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OM PURI | ओम पुरी

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OM PURI | ओम पुरी
 नाम ओमपुरी 
 पूरा नाम ओम  प्रकाश कोहली
व्यवसाय   अभिनेता
 शिक्षा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय पुणे  
 जन्म 18 अक्टूबर 1950 ( अंबाला ) 
 निधन 6 जनवरी 2017 
 मृत्यु का कार्ण दिल का दौरा
 आँखों का कलर  भूरा
बालों का रंग  सफ़ेद  
शारीरिक संरचना कद   5 फुट 7 इंच, वजन 80 किलोग्राम
 पत्नी 1.सीमा कपूर (विवा.1991-1991)
2. नंदिता पुरी (विवा.1993- 2013
 पुत्र इशान पुरी 
पिता  टेकचंद पुरी  
 माता तारा देवी  
 भाई  वेद पुरी
 बहिन  वेदवती
टी.वी.शो  भारत एक खोज  किरदार
  WHITE TEETH
  ज्युयेल इन द क्राउन
  काक्का जी कहिन
 सक्रीय वर्ष  1972 – 2017
 पुरष्कार  पद्मश्री, राष्ट्रीय फिल्म पुरष्कार
 पहली फिल्म  घासीराम कोतवाल मराठी (1976 )
 पहली हिट फिल्म  आक्रोश (1980)
  
OM PURI | ओम पुरी

कला फिल्मों के सितारे व्यावसायिक फिल्मों में

अस्सी के दशक के आखरी और नब्बे के दशक के शुरूआती साल हिन्दी सिनेमा में इस बात के लिए याद रखे जाएंगे कि इस दौर में कला फिल्मों के अत्यधिक प्रभावशाली कलाकारों ने व्यावसायिक सिनेमा में अपने लिए महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया। कला-फिल्मों या सार्थक सिनेमा के जगमगाते सितारे मिथुन चकवर्ती, गिरीश कर्नाड, नसीरूद्दीन शाह और ओमपुरी इसी अवधि में व्यावसायिक सिनेमा में अपनी मौजूदगी का अहसास करवा पाने में कामयाब हुए। ऐसा नहीं है कि कला फिल्मों को हमेशा ही दर्शक नहीं मिलते हैं l दरअसल ओम पुरी, नसीरूद्दीन और शबाना आजमी ने अपनी अभिनय प्रतिभा के दम पर काफी पहले इस मिथक को खंडित करना प्रारंभ कर  दिया था कि कला फिल्में सिर्फ टी.वी. या फिल्‍म समारोह के लिए बनती हैं|

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OM PURI | ओम पुरी

‘आक्रोश’ से पहचान मिली ओम को

     ओम पुरी ने अपनी प्रारम्भिक फिल्‍म ‘आक्रोश’ के जरिये  ही यह साबित कर दिया था कि वह केवल प्रबुद्ध वर्ग के दर्शकों के  ही कलाकार नहीं है  । ` आक्रोश’ ने व्यावसायिक स्तर पर भी संतोषजनक सफलता प्राप्त की थी। ओम दरअसल अपनी तरह के अनूठे अभिनेता थे । एक प्रख्यात फिल्‍म समीक्षक ओम पुरी के सहज अभिनय के बारे में अपनी राय प्रकट करते हुए कहते हैं- “ ओम पुरी के अभिनय में देखा जा सकता है कि वे फिल्मों में चरित्र को अभिनीत नहीं करते बल्कि उसे देखने वालों के लिए एनलाइज करते थे । अपने ‘इमोशन के विचार दर्शकों तक पहुंचाकर ओम एक नया रिश्ता कायम करते हैं। वह अपनी भूमिकाओं के लिए ‘इमोशन मेमोरी” सामूहिक जीवन में ढूंढते थे । यही उनकी अभिनय क्षमता थी कि हर बार वे अपने ही द्वारा स्थापित अभिनय सीमाओं को तोड़ते हुए आगे बढ़ जाते थे ।

     दरअसल असली और नकली दोनों तरह की फिल्मों में ओम धुंआधार कामयाबी इस तथ्य की पैरवी करता है कि खूबसूरत, चिकना चाकलेटी चेहरा ही फिल्मों में सफलता की गारंटी नहीं है। अति साधारण  बल्कि औसत से भी कहीं अधिक खुरदरे चेहरे-मोहरे के बावजूद ओम पुरी ने बहुरंगी, विविध आयामों वाले चरित्रों को जिस दक्षता से अभिनीत किया है,  वह अपने आप में न केवल आश्चर्यजनक बल्कि बहुत हद तक रोमांचकारी भी है।

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OM PURI | ओम पुरी

राष्ट्रीय नाट्य विधालय के छात्र रहे ओम

पंजाब के पटियाला जिले के सन्‍नौर गांव में जन्मे ओम ने पटियाला के खालसा कॉलेज से स्नातक परीक्षा पास की। बचपन में ही मां, भाई और बहिन की असामयिक मौतों ने ओम की संवेदनशीलता को बुरी तरह झकझोर डाला। मन में सेना में भर्ती होने का सपना पालने वाला यह नौजवान अपने छोटे-छोटे ख्वाबों और अरमानों के साथ कालेज में पढ़ता हुआ कभी- कभार पंजाबी नाटकों में हिस्सा लिया करता था। धीरे-धीरे जब मन में एक संकल्प आकार लेने लगा तो ओम ने अभिनय को बतौर कैरियर अपनाने का फैसला किया और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एन.एम.डी.) में दाखिला लिया।

अभिनय जीवन की शुरूआत थिएटर से करने वाले ओम फिल्‍म और दूरदर्शन संस्थान पुणे से भी सम्बद्ध रहे। ओम पहली बार संस्थान द्वारा निर्मित फिल्म “चोर चोर पकड़ो पकड़ो’  के माध्यम से रूपहले पर्दे पर आये। वैसे ओम पुरी का फिल्म जगत में विधिवत प्रवेश 1979 में गिरीश कर्नाड द्वारा निर्देशित कला फिल्म गौ-धूलि’ से हुआ। जहां तक पहचान और ख्याति का सवाल है, वह उन्हें गोविंद निहलानी की बहुचर्चित फिल्‍म ‘आक्रोश’  (1980) से मिली।

इस फिल्म में ओम ने एक आदिवासी युवक के ऐसे चरित्र को जीवन्त किया, जो या तो चुप रहता है या चीखता है। अपनी “चुप्पी’ और ‘चीख’ के जरिये ओम ने इस फिल्‍म में अभिनय की ताकत को बहुत ही शिद्दत के साथ स्थापित कर दिया। आश्चर्यजनक बात जो पहली बार हो रही थी, वह यह थी कि अन्य कला फिल्मों की तरह ‘आक्रोश’ ने टिकट खिड़की पर दम नहीं तोड़ा बल्कि यह व्यावसायिक स्तर पर भी संतोषजनक रही।

     `आक्रोश’ के बाद 1984 में ओम की दो फिल्में `शोध` तथा ‘सदगति’ आई। ‘सदगति’ अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निर्देशक सत्यजित राय की फिल्म थी, जो कला जगत में आज भी ओम के दमदार अभिनय के दस्तावेज के तौर पर जानी जाती है।

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OM PURI | ओम पुरी

‘अर्द्धसत्य’ ओम के केरियर की जर्बदस्त फिल्म abhi

       प्रख्यात निर्देशक गोविंद निहलानी की फिल्‍म “अर्द्धसत्य’ (1983) सचमुच ओम पुरी के कैरियर में एक जर्बदस्त मोड़ साबित हुई। सार्थक सिनेमा के इस महत्वपूर्ण दस्तावेज ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी कामयाबी के झंडे गाड़ दिए। यह देखकर कामर्शियल सिनेमा के अमलबरदारों के कान खड़े हो गए। यही वह समय था, जब व्यावसायिक सिनेमा के सूत्रधार ओम पुरी के भीतर संभावनाएं तलाशने लगे। इस फिल्म में ओम एक ईमानदार पुलिस इंस्पेक्टर व लेणकर की भूमिका में नजर आए। यह सममुच एक इत्तफाक था कि ठीक एक दशक पूर्व 1973 में अभिताभ बच्चन प्रकाश मेहरा की “जंजीर’ में एक इंस्पेक्टर की भूमिका में आए और देखते ही देखते पूरा देश एंग्री यंग मेन’ के जादू भरे तिलिस्म में खोता चला गया। लेकिन ‘जंजीर’ के पुलिस इंस्पेक्टर और अर्द्धसत्य के पुलिस इंस्पेक्टर में बहुत बड़ा फर्क था।

एक तरफ “ग्लेमराइज्ड गुस्सैल आदमी’ था तो दूसरी तरफ समकालीन सामाजिक व्यवस्था से जूझता हुआ अकेला असहाय आदमी। अमिताभ व ओम का फर्क सपने और हकीकत का फर्क था। बहरहाल “अर्द्धसत्य` की कामयाबी से ओम के अभिनय संसार के  न केवल नए क्षितिज खुले बल्कि वह कला फिल्मों के सितारों में परहेज रखने वाले कथित व्यावसायिक सिनेमा के लिए ग्राहय हो गए।

अभिनय के इन्द्रधनुषीय रंग

     यह हमारी फिल्‍मी दुनिया की परम्परा रही है कि जो कलाकार जिस भूमिका में सफलता प्राप्त कर ले, उसके सामने उसी प्रकार की भूमिका का अम्बार लगा दिया जाता है। अर्द्धसत्य’ में पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका सफलतापूर्वक निभाने की सजा के तौर पर ओम को “घायल’ और ““कर्मयोद्धा’ में भी पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिकाएं निभानी पड़ी, किन्तु यहां भी उन्होनें  अपनी अदाकारी के दम पर ही एक तरह के चरित्र को तीनों फिल्मों में अलग-अलग अंदाज में निभा कर अपनी इन्द्रधनुषी शख्सियत का परिचय दिया।

      किसी भी अभिनेता  की प्रतिभा की उत्क्रष्टता  का  पैमाना  उसकी  व्यापक अभिनय रेंज ही होती है l ओम हर बार इस मापदंड पर खरा उतरे l `मंडी ` का फोटोग्राफर, `मिर्च मसाला ` का बूढा चोकीदार, `तमस` का नत्थू , `सूरमन` का जुलाहा, `सिटी ऑफ़ जॉय`  का रिक्शा चालक , `नरसिम्हा` का माफिया डान,  `मरते दम तक ` का विलेन,  `माचिस`  का आंतकवादी,  `प्रेमग्रन्थ का शोषित व्यक्ति, `चाची 420′  का कामेडियन अथवा ‘गुप्त’ का नशेबाज पुलिस इंस्पेक्टर ओम  हमेशा हर अंदाज में अपने अभिनय के बहुरंगी छटा बिखेरते नजर आए |

      सिनेमा में अपनी प्रतिभा की गहरी छाप छोड़ने वाले ओम पुरी उतनी ही सहजता के साथ छोटे परदे पर भी नजर आए । कोई कैसे भूल सकता है,  गोविंद निहलानी कृत धारावाहिक “’तमस’” में नत्थू के दर्द को, श्याम बेनेगल के धारावाहिक “यात्रा”  के सूत्रधार के रूप में ओम पुरी की अनूठी भूमिका को? ‘भारत एक खोज’ तो सचमुच एक ऐतिहासिक धरोहर बन चुका है। “कक्काजी कहिन’  में जिस तरह ओम ने छुटमैये भ्रष्ट नेता के चरित्र को जीवन्त किया ,  वह अपने आप में अदभुत था। गुलजार कृत धारावाहिक ‘किरदार’  भी ओम पुरी की बहुमुखी प्रतिभा का एक जीवन्त सबूत था। छोटे परदे पर ओम ने ‘अंतराल’,  `आहट’ और ‘सी हॉक्स’ जैसे  धारावाहिकों में भी अपने सहज अभिनय की छाप छोड़ी ।

हालीवुड की फिल्मों में भी नाम कमाया ओम ने

     हिन्दुस्तानी सिनेमा में ऐसे कलाकार अंगुलियों पर गिन लिए जाने से अधिक नहीं हैं, जिन्होंने  हालीवुड की फिल्मों में काम कर ख्याति पाई हो। ओम पुरी ने ‘सिटी आफ ज्वाय’ में काम कर यह सम्मान अर्जित किया है। इस फिल्म में रिक्शा चालक की भूमिका सफलतापूर्वक निभाई|  इसके अतिरिक्त,  ‘वुल्फ’, ‘जेम एण्ड नी’, ‘बर्निंग सीजन’, ईस्ट इज ईस्ट’, ‘घोस्ट इन द डार्कनैस’, ‘जू कीपर’, ‘माय सन – द फैनटिक’, सैम एण्ड मी’, ‘हैप्पीनाओ’, ‘पैरा आफिसर’ आदि ऐसी फिल्में हैं, जिनमें ओम पुरी के अभिनय को अंतराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता व प्रशंसा मिली ।

नैसर्गिक अभिनय , दमदार आवाज , भावप्रवण-भंगिमा= ओम पुरी

      ओम पुरी ने जहां एक ओर ‘स्पर्श, ‘तंरग’, `आस्था,` ‘न्‍यू दिल्‍ली टाईम्स’, रात’, ‘द्रोहकाल’, ‘नासूर’, ‘पार’,`  धारावी’ जैसी कला फिल्मों में अभिनय किया है, तो दूसरी तरफ वह व्यावसायिक ‘पुकार’, “चायनागेट’, “लक्ष्य, “आन’, ‘चोर मचाए शोर” जैसी अनेकों फिल्मों में भी बहुरंगी भूमिकाओं में आते रहे । ओम पुरी व्यक्तिगत जीवन में एक बिल्कुल सहज व सरल स्वभाव के व्यक्ति थे । मणिरत्नम, गोविंद निहलानी, श्याम बेनेगल, कुंदन शाह, और शेखर कपूर उनके मनपसंद निर्देशक रहे । ओम विचारधारा से मार्क्सवादी थे । नैसर्गिक अभिनय, दमदार आवाज, भाव प्रणव  भंगिमाएं उनके व्यक्तित्व के आधार थे । ओम का मानते  थे  कि सार्थक फिल्मों में अभिनय करके उन्हें आत्म संतोष मिलता है, लेकिन आर्थिक विवशताओं के चलते व्यावसायिक सिनेमा से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता l

Om Puri biography in Hindi | ओम पुरी जी का जीवन परिचय

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