pexels c technical 5875695 scaled

फलों का राजा – आम

pexels riki risnandar 4023132


‘आम‘ नाम से भले ही आम हो, मगर इसकी गिनती दुनिया के खास फलों में की जाती है। अपने तृप्तिदायक और स्वादिष्ट स्वरूप के कारण इसे ‘फलों का राजा‘ कहा जाता है। दुनिया की कुल पैदावार का तकरीबन 80 प्रतिशत आम हमारे देश में पैदा होता है।हमारे देश में वर्तमान में एक हजार से अधिक किस्मों के आमों की पैदावार होती है। भारत में 849710 हैक्टर भूमि पर सालाना 7585000 टन से अधिक आम की उपज होती है। भारत में हर साल आम विदेशों को निर्यात किया जाता है, जिससे हमें अच्छी मात्रा में विदेशी मुद्रा अर्जित होती है।
प्राचीन भारतीय संस्कृति में आम का बड़ा महत्व था। संस्कृत के आदि काव्य ‘वाल्मिीकिय रामायण‘ और ‘महाभारत‘ तक में आमों का जिक्र आया है। पुराणों के अनुसार, आम विष्णु का प्रिय फल था। बौद्धकालीन ग्रंथों में महात्मा बुद्ध को आमों के गुच्छे भेंट करने का वर्णन मिलता है। 16 वीं शताब्दी में पुर्तगालियों के भारत आने से आम का परिचय पश्चिमी जगत से हुआ। गोवा से आम ले जाकर पुर्तगालियों ने दक्षिण अफ्रीका में लगाया। मिस्त्र ने भी 1825 में भारत से आम की पौध मंगाई थी। मुगल बादशाह अकबर भी आम का खास शौकीन था। इस तरह आम आदि-काल से हमारी जीवन-शैली और संस्कृति का एक अभिन्न अंग रहा है।
हमारे देश में आमतौर पर अप्रैल से आमों की उपज शुरू हो जाती है, जो अगस्त तक जारी रहती है। वैसे तो आम की एक हजार से भी अधिक किस्में हैं, मगर इसकी दशहरी, लंगड़ा, मलिका, तोतापुरी, नीलम, हापुस, फजली समर बहिश्त, चैंसा, अल्फांजो आदि किस्में ही ज्यादा लोकप्रिय हैं। इलाहाबाद के दसहरी आम सारे संसार में प्रसिद्ध हैं। आम की हर किस्म अपने कुछ अलग गुण व तासीर के कारण दूसरी किस्मों से विशिष्ट होती हैं।
अच्छी किस्म का पका हुआ आम एक संपूर्ण संतुलित आहार माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार आम स्निग्ध, पौष्टिक, बल एवं वीर्यवद्धक, भारी तथा अग्निवर्द्धक गुण धर्म वाला फल है। आधुनिक चिकित्सा-विज्ञान के विशेषज्ञ आम को अन्य फलों के मुकाबले अधिक पौष्टिक व गुणकारी मानते हंै। पके हुए आम के रासायनिक विश्लेषण से हमें ज्ञात होता है कि इसमें निम्नांकित तत्व उपलब्ध हैंरू
नमीरू 86.1 प्रतिशत, प्रोटीनरू 6.6 प्रतिशत, कार्बोहाइड्रेट 11.8 प्रतिशत, रेशा 1.1 प्रतिशत चिकनाईरू 0.10 प्रतिशत, खनिज लवण 0.03 प्रतिशत, चूनारू 0.01 प्रतिशत।
इसके अलावा, पके हुए प्रति आम 100 ग्राम में 50 से 80 कैलोरी ऊर्जा तथा 4500 आई0 यू0 विटामिन ए पाया जाता है। सोडियम, पोटेसियम, तांबा, गंधक, क्लोरीन, अलकली, नियासीन तथा मैलिक ऐसिड भी पके हुए आम में मौजूद रहते हैं। आम में उपलब्घ प्राकृतिक शर्करा को पचाने के वास्ते जीवन-शक्ति का अपव्यय नहीं करना पड़ता है, यह स्वयं सहजता से पच जाती है।
प्रख्यात अमेरिकी चिकित्सक डा0 विल्सन के अनुसार, आम में मक्खन की तुलना में सौ गुना अधिक पोषक तत्व होते है, जो रक्त को शुद्ध करने और नए रक्त के निर्माण में सहायक होते हंै। तपेदिक के मरीजों के वास्ते तो आम अमृतफल है। आम के सेवन से नसों और नाड़ियों को शक्ति प्राप्त होती है।
आम के विविध पोषक तत्व उसे एक गुणकारी फल बनाते हैं। अनुसंधानों से पता चला है कि आम के उपयोग से शरीर का स्नायु-संस्थान शक्तिशाली बनता है, जो रक्त-निर्माण के साथ वीर्य-विकारों को भी दूर करता है। आम का मृदुरेचक गुण उसे कब्ज के रोगियों के वास्ते उपयोगी पृथ्य बनाता है। आमाशय की बीमारियों में आम का प्रयोग लाभकारी है। संग्रहणी, श्वास, अरूचि, अमल-पिŸा, यकृत-वृद्धि आदि रोगों में आम का सेवन अतिशय लाभ पहुंचाता है।
गर्मी में ‘लू‘ लग जाने पर कच्चे आमों को पानी में उबालकर उसकी गुठली निकालकर उस पानी को रोगी को थोड़ा-थोड़ा कर पिलाना लाभदायक रहता है। रक्तात्मता और दुबलेपन को दूर करने के लिए दूध के साथ आम का रस लें। यह कब्ज भी दूर करेगा। कब्ज की शिकायत वालों को अधिक रेशेदार आमों का सेवन करना चाहिए।
खाद्य पदार्थ के रूप में भी आम का अपना महत्व है। इसमें विटामिनों की प्रचुरता के साथ पोटीन, कार्बोज तथा वसा भी पर्याप्त मात्रा में मिलती है। इस तरह आम को गर्मी का कवच कहा जाता है। आम का रस निकालकर उसे चावल के साथ खाया जाता है। कच्चे आम के उपयोग से स्कर्वी नामक रोग दूर होता है। मधुमेह रोग में समान मात्रा में आम और जामुन के फलों का रस मिलाकर लगातार कुछ दिनों तक सेवन करने से फायदा होता है। इसके नियमित सेवन से त्वचा के वर्ण में भी निखार आता है।
आम की तरह इसकी गुठली भी उपयोगी है। संभवतः इसी वजह से ‘आम के आम, गुठलियों के दाम‘ कहावत का चलन हुआ। गुठलियों के भीतर से प्राप्त गिरी को सुखाकर अनेक तरीकों से खाने में प्रयोग लाया जाता है। गिरी में चर्बी और कार्बोहाइड्रेट अच्छी मात्रा में उपलब्ध होता है, इसलिए यह पौष्टिक भी होती है। गिरी की सब्जी काफी स्वादिष्ट होती है। इससे आटा बनाकर इसकी रोटियां भी बनाई जाती हैं। गठिया रोग में आम की गिरी के तेल की मालिश करने से लाभ होता है। गुठली के चूर्ण को छाछ (मठ्ठे) के साथ फांकने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं। यदि आपको नकसीर ( नाक से खून बहने ) की शिकायत है तो आम की गुठली का रस नाक में टपकाना फायदा करेगा।
आम के बहुत से लाभ हैं। मगर यह फल से अधिक औषधि है। अतएव इसके सही इस्तेमाल का ढंग मालूम होना बेहद जरूरी है। आमों को खाने या चूसने से पहले लगभग दो घंटों तक पानी में भिगोये रखें। खाने से पूर्व आम का थोड़ा-सा रस निकालकर फेंक देना चाहिए। सड़े-गले और अधिक पके आम न खाएं। इन्हें खाने से लाभ के स्थान पर हानि हो सकती हैं।