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National flag | राष्ट्रीय ध्वज 1

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https://www.pexels.com/photo/city-building-architecture-travel-6776755/ National flag

क्या सूर्यास्त से पूर्व ध्वज उतराना आवश्यक है ?

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राष्ट्रीय अवसरों पर सूर्योदय के बाद किसी भी समय राष्ट्रीय झंडा फहराया जा सकता हैं लेकिन सूर्यास्त से पूर्व उसे उतारना आवश्यक है ।

झंडे का दंड कैसा रहना चाहिए ?

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झंडे का दंड सीधा रहना और केसरिया पट्टी का ऊपरी सिरे पर होना जरूरी है।

किसी अन्य झंडे को कहां लगाना चाहिए ?

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राष्ट्रिय ध्वज के पास किसी अन्य झंडे को उसके दाहिने ओर लगाना चाहिए तथा उसकी ऊंचाई राष्ट्रीय ध्वज से कम होनी चाहिए।

कैसा राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाना चाहिए ?

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गंदा या फटा हुआ राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाना चाहिए

कब राष्ट्रीय ध्वज झुका होना चाहिए ?

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राष्ट्रीय शोक के अलावा अन्य किसी भी अवसर पर राष्ट्रीय झंडा झुका हुआ नहीं होना चाहिए।

राष्ट्रीय झंडा कब फहराया जा सकता है ?

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राष्ट्रीय अवसरों पर सूर्योदय के बाद किसी भी समय राष्ट्रीय झंडा फहराया जा सकता हैं लेकिन सूर्यास्त से पूर्व उसे उताsरना आवश्यक है ।
झंडे का दंड सीधा रहना और केसरिया पट्टी का ऊपरी सिरे पर होना जरूरी है।

झंडे का दंड कैसा रहना चाहिए ?

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राष्ट्रीय ध्वज के पास किसी अन्य झंडे को उसके दाहिने ओर लगाना चाहिए तथा उसकी ऊंचाई राष्ट्रीय ध्वज से कम होनी चाहिए।

कैसा राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाना चाहिए ?

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गंदा या फटा हुआ राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय ध्वज देश की अस्मिता का प्रतीक

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किसी भी देश का राष्ट्रीय ध्वज महज एक कपड़े का टुकड़ा नहीं होता, वरन वह उस मुल्क के नागरिकों, देश की संस्कृति और सांस्कृतिक परम्पराओं और समूची वतनपरस्ती व अस्मिता का केन्द्र बिन्दु हुआ करता है। दुनिया का इतिहास गवाह है कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान की रक्षा के लिए कई देशभक्तों ने अपने प्राणों की हंसते-हंसते आहुति दे दी है। आज भी कोई वतनपरस्त आदमी अपने देश के झंडे का अपमान बरदाश्त नहीं कर सकता।

राष्ट्रीय झंडा राष्ट्र की स्वतंत्रता और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक माना जाता है। हर ध्वज के प्रतीकात्मक अर्थो की पृष्ठभूमि में परंम्पराओं का एक लंबा इतिहास छिपा होता है। हमारा वर्तमान तिरंगा राष्ट्रीय अभिव्यक्ति है। यह झंडा स्वाधीनता संग्राम के उन अमर शहीदों की अनमोल यादगार है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष करते हुए अपना सम्पूर्ण जीवन होम कर दिया।

राष्ट्रीय झंडे के विकास का इतिहास

हमारे राष्ट्रीय झंडे के विकास का इतिहास स्वतंत्रता-संग्राम की कुर्बानियों का इतिहास है। ज्ञात इतिहास के अनुसार, प्रथम राष्ट्रीय ध्वज पारसी बागान स्क्वेयर (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में फहराया गया। इस राष्ट्रीय झंडे में क्रमशः केसरिया, पीले तथा हरे रंग की तीन पट्टियां थीं। केसरिया पट्टी में भारत के तात्कालीन आठ राज्यों के प्रतीक के रूप में आठ कमल बने हुए थे। बीच की पीली पट्टी में देवनागरी लिपि में एक तरफ ‘वंदेमातरम‘ लिखा हुआ था और नीचे वाली हरी पट्टी में एक ओर सूर्य और दूसरी ओर चंद्रमा को चित्रित किया गया था।

इसके पश्चात् सन् 1907 में मादाम कामा और उनके प्रवासी क्रांतिकारियों के सहयोग से जर्मनी की राजधानी बर्लिन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। 18 अगस्त, 1907 में हुई इस ध्वजारोहण-सभा में श्रीमती कामा ने आजादी के संग्राम का प्रथम ध्वज घोषित करते हुए लोगों से इसके अभिवादन की अपील की।

इसके पश्चात् सन् 1917 में लोकमान्य तिलक तथा कांग्रेस की संस्थापक एनी बेसेंट ने होम-रूल के तहत एक और ध्वज बनाया, इसमें पांच लाल व चार हरे रंग की पट्टियां थीं। इसके मध्य में सात सितारे बने हुए थे। दाहिनी ओर अर्द्धचन्द्र के साथ एक सितारा था और बाएं कोने में इंग्लैण्ड का राष्ट्रीय ध्वज ‘यूनियन जैक‘ बना हुआ था।

राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम के नेताओं ने ‘यूनियन जैक‘ बने होने के कारण इस झंडे को मान्यता नहीं दी तथा कांग्रेस के विजयवाड़ा सम्मेलन में इसे पूर्ण रूप से अस्वीकार कर दिया गया। सन् 1921 में लाला हंसराज ने लाल व हरे रंग की पट्टियों वाला ध्वज बनाया। इसमें लाल रंग की पट्टी हिंदुओं तथा हरी पट्टी मुसलमानों का प्रतीक थी। बाद में महात्मा गांधी ने सुझाव दिया कि देश में अन्य जातियों के लोग भी रहते हैं अतएव शेष जातियों के प्रतिनिधित्व के रूप में झंडे में सबसे ऊपर सफेद रंग की पट्टी और जोड़ी गई।

पहले ध्वज पर चरखे का चिन्ह अंकित था

इसके बीच में सादगी के प्रतीक के रूप में चर्खे का चिन्ह अंकित किया गया। इस झंडे केा पहली बार राष्ट्रीय ध्वज के रूप में मान्यता मिली। सन् 1921 में काँग्रेस के अहमदाबाद अधिवेशन में इस झंडे को फहराया गया।
सन् 1931 में कांग्रेस कार्य समिति ने कराची सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित कर राष्ट्रीय झंडे के निर्माण हेतु एक सात सदस्यीय समिति नियुक्त की गई।

इस समिति ने कई सुझाव दिए लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। सन् 1933 में वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज का मौलिक स्वरूप अस्तित्व में आया। इस झंडे में सबसे ऊपर शौर्य व त्याग के प्रतीक के रूप में केसरिया पट्टी, बीच में शांति, अहिंसा व प्रेम के प्रतीक के रूप में सफेद पट्टी और अंत में समृद्धि, सम्पन्नता तथा पारस्परिक विश्वास के प्रतीक के रूप में हरी पट्टी का समावेश किया गया। इस झंडे की सफेद पट्टी पर गहरे नीले रंग से चर्खे का चिन्ह अंकित किया गया।

कांग्रेस द्वारा मान्यता प्राप्त यह झंडा सन 1947 में आजादी से पूर्व तक राष्ट्रीय ध्वज बना रहा। सभी राष्ट्रीय अवसरों पर इसे फहराया जाता रहा। स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व संविधान-सभा द्वारा 23 जून, 1947 को राष्ट्रीय झंडे पर विचार करने हेतु ‘राष्ट्र-ध्वज समिति‘ गठित की गई। समिति की सिफारिश पर राष्ट्रीय ध्वज में चर्खे के स्थान पर अशोक-चक्र अंकित किया जाकर भारत के राष्ट्रीय झंडे के रूप में इसे स्वीकार कर लिया गया।

ध्वज पर अशोक चक्र अंकित क्यों किया गया ?

चर्खे के स्थान पर अशोक चक्र अंकित क्यों किया गया, इस सम्बन्ध में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा था- ‘‘ ध्वज पर चर्खा इस प्रकार अंकित रहता था कि एक सिरे पर पहिया व दूसरे सिरे पर तकुआ रहता था। यदि झंडे को दूसरी ओर से देखा जाए तो पहिये पलट जाती थी। इसी व्यावहारिक कठिनाई के कारण ध्वज पर चर्खे के स्थान पर ‘चक्र‘ का चिन्ह अंकित करने का निर्णय लिया गया।‘‘

हमारे राष्ट्रीय ध्वज की तीनों आड़ी पट्टियों की लम्बाई, चैड़ाई बराबर होती है। ध्वज की लम्बाई- का अनुपात 3: 2 का होना चाहिए। बीच की सफेद पट्टी में उसकी पूरी चैड़ाई में गहरे नीले रंग का अशोक चक्र अंकित किया जाता है। इस चक्र में चैबीस धारियां होती हैं।

राष्ट्रीय ध्वज के बारे जरूरी बातें

झंडे को फहराते समय उसे तेजी से ऊपर की ओर ले जाना चाहिए जबकि उतारते समय धीरे-धीरे उतारा जाना चाहिए।जुलूस आदि में चलने पर राष्ट्रीय ध्वज को दाहिने कंधे पर रखकर सबसे आगे चलना चाहिए।

राष्ट्रीय अवसरों पर ध्वजारोहण के समय सावधान की मुद्रा में खड़े होकर ध्वज का अभिवादन करना चाहिए।
राष्ट्रीय ध्वज हमारे आत्म गौरव का प्रतीक है, हर हालत में और हर कीमत पर राष्ट्रीय ध्वज का पूर्ण सम्मान करना हम सभी देशवासियों का अनिवार्य कर्तव्य है। हजारों देशभक्तों के बलिदान के बाद हम एक स्वतंत्र राष्ट्र के नागरिक के रूप में यह तिरंगा झंडा हासिल कर पाए हैं, इस झंडे के सम्मान का प्रश्न समूचे राष्ट्र के अस्तित्व व अस्मिता से जुड़ा हुआ है।

राष्ट्रीय ध्वज का सजावटी कपड़े की तरह इस्तेमाल करना न केवल राष्ट्र का असम्मान है बल्कि यह दंडनीय अपराध भी है।

राष्ट्रीय के बारे में सम्पूर्ण जानकारी

https://www.youtube.com/watch?v=YHB1eOW7tSo
राष्ट्रीय ध्वज National flag