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पुलिस के साथी जासूस कुत्ते

प्राणी-जगत में कुत्ते ही एकमात्र ऐसा प्राणी है, जो आदमी से वफादारी और स्वामी-भक्ति के मामले में अपनी मिसाल खुद है। कुत्ते सदियों से मनुष्य का वफादार दोस्त रहा है। इतिहास में सैंकड़ों ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे, जिनमें कुत्ते ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर भी अपने मालिक की मदद की।
आदमी के प्रति अपनी वफादारी ही कुत्ते का एकमात्र गुण नहीं है। इनकी बहुमुखी उपयोगिता की पृष्ठभूमि में इनके अनेक ऐसे गुण हैं, जो इन्हें मनुष्य के लिए और अधिक उपयोगी बनाते हैं। दरअसल किसी बात को सीखने की अद्वितीय क्षमता, गंध पहचानने की अद्भुत शक्ति, सभी प्रकार के वातावरण और परिस्थितियों में ढल सकने वाली शारीरिक संरचना, दुस्साहसी प्रवृति आदि-आदि गुणों ने कुत्ते का उपयोग जासूसी और अपराधों की छानबीन में पुलिस की सहायता के लिए करने के वास्ते मनुष्य को प्रेरित किया।
आज कुत्ते का उपयोग जासूसी, रखवाली और अपराधियों का पता लगाने के लिए किया जाता है। सैनिक गतिविधियों में भी इनका बखूबी इस्तेमाल किया जाता है। हमारी सेना में जिस तरह घोड़ों, हाथियों और ऊंटों का ‘स्कवड‘ होता है, उसी प्रकार कुत्ते का भी ‘डाग-स्कवड‘ है, जो आवश्यक सैनिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाता है।
जहां तक पुलिस के कार्यो में कुत्ते की मदद का प्रश्न है, सचमुच ये बहुत ही कारगर तरीके से पुलिस को मदद पहुंचाते हैं। कई उलझे हुए आपराधिक मामलों में, जहां मानव-मस्तिष्क गुत्थियों को सुलझाने में विफल रहा, वहां अपनी प्राकृतिक क्षमताओं के बूते पर कुत्ते ने अपराधियों की सही शनाख्त की है। हत्या, डकैती, बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के अपराधियों का पता लगाने, तस्करी का माल पकड़ने, अफीम, गांजा, चरस, हशीश, स्मैक जैसे अवैध मादक पदार्थो का पता लगाने आदि कई महत्वपूर्ण कामों में पुलिस कुत्ते की अद्भुत घ्राण-शक्ति ( सूंघने की क्षमता ) से लाभ उठाती है। इसके अतिरिक्त, शहरों में रात्रि-गश्त में भी प्रशिक्षित श्वान-दल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पुलिस की मदद एवं जासूसी करने वाले कुŸाों को एक लम्बे और बेहद कड़े प्रशिक्षण-शिविर में अत्यंत सतर्कता और दक्षता के साथ प्रशिक्षित किया जाता है। सर्वप्रथम प्रशिक्षित किये जाने वाले कुत्ते की नस्ल का चयन किया जाता है। मुख्यतः इस कार्य के लिए अल्सेशियन और डोबरमन पिंस्चर नस्लों के कुत्ते का चयन किया जाता है।
प्रशिक्षित करने की अवधि आमतौर पर एक वर्ष से डेढ़ वर्ष के मध्य होती है। एक माह की आयु के पिल्ले को प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त समझा जाता है। प्रशिक्षण प्रदान करने वाले व्यक्ति को ‘हेंडलर‘ कहा जाता है। हंेडलर का सबसे पहला काम कुत्ते का विश्वास अर्जित करना और उसे दिये गए आदेशों का अर्थ समझाना होता है। इस दौरान हंेडलर को कुत्ते की सम्पूर्ण गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी होती है। थोड़े ही समय में कुत्ते अपने हंेडलर को पहचानने और प्यार करने लग जाता है।
अब प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू होता है, जिसमें कुत्ते को अनुशासन का पाठ पढ़ाया जाता है। कुत्ते को नियमित रूप से प्रतिदिन ‘परेड‘ करनी होती है। इसके अलावा, ‘बैठो‘, ‘उठो‘ और ‘रूको‘ आदि निर्देशों का पालन करना भी सिखाया जाता है। ‘आबेडियेंस वर्क‘ नामक प्रशिक्षण का यह चरण सामान्यतया 30 से 35 दिनों का होता है।
इसके पश्चात् कुत्ते की प्राकृतिक घ्राण-क्षमता को विकसित एवं परिष्कृत करने का प्रयास किया जाता है। इस चरण में हंेडलर अपनी वस्तु को कुत्ते का संूघाकर कहीं छुपा देता है और कुत्ते को गंध के आधार पर उस वस्तु को ढंूढना होता है। धीरे-धीरे कुत्ते इसमें पारंगत हो जाता है तो प्रशिक्षण के अंतिम चरण में कुत्ते को गंध की शनाख्त स्वयं करना सिखाया जाता है। जैसे किसी व्यक्ति का रूमाल कुत्ते को संूघाकर उसे कहीं दूर खड़ा कर दिया जाता है। अब गंध के आधार पर कुत्ते को उस व्यक्ति की खोज करनी होती है। इस तरह कठोर परिश्रम और लगन से कुत्ते को प्रशिक्षित किया जाता है तथा बिल्कुल दक्ष होने के पश्चात् ही इन्हें जासूसी और अपराध-अन्वेषण का काम सौपा जाता है। प्रशिक्षण-काल के दौरान कुत्ते के खाने-पीने और अन्य सुख-सुविधाओं का समुचित खयाल रखा जाता है।
कुत्ते की कार्य-क्षमता का मूल आधार उनकी गंध पहचानने की अद्भुत प्राकृतिक शक्ति है। गंध के सहारे ही वह अपराधी की खोज में आगे बढ़ता है। जिस प्रकार दुनिया में किन्हीं दो व्यक्तियों के अंगुलियों के निशान एक जैसे नहीं होते, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति के शरीर से निकलने वाली गंध भी अलग-अलग होती है। अपराधी के पैरों के निशान में ही उसकी गंध को संूघते हुए कुत्ते आगे बढ़ते हैं। कुत्ते सचमुच एक ऐसा जानवर है, जो हैरतअंगेज कारनामों का प्रदर्शन कर सकता है। उसकी गति, स्फूर्ति, तेज नजर, धीरज और घ्राण-शक्ति के जरिये उससे कई असंभव से लगने वाले कार्य भी करवाये जा सकते हैं। जासूसी और अपराध-अन्वेषण में कुत्ते और उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।