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मृत सागरः रहस्यों के घेरे में

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अपने नैसर्गिक गुणों के अभाव में प्रकृति की किसी भी रचना का अस्तित्व मरे हुए से ज्यादा नहीं रह पाता। लिहाजा एक अच्छा खासा खूबसूरत समुद्र महज इसलिए ‘मृत सागर‘ कहलाया कि उसमें कोई डूब नहीं सकता। विश्व प्रसिद्ध ‘डेड सी‘ आजकल परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उसके चारों ओर जहां कभी सरचनात्मक रूप से अनूठे पत्थरों और ऊंचे-ऊंचे टीलों का बोलबाला था, वहां अब पांच सितारा होटलों और काॅफी केद्रों का जमघट नजर आने लगा है। यह वही समुद्र है जिसकी वैचित्रता को लेकर कितने ही मत-मतांतर पढ़ने को मिलते हैं। बाईबिल में विनष्ट हुए शहरों के इसमें डूबने की गाथाएं विस्तृत रूप से वर्णित हुई हैं। यहूदियों ने इसे ‘लवण का समुद्र‘ नाम दिया। आज प्रचलित इसके नाम को सर्वप्रथम जन्म देने वाले थे – कुछ ईसाई तीर्थ यात्री, जो इसे महान व पवित्र मानकर इसमें नहाने आए थे। लेकिन समुद्र के जल में मौजूद भारी लवण मात्रा सहन न कर पाने के कारण उनमें से बहुतो की मौत हो गई और बचे हुए तीर्थ यात्रियों ने इस समुद्र के इतिहास पटल पर ‘मृत्यु का समुद्र‘ का विशेषण चिपका दिया। मृत सागर में मौजूद नमका का परिमाण लगभग चार करोड़ टन है।
मृत सागर की अद्भुत विशेषताओं को समझने के लिए बहुत से खोजकर्ता इसे पूरी तरह से देखने की कोशिश में ताउम्र जुटे रहे लेकिन यह कार्य दुर्भाग्यवश पूरा नहीं हो पाया। 1806 में शुरू की गई ऐसी ही खोजपरक यात्रा जर्मन वैज्ञानिकों सीट्जन व कोस्टीजन पर विपदा बन कर आई और भयंकर प्लेग के कारण वे समुद्र में ही समा गए। इस पहले प्रयास के बाद अगले 50 वर्षो तक बिट्रेन और अमेरिकी जहाजियों ने कोशिश जारी रखी। परंतु इनमें अधिकतर उन स्थानीय नागरिकों द्वारा मार दिए गए, जो मृत सागर को अंध-भक्ति से देखते थे और उन्हें अपने पूजा-स्थल पर विदेशियों का घूमना गवारा नही था। अन्वेषणों की एक लंबी श्रृखला के बावजूद अभी तक विद्वान मृत सागर के जबरदस्त घनत्व के पीछे छिपे रहस्य की बखूबी व्याख्या नहीं कर पाए हैं। फिर भी ब्रितानी खोजकर्ता ‘स्टेनफील्ड‘ का यह विचार काफी हद तक सही समझा जाता है कि संभवतः सागर में नष्ट हुए शहरों और चट्टानों की बहुलता से सागर में घुलने के कारण इसकी लवण मात्रा बढ़ गई। ‘डेड सी‘ के बारे में एक आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इसके झरनों का पानी बहुत सी असाध्य व्याधियों का अचूक इलाज समझा जाता है। ग्रीस का एक राजा हेरोड तो इसकी बदौलत मरणासन्न अवस्था से बाहर निकल आया था। ‘अरस्तू‘ ‘स्ट्राबोन‘ और ‘टेसीटस‘ जैसे विद्वानों ने मृत सागर के इस गुण पर काफी कुछ लिखा है। एक भुगोलव जोसेफ्स के अनुसार इस समुद्र में ‘सोलेनम सोडेमियम‘ नामक सेव का एक ऐसा पेड़ भी है, जिसके फल हाथ लगाते ही राख और धुएं में तब्दील हो जाते हैं। इन अजीबो-गरीब विशेषताओं से सुशोभित इस समुद्र में आज भी डूबे हुए शहरों के भग्नावशेष दिखलाई पड़ते हैं। हकीकत में यहां कितने नगर धंसे हुए हैं, इस पर काफी मतभेद हैं। बाईबिल की पुस्तक ‘जेनेसिस‘ में पांच शहरों के खत्म होने की कथाएं लिखी गई हैं, जबकि ‘स्ट्राबोन‘ जैसे इतिहासकारों के अनुसार यह संख्या तेरह तक जाती है। इन विवादों से परे यह समुद्र अपना एक खास धार्मिक महत्व रखता है और वहां ईसाई धर्मावलम्बियों की भीड़ अक्सर दिखाई पड़ती है।
धरती पर सबसे निचला स्थल ( समुद्र तल से 800 मीटर गहरा ) भी डेड सी में मौजूद है। आजकल मृत सागर के बहुत बड़े हिस्से पर इसराईल का अधिकार है, जो उसने 1967 के युद्ध में प्राप्त किया था। इसराइली सरकार ने इस समुद्र को एक बेहतरीन पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर दिया है और यह महान ऐतिहासिक व विलक्षण समुद्र अब तकनीकी विकास के युग को अपने ऊपर फैलता महसूस कर रहा है।
आज आप मृत सागर के तट पर टेªफिक-रोशनियों और चमकती सड़कों का झिलमिलाता अक्स देख सकते हैं। जहां धार्मिक लोग अपनी श्रद्धा संजोए, रोगी अपना स्वास्थ्य-लाभ लेते और घुमक्कड़ पर्यटक इसके जल पर मजे से अपना शरीर पसारे सूर्य-स्नान करते हुए आपका स्वागत करने को तैयार होंगे।