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मोनालिसा की मुस्कान: विविध आयाम

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अपनी मोहक, मादक और रहस्यमयी मुस्कान से पिछली पांच शताब्दियों से दुनिया के करोड़ों लोगों को रोमांचित करने वाला चित्र ‘मोनालिसा‘ संभवतः ज्ञात इतिहास की सर्वाधिक चर्चित व लोकप्रिय कलाकृति है। विश्व विख्यात चित्रकार लियोनार्दो द विंची द्वारा चित्रित इस कृति के आर्थिक और कलात्मक मूल्य की तुलना अन्य कलाकृति से नहीं की जा सकती ।
मोनालिसा की लोकप्रियता का आलम यह है कि आज मोनालिसा की मुस्कान की खूबसूरती का मानक पैमाना बन चुकी है। गुजिश्ता पांच सौ बरसों में सौंदर्य-बोध के प्रतिमान सैंकड़ों-हजारों मर्तबा बदले हैं, मगर लगता है कि मोनालिसा की मुस्कान शाश्वत सौंदर्य का जीवंत प्रतीक बन चुकी है।
इस मोहक मुस्कान के तिलिस्म में कई रहस्य, कई कहानियां और कई किवदंतियां छुपी हैं। अपनी लोकप्रियता से कहीं अधिक रहस्यमय और विवादास्पद है – मोनालिसा की मुस्कान !
यह विश्व-विख्यात चित्र इसके सृजक लियोनार्दो द विंची ने कब, कहां, और किसे देखकर बनाया, इस संबंध में निरंतर शोध चलते रहे हैं। किंतु इसके ऐतिहासिक तथ्यों के संबंध में आज भी निश्चित और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार विंची ने अपने इस चित्र का निर्माण फ्लोरेंस में सन् 1503 ई0 से 1516 ई0 के मध्य किया था, जबकि विंची के एक शिष्य लार्ड क्लार्क ने इसे 1500 ई0 से 1520 ई0 के मध्य बनाया गया चित्र बताया है।
आखिर मोनालिसा थी कौन? यह सर्वाधिक विवादास्पद प्रश्न है, जो आज तक लगभग अनुŸारित है। विंची की मृत्यु के कोई तीस बरस बाद एक इतिहासज्ञ बाशारी ने लिखा कि दरअसल मोनालिसा एक रेशम के व्यापारी फ्रांसेस्को बेल गाईकंड की पत्नी है। गाईकंड के अनुरोध पर ही विंची ने मोनालिसा का चित्र बनाया था, जो चार वर्ष तक अपूर्ण पड़ा रहा। बाशारी का अनुमान है कि चित्र पूर्ण होने के बाद विंची को यह इतना पंसद आया कि उसने इसे मोनालिसा के पति को देने से इंकार कर दिया।
कुछ लोगों के अनुसार, मोनालिसा एक धनवान व्यक्ति मैदीचि की प्रेमिका अथवा रखैल थी। कुछ लोग उसे ड्यूक की विधवा मानते हैं। एक वर्ग ऐसा भी है, जिसकी मान्यता है कि मोनालिसा फ्रांस की विख्यात वैश्या थी।
यहां तक तो ठीक था। लेकिन कुछ अर्सा पहले अमेरिका की बैल लेबोरेटरी की एक कम्प्यूटर वैज्ञानिक लिलियन स्कवाट्ज ने एक सर्वथा हैरतअंगेज निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए मोनालिसा को स्वयं लियानार्दो द विंची का आत्मचित्र (सेल्फपोट्रेट) घोषित किया है। ‘आर्ट एंड एंटिक्स‘ पत्रिका में प्रकाशित अपने लेख में लिलियन ने रहस्योद्घाटन किया कि विंची के एक आत्म चित्र और उनकी कलाकृति मोनालिसा को पास-पास रखकर अध्ययन किया गया तो दोनों की आंखों की आकृति, गाल, व नाक की रेखाओं में अद्भुत साम्य पाया गया। लेख में आगे कहा गया है कि इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि विंची समलैंगिक रहे हों और उभयलिंगी विषयों को अपनी कलाकृतियों में समावेश करने में रूचि रखते हों। पत्रिका के संपादक एवं प्रकाशक बिक एलीसन के अनुसार, विश्व-कला के इतिहास में यह अनुसंधान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाएगा क्योंकि यह मात्र कल्पना नहीं, बल्कि ऐतिहासिक स्त्रोतों और कलाकृति के ज्ञात तथ्यों के गहन अध्ययन के बाद निकाला गया निष्कर्ष है।
वर्तमान में मोनालिसा का यह चित्र पेरिस के लोवरे म्युजिम में कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच बुलेटप्रुफ शीशे के भीतर रखा हुआ है। यहां हर वक्त छायाकारों का मेला लगा रहता है। मोनालिसा के यहां तक पहुंचने का सफर भी कम दिलचस्प नहीं है। कहा जाता है कि विंची के निधन के बाद उनके शिष्य मेत्जी ने मोनालिसा को चार हजार फ्लोरिन (स्वर्ण मुद्रा) में सम्राट को बेच दिया था। तकरीबन तीन शताब्दियों तक यह फ्रांसीसी राज-दरबार की सम्पति बनी रही। इस दौरान यह फाउंटेन ब्लू, वर्सेल्स, व ल्रुव आदि स्थानों पर ले जाई गई। मोनालिसा कुछ समय तक नेपालियन के शयन-कक्ष की शोभा भी बनी। फ्रांसीसी क्रांति के दौरान यह अमर कलाकृति सामंती संरक्षण से आजाद हुई। इसके बाद इसे पेरिस के लोवरे संग्रहालय की चित्र दीर्धा में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रखा गया।
21 अगस्त, 1911 की रात कला विशेषज्ञ येवेस चैड्रोन, माक्र्यूस तथा एक कारपेंटर विजेश जी पेरूगिया ने मिलकर संग्रहालय से ‘मोनालिसा‘ को चुरा लिया। इस चोरी से पूरे विश्व में सनसनी फैल गयी। दो वर्ष पश्चात् इटली में पेरूगिया ने इस चित्र को वापस लौटा दिया मोनालिसा को चुराने के अपराध में पेरूगिया पर चले मुकद्दमें के दौरान उसने अपनी सफाई में कहा कि उसकी मृत प्रेमिका का चेहरा मोनालिसा से बहुत मिलता था। इसलिए उसने यह चोरी की। अदालत ने उसकी रोमानी सफाई पर भरोसा करते हुए उसे केवल सात माह कारावास की सजा सुनाई।
मोनालिसा की मुस्कान ने दुनिया-भर में ख्याति अर्जित की। पेरूगिया द्वारा लौटाने के पश्चात वह फिर एक बार पेरिस के लोवरे संग्रहालय में लौट आई। तब से आज तक निरंतर वह वहां बनी हुई है। केवल एक बार 1963 में तात्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जान केनेडी के व्यक्तिगत अनुरोध पर केवल 27 दिन के वास्ते इसे वाशिंगटन भेजा गया था, जहां 67400 कला-प्रेमियों ने इस महान कलाकृति को नजदीक से देखा।
मोनालिसा की मुस्कान ने दुनिया-भर के कलाकारों, लेखकों, कवियों चिकित्सकों और समाज के हर वर्ग को आंदोलित व आकर्षित किया। सुप्रसिद्ध कहानीकार आल्डस हकस्ली ने अपनी कहानियों में मोनालिसा की मुस्कान को समाविष्ट किया। उपन्यासकार लारेंस डूरेंस ने अपनी कृति ‘जस्टिन‘ में मोनालिसा की मुस्कान के बारे में लिखा – ‘‘उसकी मुस्कान देखकर प्रतीत होता है, जैसे यह उसकी अपने पति के प्रति उपेक्षा की मुस्कान हो।‘‘ एम0 फ्रास्टर का मानना है कि उसकी मुस्कान मैकियावेली की मुस्कान जैसी है।
डाक्टरों ने तो जैसे मोनालिसा का पूरी तरह पोस्टमार्टम कर डाला हो। चैतरफा विवादों में घिरी बेचारी मोनालिसा को देखकर भला चिकित्सा-जगत क्यों खामोश रहता? आईये, मोनालिसा के स्वास्थ्य के बारे में डाक्टरों की राय भी जान लें।
डेनमार्क के कोपेन हेगन शहर के नेशनल हास्पिटल के डा0 फिन बैकर के अनुसार, मोनालिसा के चेहरे की अर्द्धमुस्कान उसके मुख के पक्षाघात का सबूत है। गर्भ-संबंधी मामलों के एक अन्य विशेषज्ञ डाक्टर साहब ने मोनालिसा को गर्भवती घोषित किया। उनका कहना था कि ऐसी मुस्कान, जो गोपनीय आनंद से परिपूर्ण हो, केवल गर्भवती स्त्री के चेहरे पर ही आ सकती है।
जापान के सुप्रसिद्ध हृदय-रोग विशेषज्ञ डाक्टर हासओ नामकुश ने मोनालिसा के चित्र का गहन अध्ययन करने के पश्चात अपने निष्कर्ष देते हुए मोनालिसा को दिल की गंभीर बीमारी का मरीज बताया। डा0 हासओ का तो यहां तक कहना था कि बाद में मोनालिसा की मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से ही हुई होगी। डा0 नामकुश के अनुसार, अधिक चिकनाई वाला पौष्टिक भोजन करने के कारण मोनालिसा के रक्त में कोलस्ट्रोल की मात्रा अत्यधिक बढ़ चुकी थी, इसी कारण उसके चेहरे की त्वचा पीली पड़ गई।
‘मोनालिसा‘ का कला, विज्ञापन पैरोडी आदि विभिन्न रूपों में अत्यधिक प्रयोग/दुरूपयोग हुआ। अमेरिका के ख्यात नग्नतावादी हाम वित्समेन ने ‘मिक्सड मीडिया कन्स्ट्रक्शन‘ के माध्यम से मोनालिसा को अर्द्धनग्न रूप में एक अत्यंत कामोŸोजक मुद्रा में चित्रित किया। यह चित्र अमेरिका में खासा लोकप्रिय हुआ। सऊदी अरब ने मोनालिसा पर डाक-टिकट निकाला। यूरोप की प्रसिद्ध बीयर कंपनी कर्नबर्ग ने मोनालिसा को अपनी बियर के विज्ञापन का माध्यम बनाया। सन् 1973 में डेविड गोवा नामक कलाकार ने मोनालिसा व गोल्डामायर के चित्रों को एक साथ सुपरइंपोज करके एक अनोखा फोटोमोंटाज तैयार किया। इस चित्र को उन्होंने ‘गोल्डालिसा‘ नाम दिया। 1973 में ही लुडमिल सिसकोव नामक कलाकार ने पोस्टर पर एक्रिलिक द्वारा मोनालिसा का ऐसा चित्र बनाया, जिसमें अत्यधिक मादकता के साथ गहरा यौन-आंमत्रण नजर आता है। इसे मोटालिसा नाम दिया गया। मोनालिसा की खूबसूरती को सर्वाधिक विकृत रूप में प्रस्तुत किया – रिक मियोरोविट्ज ने। उन्होंने एक पोस्टर में मोनालिसा की वेशभूषा में हाथ में केला लिये एक गोरिल्ला को चित्रित किया।
मोनालिसा को 1962-63 में जब कला-प्रदर्शनियों के वास्ते अमेरिका ले जाने की बात तय हुई, तो बीमे की दृष्टि से उसका मूल्य दस करोड़ डालर आंका गया। यह अब तक की कलाकृतियों में सर्वाधिक मूल्याकंन है।
77 सेमी लम्बी और 53 सेमी चैड़ी मोनालिसा की इस कलाकृति पर मनचाही क्रिया प्रतिक्रियाओं का सिलसिला पिछली सदी से जारी है। जैसे-जैसे मोनालिसा पर बहसों और विवादों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे मोनालिसा की मुस्कान और अधिक रहस्यमय और मायावी होती जा रही है। केवल एक चित्र द्वारा पूरे विश्व में तहलका मचा देने का यह अकेला उदाहरण है।