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भोजन प्रेमी सुल्तान महमूद बर्बरा – Mahmud barbara information in hindi

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Mahmud barbara information in hindi

भोजन हमारे शरीर के संचालन के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है।हमारा पेट विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का एक अनूठा संग्रहालय है।महमूद बर्बरा (Mahmud barbara) की जानकारी। हम आपको आज एक ऐसे भोजन-प्रेमी पेटू से मिलवा रहे हैं, जिसकी जिंदगी ही शायद खाने के लिए थी!

पेटू ही नहीं,युद्ध प्रेमी भी

गुजरात की अहमदाबाद रियासत के प्रथम आजाद सुल्तान अहमद शाह के पुत्र महमूद बर्बरा को इतिहास में एक क्रूर, युद्ध प्रिय और हद दर्जे के पेटू सुल्तान के तौर पर याद किया जाता है।

बचपन से ही खाने-पीने का शौकीन

शाही खानदान में महमूद बर्बरा की पैदाइश 1458 ईस्वी में हुई। बचपन से ही महमूद खाने-पीने का बेहद शौकीन था। बचपन में उसकी खुराक देखकर लोग दांतों तले उंगली दबा लेते और कहा करते कि यदि यह शाही खानदान में पैदा न हुआ होता तो शायद भूख से ही मर जाता।

बौने दानव की तरह

सन 1492 ईस्वी में महमूद बर्बरा अहमदाबाद का सुल्तान बना ।5 फीट से भी कम लंबाई का यह सुल्तान इतना बेडौल और भीमकाय था कि सामान्य आदमी पहली बार उसे देखकर ही भयभीत हो उठे । लंबी दाढ़ी और घनी मूंछें उसके उसके भयावह स्वरूप में और भी अधिक वृद्धि करती तथा उसे परी कथाओं के बौने दानव के समकक्ष खड़ा करते।

चालीस किलोग्राम भोजन सामग्री चट

अब जरा महमूद बर्बरा के भोजन के बारे में भी जान लीजिए। महमूद दिन भर में जो खाद्य सामग्री उदरस्थ करता, उसका वजन गुजराती तोल से एक मन के करीब बैठता था। तत्कालीन गुजराती माप तौल “मन “आज के करीब 40 किलो के बराबर होता था ।सुल्तान महमूद सुबह के नाश्ते में प्रतिदिन एक किलो मक्खन, एक किलो शहद और 150 केले खाता था।

नमाज अदा करने के बाद जब वह भोजन करता था तो उसके भोजन में करीब 10 किलो चावल , 8 किलो आटे की रोटियां , मांस से बने कई प्रकार के व्यंजन हर प्रकार की उपलब्ध सब्जियां, दही , दालें आदि सामग्री होती थी, जिससे करीब तीस पैंतीस व्यक्ति आसानी से अपनी भूख मिटा सकें ।लेकिन महमूद यह पूरी खाद्य सामग्री एक ही बैठक में अकेला ही चट कर जाता। दो सुराही पानी वह एक साथ पी जाता।

रात में भी पेट पूजा

यही महमूद के पेटूपन की आखिरी सीमा नहीं थी ।दिन हो या रात भूख उसे हमेशा सताती रहती। वह रात में सोते समय भी पांच किलो उबले हुए चावल तैयार करवा कर आधे आधे अपने पलंग के दोनों ओर रखवा लेता था ।सोने के थाल में रखे इन चावलों को वह नींद के दौरान भी साफ कर जाता ।महमूद एक साथ दस पान खाता था।

युद्ध में भी भोजन का पूरा प्रबंध

महमूद बर्बरा एक पेटू सुल्तान होने के अलावा ,युद्ध प्रिय, क्रूर और मानव रक्त पिपासु सुल्तान के रूप में भी जाना जाता है । वह पूरी जिंदगी युद्धों और जंगों में व्यस्त रहा। मेवाड़ ,मालवा, सिंध, खानदेश आदि कई इतिहास प्रसिद्ध युद्ध उसने लड़े।

रण क्षेत्र में भी उसके लिए भोजन का खास बंदोबस्त रहता था । बावर्चियों का एक दल विशेष रूप से उसके साथ चलता और हमेशा बड़े-बड़े देगचों में विभिन्न व्यंजन तैयार होते रहते थे। महमूद युद्ध क्षेत्र में भी बड़े चाव से भोजन करता।

इस युद्ध प्रेमी सुल्तान का 53 वर्ष की आयु में संन 1511 ईस्वी में देहांत हुआ ।वह मरने के इतने सालों बाद आज भी एक किवदंती के रूप में जीवित है।