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पौष्टिक होता है पपीता |Papaya is nutritious

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पपीता” एक मधुर, पौष्टिक, स्वादिष्ट तथा औषधीय गुणों से भरपूर फल है, जो हमारे देश के सभी भागों में आसानी से उपलब्ध है। यूं वर्तमान में पपीता उत्पादन में भारत का स्थान विश्व में सर्वप्रथम है किन्तु यह देशी फल नहीं, यहां पपीता सोलहवीं शताब्दी में पुर्तगालियों के साथ आया।

पपीता सुपाच्य होने के साथ-साथ पोषक तत्वों से परिपूर्ण होता है। शिथिल पाचन-शक्ति वाले व्यक्ति तथा बिना दांतों वाले व्यक्ति द्वारा भी आसानी से खाये जा सकने के कारण ‘ईश्वरीय’ हलवा” भी कहा जाता है। इसकी रोगोपचार क्षमता निविवाद है। आयुर्वेद के अनुसार,कच्चे पपीते को मलरोधक, रूचिकर, रस-मधुर तथा स्वादपूर्ण बताया गया है।

रासायनिक संरचना :

जल : 89.6 प्रतिशत, वसा : 0. प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट : 9.4 प्रतिशत, खनिज : 0.4. प्रतिशत, प्रोटीन : 0.5 प्रतिशत, आयरन : 0.04 प्रतिशत, कैल्शियम : 0.04 प्रतिशत तथा फास्फोरस : 0. 0 प्रतिशत। इनके अतिरिक्त पपीते में टार्टरेक अम्ल, साइट्रिक अम्ल, मेलिक एसिड और विटामिन ए, बी, सी एव डी जैसे तत्व भी पाये जाते है। पाचन-तंत्र को सकिय करने वाला तत्व’पेरिसन” पपीते में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है।

रक्‍ताल्पता, उदर विकारों, मंदाग्नि, दुर्बलता, क्षय-रोग, कब्ज, अस्थमा, नेत्र विकार आदि रोगों में पपीते का सेवन एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में किया जा सकता है।

विभिन्‍न रोगों के उपचार में पपीते का उपयोग

उदर-रोग :

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  • कब्ज में पपीते का सेवन नियमित रूप में करना चाहिए। प्रत्येक भोजन के पश्चात्‌ पके हुए पपीते का उपयोग रामबाण औषधि है। बिना घी-तेल व मसालों से बनी कच्चे पपीते की सब्जी भी लाभकारी है।
  • दस्त होने पर कच्चे पपीते को उबाल कर खाना चाहिए।
  • अवरूद्ध मल को शरीर से बाहर निकालने के लिए पके हुए पपीते के गुदे को दूध में डाल कर पीएं।
  • पपीते के बारह बीज पीसकर आधा कप पानी में मिलाकर पीने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं|
  • पपीते के दूध को सूखाकर बनाये गये पाऊडर के सेवन से आंतों के रोगों में लाभ होता है।
  • कच्चे पपीते को ताजा दूध तथा शहद बराबर मात्रा में लेकर उबलते हुए पानी में डादें,
  • फिर ठंडा कर पीएं और दो घंटे पश्चात्‌ कैस्टर आयल का जुलाब लेने से भी उदर कृमि खत्म हो जाते हैं।
  •  गैस बनने की शिकायत होने पर कच्चा पपीता उबाल कर खाएं तथा रात्रि भोजन के बाद पके हुए पपीते का सेवन करें।

बवासीर :

करें
  • बवासीर के रोगियों को अपनी आहार-योजना में पपीते को स्थायी स्थान देना चाहिए। सुबह के समय ताजा दूध के साथ पपीते का जल-पान करें। दोपहर के भोजन के बाद पके हुए पपीते का सेवन करें तथा रात के खाने में कच्चे पपीते की सब्जी लें। यह नियमित रूप से निरन्तर करने से बवासीर में आशातीत लाभ होगा।
  • कच्चे पपीते का दूध बवासीर के मस्सों पर लगाने से राहत मिलती है।
  • बवासीर के रोगियों को पका पपीता सुबह खाली पेट खाना चाहिए।

त्वचा-रोग :

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  • पपीते का दूध खाज-खुजली, दाद आदि पर लगाने से शीघ्र लाभ मिलता है। इससे जलने अवश्य होती है किन्तु स्थाई राहत मिलती है।
  • कील-मुंहासों से छुटकारा पाने के लिए एक माह तक लगातार चेहरे पर पपीते के गूदे को भली प्रकार से मले।
  • चेहरे की आभा-वद्धि के लिए कच्चे पपीते को दो ग्राम मात्रा में प्रतिदिन सोने से पूर्व इस्तेमाल करने से एक सप्ताह में फोड़े-फुन्सियां दूर हो जाते हैं।
  • पपीते के सूखे दूध को पेपन कहा जाता है। शरीर पर होने वाले भूरे और लाल मस्सों को हटाने के लिए पेपन और सुहागे का पाउडर पानी में घोल कर मस्सों पर भली भांति लेप करना चाहिए।
  • पसीने के कारण रोम-छिद्र बंद हो जाने पर कच्चे पपीते के छिलकों को पीसकर शरीर पर अच्छी तरह मलना चाहिए।

सौंदर्य समस्याएं

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  • चिर-यौवन हेतु पपीते का नियमित सेवन करें। पपीता रक्त वाहिकाओं की कठोरता को समाप्त कर उन्हें कोमल व लचीला बनाता है, जो स्थायी यौवन हेतु आवश्यक है।
  • पपीते के गूदे में हल्दी मिलाकर पेस्ट बना लें, इस पेस्ट को चेहरे पर अच्छी तरह मल लेने से चेहरे पर अनोखी कांति व आभा उत्पन्न होती है।
  • पपीते का नियमित और निरंतर सेवन स्त्रियों की कमर को सुकोमल व लचकदार बनाता है तथा स्तनों के उभारों को सुडौलता प्रदान करता है।
  • कच्चे पपीते के ताजा दूध तथा चंदन की पेस्ट बनाकर लेप करने से चेहरे की झुर्रियां दूर होती है।

अन्य :

  • स्तनपान कराने वाली महिलाओं को पपीते का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए, इससे  दूध में वृद्धि होती है।
  • पपीते में पाया जाने वाला क्षारीय तत्व ‘कारपेन” रक्तचाप को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है।

  • विटामिन ए की अधिकता के कारण पपीता नेत्र-ज्योति बढ़ाने वाला, गुर्दे के रोगों में राहत देने वाला तथा मूत्राशय-संबंधी शिकायतों को दूर करने वाला माना जाता है।
  • पपीते में मौजूद विटामिन सी दंत-रोग, गठिया, पक्षाघात, आदि रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है।
  • रक्‍्ताल्पता के शिकार व्यक्तियों को प्रतिदिन डाल पर पके हुए पपीते सेवन करना चाहिए।
  • पपीता रक्त तथा शक्तिवर्द्धक होता है।
  • उल्टी, कै आदि की शिकायत होने पर पके हुए पपीते के छोटे-छोटे टुकड़े कुछ समय के अन्तर से निरन्तर खाते रहना चाहिए।
  • तेज बुखार की स्थिति में सूखे पत्तों का काढ़ा बनाकर पिलाने से ज्वर कम होता है।

सावधानियां / परहेज :

  • पपीते को जब खाना हो तो तभी काटना चाहिए। काटकर रख देने से पपीते के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।
  • गर्भवती स्त्रियों को पपीते का सेवन सावधानी पूर्वक करना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी पपीते के सेवन से गर्भपात की आशंका रहती है।
  • कच्चे पपीते का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए क्‍योंकि आयुर्वेद के अनुसार
  • कच्चा पपीता मलरोधक, कफ व वात अर्थात वायु को कृपित करने वाला होता है।
  • कृत्रिम रूप से पकाए पपीते कई बार लाभ के स्थान पर नुकसान पहुंचा सकते हैं।