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गुणी हैं संतरे

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इन दिनों सब्जी मंडी में संतरे की बहार आई हुई है। संतरा मूलतः मौसमी, माल्टा और नारंगी प्रजाति का फल है। इन सभी फलों में अधिकांश समानताएं पाई जाती है। नारंगी और संतरे में मूल अंतर आकार व स्वाद का है। संतरा नारंगी की अपेक्षा आकार में बड़ा और स्वाद में अधिक मीठा होता है। यद्यपि दोनों ही फलों में समान गुण होते हैं।
संतरे का वृक्ष ऊंचाई में 15 से 30 फुट तक होता है। इसकी आयु लगभग सौ वर्ष मानी जाती है। मगर यह फल 25 से 30 वर्ष तक ही देता है। औसतन एक वृक्ष सालभर में चार सौ से एक हजार तक फल दे देता है। ‘चरक-संहिता‘ में संतरे के गुणों पर व्यापक प्रकाश डाला गया है। आयुर्वेद के अनुसार, यह मधुर, रक्तवर्द्धक, पाचक, बलवर्द्धक, रक्तशोधक, ओर अग्निउद्दिपक फल है। आधुनिक चिकित्सा शास्त्री भी संतरे को सेहत की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी फल स्वीकारते हैं। संतरे की रासायनिक संरचना के अनुसार इसके रस में 10.9 प्रतिशत ठोस भाग रहता है जिसमें 7.6 प्रतिशत प्राकृतिक शर्करा, 1.7 प्रतिशत साईट्रिक एसिड, 0.52 प्रतिशत खनिज लवण आदि तत्व पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन ‘सी‘ भी प्रचुर मात्रा मे ंरहता है।
कैल्शियम, आयरन, प्रोटीन, आदि तत्व भी इसमें पाए जाते हैं। संतरे में उपलब्ध विटामिन सी शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करता है। इसका रस खून में मिलकर शरीर के विजातीय तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है। कैल्शियम और खनिज लवण दांतों व हड्डियों को मजबूती प्रदान करते हैं। संतरे की प्राकृतिक शर्करा एक अत्यंत पाचक तत्व है, जो खासतौर पर बच्चों व बीमारांे के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसके सेवन से शरीर को तत्काल पर्याप्त ऊर्जा प्राप्त होती है।
संतरा न केवल एक पौष्टिक फल है, अपितु अनेक रोगों के लिए भी यह एक रामबाण दवा है। मानसिक तनाव प्यास अधिक लगना, दंत-क्षय, अपच, पेचिश, पुरानी खांसी, तपेदिक, ज्वर, फ्लू, कृमि आदि रोगों के रोगियों को नियमित रूप से इसके रस का सेवन करना चाहिए। यह किडनी, दिल और त्वचा के लिए भी फायदेमंद है। संतरे की तासीर कुछ ठंडी मानी जाती है। इस कारण यह भ्रांति बनी हुई है कि संतरे के सेवन से सर्दी जुकाम व बलगम पैदा हो जाता है। किन्तु यह धारणा सर्वथा निर्मूल और अर्थहीन है। वस्तुतः संतरा विटामिन सी से भरपूर फल है और विटामिन सी ही इन रोगों में सबसे कारगर दवा है। चिकित्सक भी इन रोगों के लिए विटामिन सी की ही गोलियां देते है। हां, यह जरूर है कि संतरे का सेवन इन बीमारियों में तनिक सतर्कतापूर्वक किया जाना चाहिए।
गर्मियों में जी मिचलना, उल्टी होना आदि सामान्य बाते हैं। ऐसे समय में रोगी को संतरे के रस में शहद मिलाकर देना चाहिए। पायरिया, मसूढ़े की सूजन, स्कर्वी आदि रोगों में संतरे के रस का सेवन अत्यधिक लाभप्रद है। पेट-दर्द होने पर संतरे के रस में थोड़ी-सी भुनी हुई हींग मिलाकर देने से तत्काल राहत मिलती है। संतरे के छिलके बहु-उपयोगी व गुणकारी हैं। इसके छिलकों से ‘पैक्टिीन‘ नामक एक सुगंधित पदार्थ निकलता है जो चाॅकलेट व मिठाइयों को सुंगधित करने के लिए प्रयुक्त होता है। पैक्टिन से सुगंधित तेल भी तैयार किया जाता है। छिलकों को सुखाकर, उनका बारीक पाउडर बनाकर, कुछ बूंदें नीबू रस की मिलाकर त्वचा पर उबटन करने से उसमें निखार आ जाता है।
बच्चों को बुखार या खांसी होने की स्थिति में एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच छिलकों का पाउडर डालकर उसमें नमक या चीनी मिलाकर देने से ज्वर शांत हो जाता है व खांसी में भी राहत मिलती है। फोड़े-फुंसी होने की अवस्था में संतरे के छिलकों के पाउडर को शहद में मिलाकर मरहम की तरह लगा लें। ऊपर से पट्टी बांध दें। इससे फुंसियां ठीक हो जाएंगी। संतरे के फल से मुरब्बा, अचार, जैम, जैली आदि भी बनाए जाते हैं, जो खाने में बड़े स्वादिष्ट व पौष्टिक होते हैं।
इस प्रकार संतरा हमारे लिए एक बेहद उपयोगी फल है। इसका भरपूर उपयोग किया जाना चाहिए।