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पाॅवर थ्रेशर: सोचें किसान कैसा वरदान?

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‘विज्ञान वरदान भी है और अभिशाप भी‘ यह उक्ति थे्रशर मशीन के फायदे और नुकसानों को भली प्रकार स्पष्ट करती है। पिछले कुछ दशकों से खेती के पारम्परिक स्वरूप को बदलने हेतु कई वैज्ञानिक प्रयोगों और उपकरणों के इस्तेमाल की शुरूआत हुई है। फसल की कटाई के बाद अनाज निकालने की लम्बी एवम् श्रम साध्य प्रक्रिया को थे्रशर मशीन के आविष्कार ने एकदम आसान, त्वरित तथा सुविधाजनक बना दिया है। लेकिन हम इस के दूसरे पहलू को नजर अंदाज नहीं कर सकते। थे्रशर के प्रयोग की शुरूआत के बाद से हजारों लोग बाजू या हाथ कटवा चुके हैं। हर साल अनाज निकालने के दौरान जरा-सी असावधानी के कारण हाथ या कोहनी तक बाह कटने की कई दुर्घटनाएं होती हैं।
थ्रेशर से सम्बन्धित इन हादसों का मुख्य कारण पर्याप्त सर्तकता एवम् सावधानी का अभाव और जरूरी निर्देशों का पालन नहीं करना ही है। इन दुर्घटनाओं की पुनरावृति को रोकने के लिए जरूरी है कि कृषकों को थे्रशर के प्रयोग तथा बरती जाने वाली सावधानियों की समुचित जानकारी प्रदान की जावे अन्यथा सावधानी हटी, दुर्घटना घटी।
थे्रशर का प्रयोग करने से पूर्व इसके नट-बोल्ट तथा आवश्यक कल-पुर्जो की जांच कर लेनी चाहिए। चलाने से पूर्व पट्टे के नट-बोल्ट को भली प्रकार कस दें तथा जरूरी हिस्सों में ग्रीस लगा दें। थे्रशर को गाड़ना चाहिए। ऊबड़-खाबड़ धरातल पर काम में लिए जाने वाले थे्रशर से दुर्घटना की संभावनाएं अधिक रहती है।
पट्टे के सामने अवरोधक आवश्यक रूप से लगाया जाना चाहिए ताकि पट्टा टूटने या नट-बोल्ट खुल जाने की स्थिति में किसी दुर्घटना को टाला जा सके। थे्रशर का टापा पर्याप्त आकार का तथा कवर से ढंका हुआ होना चाहिए। पावर थै्रशर का उपयोग करते समय आकस्मिक अग्निकांड से निबटने के लिए पानी और रेत का समुचित प्रबन्ध करके रखें।
विद्युत-चलित थे्रशर में कनेक्शन के लिए अच्छी किस्म के मोटे तारों का प्रयोग करें साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मोटर तक विद्युत-प्रवाह मेन स्विच के माध्यम से ही पहुंचे। विद्युत कनेक्शन कुशल बिजली कारीगर द्वारा ही करवाएं। थ्रेशर चलाते समय प्रकाश का समुचित प्रबन्ध होना भी अत्यंत आवश्यक है। चालू मशीन में कभी पट्टा चढ़ाने की कोशिश न करें।
थे्रशर पर काम करते समय ढीले और उड़ने वाले वस्त्र न पहनें। स्त्रियां भी अपने बाल या चोटी खुली न रखें। महिलाओं का दुपट्टा या ओढ़नी उड़कर थे्रशर में उलझ सकती है अतः इसका विशेष ध्यान रखें।
थे्रशर से अनाज निकालने से पूर्व किसान को सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि फसल पूरी तरह सूख चुकी है क्योंकि गीली फसल से अनाज मुश्किल से निकलता है तथा थे्रशर पर भी अधिक जोर बढ़ता है। इसके अतिरिक्त गीली फसल के गुच्छे बन जाने से आग लगने का भी भय रहता है। थ्रेशर से अनाज निकालने का कार्य वृद्ध तथा कमजोर व्यक्तियों से नहीं करवाना चाहिए, लाक अथवा गेरा लगाने का कार्य प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा ही करना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को इस दौरान या इससे पूर्व किसी नशीली चीज का सेवन नहीं करना चाहिए। लाक लगाते समय हाथ को लाक के मुंह से काफी दूर रखना चाहिए। लाक लगाने व्यक्ति को लगातार दो घंटे से अधिक कार्य नहीं करना चाहिए। चार घंटे निरन्तर चलने के पश्चात थे्रशर को रोक कर उसके नट-बोल्ट कस दिए जाने चाहिए।
यदि कभी थे्रशर पर कोई दुर्घटना घटित हो ही जाए तो ध्यान रखें कि उस अंग के रक्त स्त्राव को रोकने के लिए उससे थोड़ा हटकर ऊपर की ओर कपड़ा बांधें। घाव पर राख या मलहम न लगाएं बल्कि समीप के अस्पताल जाकर प्राथमिक उपचार करवाएं। जो भाग कट गया है, उसे भी तुरंत सर्तकतापूर्वक जल से धोकर, साफ व गीले कपड़े में लपेटकर अस्पताल ले जाना चाहिए। दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने से पूर्व केवल पानी पिलाएं। चाय या दूध नहीं। यदि चोट ज्यादा नही आई है तो भी प्राथमिक उपचार अवश्य करवा लें तथा पीड़ित व्यक्ति को टिटनेस का टीका जरूर लगवा लें।
उपरोक्त सावधानियां बरतने से थ्रेशर से होने वाली दुर्घटनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त कृषि-वैज्ञानिकों को थे्रशर मशीन की कार्य-प्रणाली और बनावट में इस प्रकार के परिवर्तन करने चाहिए जिससे इससे होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। थे्रशर मशीन के माॅडल में अभी और अधिक सुधार की गुंजाइश है।