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सफरनामा पासपोर्ट का

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पासपोर्ट या पारपत्र का चलन वैसे बहुत पुराना है। हां अब इसके उपयोग का दायरा बहुत व्यापक हो गया है। बहुत पहले भी स्वदेश में ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए अनुमति पत्र दिए जाते थे, जिन्होंने कालांतर में पासपोर्ट की शक्ल अख्तियार कर ली। चन्द्रगुप्त मौर्य के शासन काल में आवागमन हेतु कागजों पर सरकारी मोहर लगाना जरूरी था। साथ ही, विशिष्ट स्थान पर रहने की अनुमति के लिए भी राज्य की मोहर की जरूरत होती थी। शहर में प्रवेश करते समय भी आंगतुकों को अपनी हाजिरी इंद्राज करना जरूरी था, जो सुरक्षा की दृष्टि एवं खुफिया इकाईयों के नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण था। ईसा के सैंकड़ों वर्ष पूर्व भी दुनिया के कई भागों में इजाजत-पत्र देने की प्रथा थी। यूनान व रोम के राजतंत्रों में पासपोर्ट जारी करने के उल्लेख हैं। जब रोम की सभ्यता का हृास होने लगा, तब देश में ही एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए अनुमति पत्रों की आवश्यकता महसूस की गई। इन अनुमति पत्रों को पासपोर्ट का पितामह माना जा सकता है।
बढ़ोत्तरी इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि फ्रांस की क्रांति के तहत इंसान की मूल आजादी की बात कही गई और सितंबर 1791 के का्रंतिकारी संविधान में पासपोर्ट को गैर जरूरी माना गया, परंतु दो वर्ष बाद 1793 में ही पासपोर्ट को अनिवार्य रूप से लागू किया गया। क्रांतिकारी जब सत्ता में लगभग जो उथल-पुथल अमेरिका में हुई, उससे भी पासपोर्ट की महती आवश्यकता महसूस की गई। अंगरेजों को शुरू में पासपोर्ट रूचिकर नहीं लगा, परंतु बाद में उन्होंने भी इसे मान्यता दी।
अमेरिका में 1856 से विदेशी यात्रा के लिए पासपोर्ट जरूरी समझा गया। परंतु जो विदेशी अमेरिका की धरती पर उतरते थे, उनके लिए पासपोर्ट जरूरी नहीं समझा गया था। इसकी वजह शायद प्रथम विश्व युद्ध रहा होगा क्योंकि योरप और अमेरिका में पहले विश्व युद्ध के बाद पासपोर्ट एक आवश्यक वस्तु बनी, जिसके बिना यात्रा करना कठिन हो गया। राष्ट्रों में एक दूसरे के यहां नागरिकों का आने-जाने में पासपोर्ट को लेकर उदारवादी रवैया अपनाया गया।
इसलिए इंग्लैण्ड में 1914 से पासपोर्ट पर फोटो जरूरी कर दिया गया। 1917 में रूस की क्रांति ने पासपोर्ट की जरूरत को अंतिम रूप से स्थापित कर दिया। 1853 में इंग्लैण्ड में 9409 पासपोर्ट दिए गए। सौ वर्षों बाद 1953 में इन पासपोर्टो की संख्या 4 लाख 20 हजार हो गई। 1921 में हुए ‘लीग आॅव नेशन्स‘ के सम्मेलन में पासपोर्ट को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप देने पर चर्चा हुई थी।
आधुनिक युग में आतंकवाद व अन्य सामरिक ताकतों के उभरने से सुरक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता ने पासपोर्ट को यात्रा के लिए अति आवश्यक बना दिया और विदेश यात्राओं के लिए इस दस्तावेज के पूर्व वीजा की औपचारिकता को स्थापित किया। पासपोर्ट देने के पूर्व प्रत्येक देश यह इतमीनान कर लेता है कि जिस देश में जाने के लिए पासपोर्ट स्वीकृत हुआ है, वहां की सरकार की अनुमति है या नहीं। पासपोर्ट निश्चित अवधि व निश्चित स्थान या स्थानों के लिए प्रदान किया जाता है और समय-समय पर पासपोर्ट का नवीनीकरण आवश्यक है। इतिहासकारों ने पासपोर्ट को यात्रा का दस्तावेज कहा है।
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