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कंकाल : एक संग्रहालय ऐसा भी

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(Museum of skeleton in hindi)

रोम में बना एक पुराना चर्च आज की किसी भी डरावनी फिल्म से भी अधिक डरावना है। 17वीं सदी में बने इस चर्च में इटली की एक डरावनी फिल्म की शूटिंग की गयी थी। देश-विदेश में इस चर्च को देखने की शौकीन महिलाएं तो यहां ज्यों ही निगाहे अंदर डालती हैं, वे एकदम बेहोश हो जाती हैं। वहां बेहोश महिलाओं को एक हष्ट-पुष्ट दरबान तुरंत संभाल लेता है और उन्हें बाहर लाकर अमोनिया लवण सुंघाकर होश में लाकर घर वापस छोड़ देता है।
रोम देश के ‘बाया बेनेटो‘ शहर के पास स्थित अमेरीकि दूतावास से डीलक्स होटलों, सुंदर-सजी दुकानों तथा नाइट-क्लबों के पास से होती हुई एक सीधी सड़क एक ऐसी पुरानी-सी इमारत के पास ले जाती है, जो पहली बार देखने में एक चर्च नजर नहीं आता।
केपयूचिन मौक के नाम से प्रसिद्ध इस चर्च के अंदर आप ज्यों ही प्रवेश करते हैं तो आपको ठीक सामने दो डरावनी पेंटिंग लटकी हुई दिखती हैं। लेकिन इससे भी कहीं अधिक डरावना संग्रहालय तो थोड़ा नीचे है।
इस संग्रहालय में सन् 1528 से 1870 के बीच मरे 400 पादरियों के कंकालों को विभिन्न डिजाइनों में कलात्मक ढंग से सजाया गया है।
भूमि के अंदर बने इस चर्च को 6 बड़े मेहराबों द्वारा 6 भागों ( कमरों ) में बांटा हुआ है। जिनमें एक कमरे में मृतक पादरियों की खोपड़ियां इस तरह से रखी हुई हैं कि जैसे वे सब मौन और शांत हों। इस कमरे को देखकर अच्छे-अच्छे लोग डर जाते हैं।
इन कमरों की छतों पर विभिन्न आकृतियों में पादरियों के अस्थि पिंजरों की विभिन्न हड्डिया लटकी हुई हैं। एक तरफ पैरों की (टिबिया फिबुला) अस्थियां जलते-बुझते बल्बों के नीचे ऐसे लगा रखी है जैसे वे टेबल-लैंप का मुख्य स्टैंड हों।
इसके बाद क्राॅस आकृति में मनुष्य की खोपड़ियां, धड़, तथा कुशरूकाओं का लगा हुआ पाएंगे, जो किसी अच्छे फूलों से सजाए गये डिजाइनों की भांति लगता है।
इस चर्च में रखे कंकालों में उन लोगों के कंकाल भी हैं, जो कभी इटली की हस्ती माने जाते थे। जैसे पोप सिसटर – 5 का पड़पोता मोटिओ ओरसिनी, एक कम आयु की राजकुमारी का छोटा कंकाल, जेरूस्लम के कई देशभक्त तथा फ्रांस की पैदल सेेना के उन जवानों के कंकाल भी जो सन् 1870 में पोर्टपाया की लड़ाई में मारे गये थे।
इस चर्च के पादरी का नाम सटांटे है। वह कहता है, इन कंकालों को देखकर यहां आए लोगों को जीवन की सच्चाई का अहसास हो जाता है कि यही हमारे जीवन के नाटक का अंत है। वास्तव में इसे देखकर इन कंकालों के बीच बने पूजा हाल-स्थल में ही आदमी का मन ईश्वर की प्रार्थना करने को करता है।
इस चर्च का निर्माण किसने किया, अभी इसका कुछ पता नहीं चला है। इसमें कंकालों को कलात्मक ढंग से सजाने के बारे में वहां के 45 चर्चों के मुख्य पादरी पेडो इरेनिओ का यह कहना है कि हमारा ऐसा विश्वास है कि यह कलात्मक संग्रहालय फ्रांस के पादरियों द्वारा ही बनाया गया था।