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Oil massage is essential for good health | अच्छी सेहत के लिए जरुरी है तेल मालिश

(Oil massage)अच्छी सेहत के लिए जरुरी है तेल मालिश

आज महानगरों और शहरों में खुले “मसाज पार्लर” भले हीं हमे आधुनिकता का आभास दें किन्तु वास्तविकता यह है कि “मालिश’ हमारी अति प्राचीन सांस्कृतिक परम्परा की विरासत है। तेल मालिश की परम्परा का उल्लेख हमारे अति प्राचीन धार्मिक तथा आयुर्वेदिक ग्रन्थों मे मिलता है। “वाल्मिकी रामायण” के अयोध्या कांड मे वर्णन आता है कि भरत जब ऋषि भारद्वाज के आश्रम में पहुंचे तो प्रत्येक सैनिक की मालिश करने तथा स्नान कराने हेतु सात सुकुमार महिलाएं आई।

इसी प्रकार ‘महाभारत’ के द्रोणपर्व में बताया गया है कि धर्मराज युधिष्ठिर के स्‍नानागार मे 408 सेवक सुगन्धित पदार्थों से युधिष्ठिर के शरीर पर मालिश करते थे।

ईसा पूर्व तीसरी सदी में मौर्यकाल के दौरान भारत आए यूनानी यात्री मेगरथनीज ने अपने यात्रा वृतांत में लिखा है कि भारत में तेल-मालिश की परम्परा आम थीं तथा प्रतिदिन कई सेवक सम्राट के शरीर पर मूल्यवान तेलों से मालिश करते थे।

समकालीन इतिहास में रोम तथा यूनान की सभ्यताओं में भी तेल मालिश की प्रथा के प्रचलन के प्रमाण मिलते हैं। प्राचीन यूरोपीय राष्ट्रों में राज परिवार की च्त्रियां मालिश मे बहुत दिलचस्पी लिया करती थीं। फ्रांस की एक राजकुमारी प्रति देन नियमित रूप से तीन घण्टे तक अपने सुकोमल शरीर पर विभिन्‍न तैलीय पदार्थों से मालिश करवाने के बाद स्नान करती थीं।

मालिश को अंग्रेजी में ‘मसाज’ या ‘शैम्पू’ कहा जाता है। ‘मसाज’ शब्द की उत्पत्ति जर्मन शब्द ‘मास’ से हुई है, जिसका अर्थ होता है – मांडना या दबाना। “मल्ल पुराण’ में मालिश के लाभों पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए इसे बारह गुणों से सम्पन्न बताया गया है। मालिश से कफ, मेद, वात, तन्द्रा, खाज, मल,पसीना आदि नष्ट होकर शरीर सुदृढ़ बनता है।

संतुलित आहार कीं भांति शरीर को सेहत मंद और मजबूत बनाने के लिए नियमित मालिश भी आवश्यक है। मालिश की शुरूआत मनुष्य के जन्म के साथ ही प्रारम्भ हो जाती है, नवजात शिशु तथा सद्यःप्रसूता स्‍त्री की विशेष मालिश सफल प्रसव की आवश्यक शर्त है। इस मालिश से प्रसूता तथा नवजात शिशु की शारीरिक शिथिलता समाप्त होती है, तथा बच्चे की त्वचा मजबूत होती है।

नियमित रूप से मालिश करने के बहुत से लाभ  हैं। इससे शरीर लचीला, चमकदार पुष्ट बनता है। शारीरिक अंगों में छाई तन्द्रा और आलस्य नष्ट होकर मन में स्फूर्ति व शक्ति का संचार होता है। मालिश से त्वचा स्निग्ध, चमकदार और कांतिमय बनती है।

मालिश से रक्‍त संचार की गति तीव्र हो जाती है। परिणाम स्वरूप शरीर में जमा विजातीय पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। इसके अतिरिक्त ,  मालिश के कारण शिथिल पडा पाचन संस्थान सक्रिय हो उठता है और पाचन क्रिया सुचारू रूप से चलने लगती है। सिर में मालिश करने से मस्तिष्क को तरावट मिलती है तथा आंखों की रोशनी लम्बे समय तक कम नहीं पडती। यह मालिश सिर के बालों की जड़ों को भी मजबूत करती है। सिर की मालिश से अनिद्रा रोग में भी लाभ होता है तथा स्थायी सिर दर्द की शिकायत समाप्त हो जाती हैं। नियमित मालिश से शरीर की व्यर्थ चर्बी नष्ट होकर मोटापा कम होता है।

मालिश के लिए विभिन्‍न तेल इस्तेमाल किए जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार मालिश के लिए काले तिल का तेल सर्वोत्तम माना गया है। वैसे सामान्यतः पीली सरसो का शुद्ध तेल मालिश में काम मे लाया जाता है। इसके अतिरिक्त मौसम के अनुसार नारियल या जैतून के तेल से भी मालिश की जा सकती है। दिमागी कमजोरी, सिर दर्द, चक्कर आना जैसे रोगों में सिर में बादाम के तेल की मालिश से बहुत फायदा होता है।

जहां तक मालिश करने के समय का प्रश्न है, सुबह का समय इसके लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। शौचादि से निवृत होकर प्रातःकाल स्नान से पूर्व मालिश करनी चाहिए। वैसे तो नियमित रूप से प्रतिदिन मालिश करनी चाहिए किन्तु यदि किसी कारणवश यह संभव न हो सके तो सप्ताह में कम से कम एक बार तो मालिश करनी ही चाहिए।

मालिश के  समय खड़े रहना या इधर उधर चलते रहना उचित नहीं है। एक स्थान पर दरी पर बैठकर मालिश करनी चाहिए। हवादार व खुले स्थान पर बैठकर मालिश करना ठीक रहता है, किन्तु सर्दी के दिनो में बंद कमरे में भी मालिश की जा सकतीं है।

मालिश करने के तत्काल बाद स्नान नहीं करना चाहिए। मालिश व स्नान के बीच कम से कम आधे घण्टे का अंतराल होना चाहिए। सर्दियों में मालिश के बाद कुछ समय धूप में बैठना अच्छा रहता है। स्नान के समय उबटन या साबुन से शरीर पर लगे तेल को साफ कर लेना चाहिए।

पूर्णतया स्वस्थ व्यक्ति को ही मालिश करनी चाहिए। श्वास-दमा, उदर विकार, ज्वर, सूजन, कफ तथा दस्त के रोगियों के लिए मालिश करना वर्जित है। इन रोगियों के लिए मालिश करना घातक हो सकता है। मालिश करते समय नियमों का पालन करना अनिवार्य है, अन्यथा यह लाभ की जगह हानि भी पहुंच सकती है।

आधुनिक सभ्यता के इस दौर में हम मालिश जैसे नैसर्गिक स्वास्थ्य प्रसाधन को भूलते जा रहे हैं और कृत्रिम साधनों की ओर बढ़ते जा रहे हैं। कांतिमय यौवन तथा शारीरिक सुडौलता प्राप्त करने के लिए मालिश से बढकर कोई चीज नहीं है। नियमित रूप से तेल मालिश को आप आदत के रूप में अपनाइए। कुछ ही समय में आप खुद महसूस कर लेंगे कि वास्तव मे यह स्वस्थ रहने की रामबाण औषधि है।