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जानें भूत-प्रेतो के बारे में

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मनुष्य अब तक जिन प्राकृतिक और पारलौकिक रहस्यों की थाह नहीं पा सका है, उनमें भूत-प्रेतों का अस्तित्व भी एक है। वैज्ञानिक भूत-प्रेतों सम्बन्धी धारणाओं को खारिज करते हुए इसे केवल मस्तिष्क का भ्रम (इल्यूजन) और आंखो का विभ्रम (हैल्यूसिनेशन) बताते हंै, लेकिन भूत-प्रेत सम्बन्धी परिकल्पना इतनी प्राचीन और सर्वव्यापी है कि उसे इतनी सहजता से खारिज नहीं किया जा सकता है। इस परिकल्पना को न केवल धार्मिक आधार प्राप्त है बल्कि समय-समय पर घटने वाली हजारों घटनाएं इसकी सत्यता को रेखांकित करती हुई आधुनिक विज्ञान को चुनौती देती हैं।
‘प्रेतत्व‘ पर तर्कसंगत और वैज्ञानिक अनुसंधान करने वालो में बार्थर लाटार्ड, ग्रेस रोशर, एन्थाॅनी वोर्गिया, हैस्तोप, मिसेज जेन शेरवुड, सर ओलीवर लाॅज जैसे वैज्ञानिकों के नाम प्रमुख हैं। इनमें अधिकांश के निष्कर्षो के मुताबिक प्रत्येक प्राणी का अस्तित्व शरीर, मन तथा आत्मा से मिलकर बनता है तथा मृत्यु केवल शरीर को नष्ट करती है, आत्मा नष्ट नहीं होती। मृत्यु तो केवल आत्मा को शरीर से अलग करने की प्रक्रिया भर होती है। मृत्यु के बाद भी शरीर-विहीन आत्मा का अस्तित्व बरकरार रहता है। इस अवस्था में प्राणी स्वयं को मात्र इन्द्रिय-स्पर्श सुख से वंचित पाता है, बाकी सारी स्थितियां उसके लिए पूर्ववत रहती हैै। स्थूल शरीर के अभाव मेे वह संसार को देख तो सकता है लेकिन वायु-भूत होने के कारण किसी को दिखाई नहीं देता।
जो व्यक्ति या प्राणी जितनी ज्यादा दमित इच्छाएं, वासनाएं और कामनाएं लेकर मरता है, उसके ‘भूत‘ अथवा ‘प्रेत‘ योनि मे जाने की संभावनाएं उतनी ही ज्यादा होती है। अतृप्त इच्छाआंे का उद्वेग सूक्ष्म शरीरधारी मृत प्राणी को बैचेन करता है। चंूकि समस्त सांसारिक कृत्य और उपभोग शरीर द्वारा संभव है। अतः उस अतृप्त प्राणी की बेचैनी उसे कोई शरीर गढ़ने को प्रेरित करती है। अपने पास उपलब्ध सूक्ष्म साधनों से वह अपनी पूर्वजन्म से मिलती-जुलती कुछ आकृति गढ़ पाता है।वह अपनी सामथ्र्य के मुताबिक बहुत प्रयत्न करने के बाद अनगढ़ शरीर रच पाता है, वह भी इस प्रकार कि वह अत्यधिक अल्प समय के लिए हल्का सा दृश्य गढ़ पाता है। अतः उसे अधिकतर अपनी अदृश्य स्थिति से ही निर्वाह करना पड़ता है।
भूत अपनी दमित इच्छाओं और वासनाओ की पूर्ति हेतु किसी अन्य व्यक्ति को भी माध्यम बना सकते हैं। किसी के शरीर में प्रविष्ठ होकर भी वह उससे अपने निर्देशो का पालन करवाता है। इसके लिए आमतौर पर वह कमजोर मनोबल वाले व्यक्तियों को चुनते हैं।
‘प्रेतत्व‘ पर अन्वेषण करने वाले लोगो का मत है कि शरीर छोड़ने के बाद प्रेतात्माएं आमतौर पर अपने अहरण लोक में रहती हैं। मरणोŸार जीवन मृत्यु के बाद पुनः जन्म लेने के मध्य की अवधि जीवात्मा का विश्रांति-काल है। इस अवधि में वह थकान मिटाने तथा स्फूर्ति प्राप्त करने के लिए विश्राम करती है। इस अवधि में कई बार प्रेतात्माएं मनुष्यों से सम्पर्क साधती है और कई बार आश्चर्यजनक घटनाएं प्रस्तुत करती हैं। इस सम्बन्ध में डाक्टर मैस्मर का कहना है कि मरणोपरान्त मृतक की कोई अंतिम इच्छा रहती है तो उसकी आत्मा सूक्ष्म शरीर के माध्यम से उसे पूर्ण करने का प्रयास करती है। इसके लिए उनके सूक्ष्म शरीर को किसी ऐसे जीवित व्यक्ति से सम्पर्क स्थापित करना पड़ता है, जो उसकी आकांक्षा पूर्ण करने के लिए उपयुक्त हो।
प्रसिद्ध प्रेत-विज्ञानी विलियम कुक्स प्रेतात्माओ को दो भागों में विभाजित करते हैं। पहला प्रेत-वर्ग, जो अपनी बैचेनी के कारण नुकसान पहुंचाते हैं, द्वितीय पितर-वर्ग, यह सदभावना सम्पन्न होते है तथा सहयोग सहायता व मार्गदर्शन करने के लिए सम्पर्क साधते हैं।
सर लाॅज, विलियम बैरेट, प्रो0 जानर आदि प्रसिद्ध वैज्ञानिको के विश्वसनीय अन्वेषण के पश्चात वैज्ञानिक स्तर पर भूत-पे्रतो के अस्तित्व की परिकल्पना को ठोस आधार मिलना प्रारम्भ हो गया है। इंग्लैण्ड के सुप्रसिद्ध मनोविज्ञानी व दार्शनिक सी0 ई0 एम0 जोड ने बी.बी.सी. पर प्रसारित एक वार्ता में भाग लेते हुए कहा कि मैं भूतो पर विश्वास नहीं करता था। लेकिन एक रोज जब मेरे ऊपर प्रयोगशाला में बैठ-बैठे चारो तरफ साबुन की टिकिया बरसनी शुरू हो गई और खोज करने पर भी मुझे उसका कोई आधार नहीं नजर नही आया तो मेरे लिए भूतों के अस्तित्व पर विश्वास करने के अलावा कोई विकल्प नही था।
करीब पचास साल पहले इंग्लैण्ड के पोर्टस साऊथ में बन्दूक की गोली इस तरह लगती कि शीशे, छत या दरवाजे में एक इंच व्यास का छेद इतना साफ-सुथरा गोल व व्यवस्थित होता, जैसे किसी ने मशीन से किया हो। ऐसी घटनाएं निरंतर होती रहीं। पुलिस तथा स्काटलैंड यार्ड के वैज्ञानिक भी इन घटनाओ के रहस्य का पता नही लगा सके। निगरानी व सुरक्षा की सख्त व्यवस्था भी इन घटनाओं को रोक नहीं सकी। एक दिन अकस्मात ये घटनाएं अपने आप बंद हो गई।
इंग्लैण्ड की महारानी एलिजाबेथ के चचेरे भाई राजकुमार माइकिल ने पश्चिमी इंग्लैण्ड में स्थित एक विशाल महल फ्रेडरिक नेटल से खरीदा। यहां एक लुहार का भूत आता है। इस लुहार को कोई तीन सौ साल पहले भेड-चोरी के अपराध में 24 जनवरी को फांसी पर लटका दिया गया था। उसे यह सजा देने वाले जज इस भवन के मालिक थे। तब से लगातार हर साल 24 जनवरी के दिन उसका भूत इस महल में आता है। राजकुमार माइकेल ने भूत-मुक्ति के लिए रोमन और कैथालिक पादरियों से पूजा अर्चना करवाई, पवित्र जल का छिड़काव किया। लेकिन वह अभिशप्त महल प्रेत-मुक्त नहीं हो सका।
‘लाईट‘ पत्रिका के सम्पादक जार्ज लेथम का पुत्र विश्व-युद्ध में मारा गया। उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए। लेकिन जार्ज लेथम के अनुसार उनके लिए उनका पुत्र कभी नही मरा। उसकी आत्मा निरन्तर अपने पिता से सम्पर्क करती रहती तथा संदेशों का आदान प्रदान होता रहता। इस सम्बन्ध में जार्ज लेथम ने कुछ विश्वसनीय प्रमाण भी प्रस्तुत किए।
ये सारी घटनाएं भूत-प्रेतो के अस्तित्व की अवधारणा को पुष्ट करती हैं तथा इस विषय में और अधिक वैज्ञानिक अनुसंधान की मांग करती हैं। भूत-प्रेत को कपोल कल्पना कहकर झूठला देना तर्क-संगत प्रतीत नहीं होता।
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कैलाश जैन, एडवोकेट
34, बंदा रोड़
भवानीमण्डी (राज) 326502