दे देता।
सिने स्टार रांय रोजर्स का घोड़ा ‘ट्रिकर‘ हर प्रकार की जटिल से जटिल गांठ को पल-भर में खोल देने में माहिर था। इसके अलावा गिनती करना और ब्लेक बोर्ड पर अंग्रेजी के अक्षर लिख देना भी ट्रिकर के लिए आसान कार्य था। ‘ट्रिकर‘ ने अपने मालिक के साथ कई फिल्मों में काम किया।
इसी तरह सिल्वर नाम एक जर्मन घोड़ा गणित के जटिल समीकरणों को बड़ी सरलता से हल कर लिया करता। वैज्ञानिकों की एक कमेटी ने गहन अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि वास्तव में ‘सिल्वर हैन्स‘ एक जीनियस घोड़ा है।
कुछ अर्सा पहले स्काटलैंड से ‘शेरगार‘ नामक एक कीमती घोड़ा चोरी हो गया। इसकी कीमत तीन करोड़ रूपये आंकी गई। मखमली खाल वाला यह दु्रतगामी घोड़ा इंग्लैण्ड के न्यू मार्केट से रेस कोर्स की दो क्लासिक दौड़़े जीत चुका था।
कुछ ही समय पूर्व अमेरिका के किनलैंड शहर में हुई घोड़ो की नीलामी में ‘माई बपर्स‘ नामक घोड़े पर दस करोड़ अस्सी लाख रूपयों की बोली लगाई गयी। यह घोड़ा ‘नार्दन डांसर‘ नामक मशहूर घोड़े की संतान है।