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बवासीर (Piles) – लक्षण | इलाज

Piles - Symptoms and Treatment
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गुदा की श्लैष्मिक झिल्ली के नीचे जो शिराएं होती हैं, उनके फैल जाने की स्थिति को बवासीर कहते है। शिरा की यह सूजन गुदा के अन्दर हो सकती है, अथवा ऐसा भी हो सकता है कि शिरा सूज कर गुदा के बाहर आ जाए। गुदा में दो तरह की शिराएं होती हैं। आन्तरिक शिराएं गुदा के निम्न भाग में होती हैं, जहां से वे ऊपर पहुंचती हैं। बाहरी शिराएं गुदा के मुख की त्वचा के नीचे होती हैं। इनमें से जब कोई एक शिरा फैलती है, तब रोगी को लगता है कि उसके एक मस्सा है। दो शिराओं की सूजन अर्थात दो मस्से, इसी तरह जब कई शिराएं सूज कर अंगूर के गुच्छे के समान हो जाती है, तब रोगी कहता है कि उसके कई मस्से हैं।

आंतरिक मस्से में हल्की-सी चोट से रक्त-स्त्राव हो सकता है। वस्तुतः रक्त स्त्राव ही इसका प्रमुख लक्षण है। आन्तरिक मस्सों को ‘खूनी बवासीर‘ कहा जाता है। यदि ये मस्से बड़े होते हंै, तो रोगी को सदा यही अहसास रहता है कि उसकी गुदा मेें कुछ अटका हुआ हैं।

बाहरी मस्सों में दर्द हो भी सकता है और नहीं भी, किन्तु उनसे खून नहीं निकलता है, इसलिए इन्हें ‘बादी बवासीर‘ कहते हैं।

कब्ज, गर्भावस्था और अधिक देर तक खड़े रहने अथवा बैठे रहने से गुदा की शिराओं में रक्त का दबाव बढ़ना बवासीर का कारण बनता है।

कब्ज: यूं तो निबटते समय गुदा क्षेत्र में जोर पड़ता ही है, किन्तु मल निकलने के बाद स्थिति स्वतः सामान्य हो जाती है, पर जब किसी व्यक्ति की शिराएं कमजोर पड़ जाती हैं तो वे कब्ज की स्थिति में जोर पड़ने की वजह से खिंची ही रह जाती है।

स्थानीय तनाव के अलावा कभी-कभी कब्ज के बाद दस्त की स्थिति में शिराएं एकदम फैल सकती हैं। उनके फटने से रक्त-स्त्राव हो सकता है। यह स्थिति बड़ी तकलीफदेह होती है। खासतौर पर शौच के दौरान यह दौर लगभग 5 दिन रहता है। फिर सूजन हटने लगती है।इस तरह के दौरे के बाद या तो पूरी राहत मिल जाती है, अथवा शीघ्र खुजली की शिकायत हो सकती है।

गर्भावस्था: गर्भावस्था में अक्सर बवासीर की तकलीफ हो जाती है, क्योंकि बढ़ता हुआ गर्भ पेट में सीधे उन रक्त वाहिनियों पर दबाव डालता है, जो मलद्वार की शिराओं से खून लेकर जाती है। इससे शिराओं में रक्त प्रवाह कम हो जाता है। परिणामस्वरूप वे फैल जाती हैं। गर्भावस्था के दौरान शुरू हुई बवासीर की तकलीफ प्रसव के बाद स्वतः ठीक हो जाती है।

जिन्हें लगातार अपने कार्य की वजह से लम्बी अवधि तक खड़े अथवा बैठे रहना पड़ता है, उनकी शिराएं भी फैल सकती हैं। इसीलिए बस, टैक्सी और ट्रक ड्राइवरों में बवासीर की तकलीफ आम है।

बवासीर से बचाव

रेशेदार भोजन और पानी का सेवन: रेशे आंतों में स्पन्ज की तरह पानी सोंख कर जैली जैसा पदार्थ बनाते हैं। आंतों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया की वजह से जल्दी ही इस पदार्थ में खमीर बन जाता है। इससे नरम मल आंतों में स्वतः आगे बढ़ता चला जाता है। इसलिए खूब रेशेदार भोजन करना चाहिए। पानी, अन्य पेय एवं रसीले पदार्थो का भरपूर सेवन करना चाहिए।

वैसलीन लगाएं: गुदा में आधा अन्दर तक वैसलीन का लेप करने से बवासीर की तकलीफ में आराम मिलता है।

सफाई का ध्यान रखें: मल-त्याग के बाद गुदा की सही साफ-सफाई जरूरी है। इसके लिए हल्के गरम पानी की पिचकारी प्रयुक्त की जा सकती है।

खुजलाएं नहीं: मस्सों में खुजली होने पर उन्हे खुजलाना ठीक नहीं। इससे शिराओं की नाजुक सतह को नुकसान हो सकता है। जाहिर है इस स्थिति में समस्या और जटिल होगी।

भारी बोझ न उठाएंः भारी बोझ और खूब कसरत करने से मस्से वैसे ही प्रभावित होते हैं, जैसे शौच के समय जोर लगाने से। अतः भारी बोझ उठाने की प्रवृति पर अंकुश रखें।

गर्म पानी के टब में बैठे: यदि बाथ-टब की सुविधा उपलब्ध हो, तो उसमें 3-4 इंच तक गर्म पानी भर घुटने उठाकर उसमें बैठें। गर्भावस्था में भी मस्सों की तकलीफ में यह उपाय बड़ा कारगर होता है। वस्तुतः इस तरह के सेक से दो फायदे हैं – एक गर्म पानी से दर्द में राहत मिलती है। दूसरे, गर्म पानी की वजह से प्रभावित क्षेत्र में रक्त-संचार बढ़ने से शिराओं की सूजन कम होती है।

वजन पर नियंत्रण जरूरी: शरीर के वजन का असर निम्नांगो पर पड़ता है। इसीलिए मोटे लोगों में बवासीर की शिकायत ज्यादा मिलती है।

नमक का सीमित प्रयोग: अतिरिक्त नमक के प्रयोग से शरीर की रक्त संचार प्रणाली में द्रव्यों की मात्रा बढ़ जाती है। इससे गुदा एवं अन्य स्थानों की शिराओं में सूजन आ सकती है।

नियंत्रित खान-पान: कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं, जो प्रत्यक्ष रूप से बवासीर की समस्या को भले ही ना बढ़ाएं, पर शौच के समय खुजली बढ़ाकर तकलीफ दे सकते हैं। ज्यादा काफी पीना, खूब मसालेदार भोजन करना, बीयर व शीतल पेयों का सेवन तकलीफदेह हो सकता है।