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त्वचा की रक्षा करना, आपका काम

( Protecting the skin, your job )

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हमारा शरीर तीन मार्गो से रक्त को शुद्ध करता है। एक मार्ग फेफड़ों का है, जो श्वास द्वारा रक्त को शुद्ध करते हैं। एक मिनट में 14 से 18 बार श्वास लिया जाता है। आपका हृदय 24 घंटे में आठ हजार किलोग्राम रक्त का संचालन करता है। यह रक्त धमनियों द्वारा सारे शरीर में भ्रमण करता है। उतना ही रक्त शिराओं द्वारा वापस हृदय में आता है। हृदय उसे फेफड़ो मंे शुद्ध करता है और दुबारा शरीर को भेजता है, जिससे हमारा शरीर स्वस्थ रहता है। दूसरा गुर्दे (वृक) से रक्त शुद्ध होता है। गुर्दे रक्त से यूरिक अम्ल निकाल कर पेशाब के रास्ते बाहर कर देते हैं। तीसरा मार्ग त्वचा का है। त्वचा की लाखों ग्रंथियां रक्त को वहीं शुद्ध करती हैं और विकार को पसीने द्वारा या मैल द्वारा त्वचा के रास्ते बाहर कर देती हैं।
त्वचा का मार्ग बड़ा उपयोगी मार्ग है। हमारे शरीर में दिन भर काम करने, खाने-पीने, भाग-दौड़ करने, सोच-विचार करने से कुछ न कुछ टूट-फूट होती रहती है। शरीर का यह विकार रक्त में मिल जाता है। चर्म की ग्रंथियां रक्त को वहीं शुद्ध करके सक्रिय कर देती हैं, जिससे गंदा रक्त सरलता से हृदय की ओर चला जाता है और बचा हुआ विकार फेफड़ों में शुद्ध होकर शरीर को पूरी तरह पुष्ट करने के लिए धमनियों में दौड़ता रहता है।
त्वचा द्वारा रक्त को शुद्ध करने की प्रक्रिया बड़ी सरल है क्योंकि यह प्रक्रिया स्थानीय है। नहीं तो हृदय और फेफड़ों तक शुद्ध होने के लिए गंदे रक्त को लम्बी दौड़ लगानी पडे़गी। यदि त्वचा सक्रिय न होगी तो शिराओं में विकार जमा हो जाएगा, रक्त की दौड़ में रूकावट पड़ेगी,चर्म रोग, फोड़ा-फुंसी, एग्जिमा, खारिश आदि हो जाएगी। विकार के रूप में जोड़ों में दर्द, गठिया वगैरह हो सकता है। रक्त के गंदा रहने से फेफड़ांे तथा गुर्दों पर अधिक भार पड़ेगा, जिससे फेफड़े विकार से भर जाएंगे, रक्त शुद्ध करने की उनकी क्षमता कम हो जाएगी, फेफड़ों के रोग नज़ला, जुकाम, खांसी, दमा आदि हो सकते हैं। गुर्दो पर जोर पड़ने से पेशाब संबंधी रोग भी हो सकते हैं। तात्पर्य यह है कि केवल त्वचा को सक्रिय रखकर बहुत से रोगों से बचा जा सकता है। त्वचा को स्वस्थ रखना निरोगी रहने की कुंजी है। त्वचा को स्वस्थ रखना बड़ा सरल है। बिना खर्चे और थोड़े प्रयास से यह काम हो सकता है।
प्रतिदिन स्नान करने से पहले सारे शरीर को 5 – 7 मिनट हाथों से रगड़ कर गर्म करें। यह काम धूप में करें तो और भी अच्छा है। फिर ताजे पानी से स्नान करें। स्नान करते हुए भी हाथों से या तौलिए से खूब रगड़े। सर्दियों में यदि गर्म पानी से स्नान करना हो तो पहले गर्म से स्नान करके फिर ठंडे पानी से स्नान करें। इससे त्वचा बहुत अधिक सक्रिय होती है। त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए शरीर के तापमान से कम या ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए।
सर्दियों में धूप में तेल की मालिश करने से भी त्वचा सक्रिय होती है। मालिश से त्वचा को सीधी खुराक मिलती है। तेल से मालिश हृदय की ओर करनी चाहिए। मालिश से मांसपेशियों की गांठें खुल जाती हैं, जिससे त्वचा की गं्रथियां अपना काम सरलता से कर लेती हैं। सर्दियों में रक्त के चर्म पर न आ पाने से त्वचा खुश्क हो जाती है। तेल की मालिश से त्वचा की खुश्की दूर होती है।
शरीर पर खुले कपडे़ पहनने की आदत अच्छी है। नीचे के कपड़े (अण्डर गारमेंट्स) आदि सूती होने चाहिए, नाइलोन के नहीं। नाइलोन त्वचा को हानि पहुंचाता है, खादी का कपड़ा त्वचा के लिए बहुत अच्छा है।
त्वचा को सक्रिय रखने के लिए प्रतिदिन कुछ-न-कुछ व्यायाम अवश्य करना चाहिए। ताजी शुद्ध वायु में घूमना, थोड़ा दौड़ लगाना या योगासन का अभ्यास करना बहुत अच्छा है। व्यायाम से शरीर के विकार को शरीर से बाहर निकलने में सहायता मिलती है, त्वचा शुद्ध होती है।
जिनके गुर्दे कमजोर हों, त्वचा को पूरी तरह सक्रिय रखना चाहिए। गर्म स्थान पर रहें, अधिक से अधिक पसीने को आने दें। वातानुकूलित यंत्र का प्रयोग न करें। पानी के साथ नींबू का प्रयोग अधिक करें।
त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए अपने भोजन की ओर ध्यान देना भी आवश्यक है। भोजन में क्षार तत्व को अधिक लेना चाहिए जैसे कच्ची सब्जियों का सलाद, संतरा-माल्टा, मौसम्मी, अन्नास आदि रसदार फलों का समयानुसार प्रयोग करना। हरी पŸोदार सब्जियों को अधिक खाना, नींबू का पानी में प्रयोग करना आपके रक्त को क्षार तत्व से भर देता हैं। रक्त आपका क्षारीय होगा तो उसकी दौड़ बढ़ जाएगी। उसकी दौड़ बढ़ेगी तो त्वचा तक आसानी से पहुंच सकेगा। इससे त्वचा की गं्रथियां सबल और सक्रिय होंगी, गं्रथियां सक्रिय होगी तो वह अपना काम पूरी तरह करेंगी। जब त्वचा का काम पूरी तरह सक्रिय होगा तो आप यह देखकर चकित रह जाएंगे कि आप पूरी तरह स्वस्थ हो गए। यह सारा काम स्वचालित है, जरूरत है आपको थोड़ा ध्यान देने की।