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खीरा: गुणों में हीरा

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खीरा तपती गर्मियों में आने वाला सुपाच्य, शीतल और तरावट भरा फल है। खीरे का वानस्पतिक नाम ‘क्युकुमिस सेटाईक्स‘ है। आयुर्वेद में खीरे के गुणों का सविस्तार बखान किया गया है। आयुर्वेद के अनुसार खीरा स्वादिष्ट, शीतल, प्यास, क्लांति, दाह, पित्त तथा रक्त पित्त दूर करने वाला, रक्त विकार और मूत्र कच्छ नाशक रूचिकर फल है। खीरे की तासीर ठंडी है। गुणों की दृष्टि से यह ककड़ी से मिलता-जुलता फल है। वैसे भी खीरा और ककड़ी एक ही प्रजाति के फल हैं। इसके सेवन से प्यास शांत होती है और पेट तथा जिगर की जलन मिटती है। सलाद में खीरे का उपयोग अक्सर किया जाता है। इसमें विटामिन बी और सी प्रचुर मात्रा में विद्यमान होते हैं। पोटेशियम, कैल्शियम, फास्फोरस, गंधक, आयरन और अन्य उपयोगी तत्व, लवण आदि भी हमें खीरे में मिलते हैं।
खीरा कब्ज दूर करता है। पीलिया, ज्वर, प्यास, शरीर की जलन, गर्मी से होने वाले विकार त्वचा रोगों में खीरा लाभदायक है। खीरा में जलीय अंश काफी मात्रा में होने से बार-बार लगने वाली प्यास में यह राहत पहुंचाता है। छाती में जलन, अजीर्ण, पेट की गैस और एसिडिटी में नियमित रूप से खीरा खाने से लाभ पहुंचाता है।
मोटापे से परेशान लोगों के लिए सवेरे के समय इसका सेवन फायदेमंद होता है। इससे वह दिन भर ताजगी और शरीर में हल्कापन महसूस करेंगे। गुर्दे से संबंधित बीमारियों में खीरे के रस का सेवन लाभप्रद पाया गया है। शरीर के हानिकारक कीटाणुओं को नष्ट कर खीरा हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास में सहायक होता है। भूख न लगने की शिकायत में खीरे का सेवन आपकी भूख बढ़ाएगा। आंतों की गति को उत्तेजित करने के लिए खीरा रेशा प्रदान करता है। इसलिए कब्ज तथा उदर रोगियों को रोजाना दो खीरों का सेवन जरूर करना चाहिए। इसके नियमित सेवन से मूत्र विकार दूर होते हैं तथा पेशाब खुलकर आता है।
आइए, अब खीरे के कुछ औषधीय उपयोगों की चर्चा करें –
भोजन के साथ नमक, काली मिर्च, नींबू डालकर सलाद के रूप में खीरे का सेवन करने से खाना आसानी से पचता है और भूख में वृद्धि होती है। खीरे के गोल टुकड़े काटकर आंखों पर रखने से नेत्रों को शीतलता मिलती है और आंखों के नीचे का कालापन भी दूर होता है।
चेहरे पर मुंहासों, दाग-धब्बों व झांइयों से परेशान है तो उन पर रात्रि को शयन से पहले खीरे का रस लगाएं।
बहुत से व्यक्तियों को घुटनों में दर्द की शिकायत रहती है। घुटनों का दर्द दूर करने के वास्ते भोजन में खीरा अधिक खाएं और लहसुन की एक कली साथ खाएं।
अधिक तैलीय त्वचा वाले व्यक्तियों को खीरे के रस में थोड़ी सी मुलतानी मिट्टी पीस कर मिलानी चाहिए। कुछ देर बाद मिट्टी फूल जाए, तो चेहरे और गर्दन पर लगाएं।
पथरी के रोग में खीरे का रस 250 ग्राम दिन में तीन दफा रोजाना पीना चाहिए। पेशाब में जलन, रूकावट व डाईबिटीज में भी यह प्रयोग लाभकारी है।
खीरे के रस में दूध, नींबू और शहद मिलाकर पूरे शरीर में हाथ पैर, चेहरे पर लगाने से त्वचा मुलायम, चिकनी तथा कांतिवान हो जाती है।
यदि शरीर के किसी हिस्से पर सूजन आ रही हो तो खीरे के रस में नमक मिलाकर बांधे। पीप एक स्थान पर आ जाएगा।
खीरे को कसकर दही में डालकर रायता बना लें। इसमें पुदीना, हींग, जीरा, काली मिर्च व काला नमक डालकर सेवन करने से उदर विकार दूर होते हैं।
खीरे के रस रोजाना प्रति दो घंटे बाद 250 ग्राम पीने से शरीर के भीतर जमा विजातीय विषाक्त पदार्थ मूत्र और मल के जरिए बाहर आ जाते हैं।
खीरे के रस में नींबू व मलाई फेंटकर चेहरे पर लगाने से चेहरे का रंग निखर जाता है और चेहरा एक नई आभा से चमकने लगता है।
मधुमेह, प्रमेह और सुजाक के रोगियों को भी खीरे का रस कलमी शोरा मिलाकर प्रयोग करना चाहिए।
खीरे के रस में जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर मलने से मुंहासे, काले धब्बे, झाइयां आदि दूर होते हैं और त्वचा कोमल होकर निखर उठती है।
खीरे का सेवन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। खीरा सेवन करते समय यह जरूर देख लें कि वह सड़ा-गला या अधिक देर धूप में पड़ा हुआ न हो। यथा-संभव दोपहर तक ही खीरे का सेवन करना चाहिए। खीरा एक साथ पर्याप्त मात्रा से अधिक मात्रा में खाना हानि पहुंचा सकता है। इसका सेवन करने के आधा-पौन घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए। खीरे के रस को स्वादिष्ट बनाने के वास्ते उसमें एक चम्मच शहद और आधे नींबू का रस मिलाया जा सकता है।
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