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जानें खरगोश के बारे में | 12 facts about rabbit (khargosh) in hindi

खरगोश (khargosh)
Sarbast.T.Hameed, CC BY-SA 4.0 via Wikimedia Commons
जानें खरगोश के बारे में – Rabbit information in Hindi

खरगोश एक नाजुक, मासूम और निहायत खूबसूरत प्राणी है। सफेद-झक और मुलायम बालों वाला यह जानवर बरबस किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। शिकारी किस्म के लोग इसे इसके लजीज और गर्म मांस के लिए पसंद करते हैं, तो बच्चे इसे पालतू जानवर बनाकर इसके साथ खेलना पसंद करते हैं।

खरगोश की शारीरिक संरचना कैसी होती है ?

शारीरिक संरचना की दष्टि से सामान्य खरगोश की लम्बाई 18 से 20 इंच तक होती है। इसकी आंखे भूरी व नीली होती हैं। शरीर के अनुपात में इसके कान काफी लम्बे होते हैं। वस्तुतः बडे़ और संवेदनशील कान खरगोश को आत्मरक्षा के वास्ते एक प्रकृति-प्रदान उपहार हैं।

खरगोश की क्या विशेषताएँ हैं ?

खरगोश एक कमजोर और बाहरी शत्रुओं से अपनी रक्षा कर पाने में असमर्थ प्राणी है, इस कारण बड़े कानों के अधिक क्षेत्रफल की वजह से यह अत्यंत मद्धम आवाज से उत्पन्न हुई ध्वनि तंरगों को भी सरलता से ग्रहण कर लेता है और कुलाचें भरकर अपनी रक्षा कर लेता है। तीव्र श्रवण-शक्ति के अतिरिक्त दूर तक देख पाने की क्षमता और सूंघने की तीव्र व अद्भुत शक्ति भी इसकी आत्मरक्षा में मददगार होती है। काफी दूर से यह अपने शत्रुओं की गंध पकड़ लेता है और बचाव में भाग कर उनकी पहुंच से बाहर हो जाता है।
खरगोश की पिछली टांगे अगली टांगों की अपेक्षा अधिक बड़ी होती हैं। अपनी इन्हीं टांगों के बल पर कुलाचें भर कर दौड़ना इसका प्रिय शौक है। संकट के समय यह लगभग 65 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से दौड़ सकता है।

खरगोश का वैज्ञानिक नाम क्या है ?

खरगोश (rabbit) का वैज्ञानिक (scientific) नाम Oryctolagus Cuniculus (ऑरिक्टोलेगस कुनिकुलस) है।

खरगोश शिकारी और दूसरे जानवरों से कैसे बचाव करते है ?

अपने शत्रु से रक्षा करने के लिए भागता हुआ खरगोश कभी एक दिशा में नहीं दौड़ता, बल्कि भागते हुए दिशा-परिवर्तन कर अपना पीछा कर रहे शत्रु को चकमा देने की कला में खरगोश को महारत हासिल है। भागते-भागते अचानक दिशा बदलकर किसी झाड़ी, बिल या खोह में गायब हुए खरगोश को उसका शिकारी हतप्रभ देखता रह जाता है। जमीन पर बचाव के द्वार बंद हो जाने पर यह पानी में भी छलांग लगाने से नहीं झिझकता।
खरगोश को सर्वाधिक खतरा कुत्तों, बिल्ली, लोमड़ी, भेड़िया आदि जानवरों से रहता है । पक्षियों में चील, बाज और उल्लू जैसे शिकारी पक्षी हरदम बेचारे निरीह खरगोश की जान के पीछे पडे़ रहते हैं। आदमी भी मांस के अलावा इसकी खाल से जूते, मौजे, जैकेट आदि सुंदर वस्तुएं बनाने के लिए इसका शिकार करता रहता है।

खरगोश का भोजन, क्या खाता है खरगोश ?

खानपान के मामले में खरगोश एक शुद्ध शाकाहारी प्राणी है। इसका मुख्य भोजन हरी दूब, घास, नर्म पौधे, सब्जियां, फल, चने आदि हैं। इसके मुंह में दो दंत पक्तियां होती हैं, जिनकी मदद से यह अपना भोजन कुतर-कुतरकर करता है। गाजर, मूली, शकरकंद आदि की जड़ें व छिलके इसका प्रिय भोजन है। यह खेतों में खड़ी हरी सब्जियों और फलों को खाता रहता है। इस कारण किसान लोग इसे अपना दोस्त नहीं मानते।

खरगोश का सामाजिक जीवन कैसा होता है ? खरगोश कहा रहता है ?

यह आमतौर पर समूह-प्रेमी जीव है, जो एक बड़े झुण्ड के रूप में रहना पंसद करते हैं। ये भोजन की तलाश में प्रायः सांझ ढले या मुंह अंधेरे निकलते हैं। शेष समय यह घनी झाड़ियों या लम्बी घास में छुपे रहते हैं। कुछ किस्म के खरगोश मरुस्थल और मैदानोँ में भी पाए जाते हैं।

खरगोश कितने महीने में बच्चा देता है ?

इसकी पृष्ठभूमि में खरगोशों की अद्भुत व तीव्र प्रजनन क्षमता है। मादा खरगोश केवल छः माह की आयु में बच्चे उत्पन्न करने लगती है तथा एक वर्ष में यह तीन या चार बार गर्भ धारण करती है। एक बार में मादा खरगोश पांच-छह बच्चों को जन्म देती है। खरगोश अकेला ऐसा प्राणी है, जो एक वर्ष में अपने वजन से दस गुना अधिक भार के बच्चे पैदा करता है। खरगोश की औसत आयु साढ़े सात से आठ वर्ष होती है।मादा खरगोश लगभग 29 – 35 दिन तक गर्भावस्था में रहती है। बच्चा पैदा होने के समय वजन कुछ 25 – 90 ग्राम होता है, सामान्यतया ये 40 ग्राम का होता है। बच्चा देने के पहले माँ अपना शरीर नौच कर घोसला बनाती है।

खरगोश की प्रजातियां

उत्खनन से प्राप्त जीवाश्म के आधार पर प्राणी-शास्त्री उत्तरी अमेरिका को खरगोश का जन्म-स्थान मानते हैं। अब तक इनकी तकरीबन 50 से 55 प्रजातियों की पहचान की जा सकी है, इनमें सखा, खरहा, अंगोरा, फ्लेमिश, जाएंट आदि मुख्य हैं।
खरगोश की सभी प्रजातियों में सबसे कम वजन के छोटे खरगोश नीदरलैण्ड तथा पौलेण्ड में पाए जाते हैं। इन वयस्क खरगोशों का वजन 900 ग्राम से एक किलोग्राम एक सौ तीस ग्राम तक होता है। ‘फ्लेमिश जाएंट‘ प्रजाति के खरगोश आकार व वजन में सबसे बडे़ होते हैं। इनका औसतन वजन सात से साढ़े आठ किलोग्राम पाया जाता है।

अंगोरा प्रजाति के ख़रगोश की खास बातें ?

अंगोरा प्रजाति के खरगोशों से बेशकीमती ऊन पाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि अंगोरा खरगोश की उत्पति तुर्की में हुई। चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस अंगोरा को बहुत पवित्र मानते थे। यूनानी लोग आज भी अंगोरा खरगोश को बहुत पवित्र मानते हैं तथा उनके लिए संगमरमर की वेदी बनाते हैं। जर्मनी में अंगोरा खरगोश से ऊन प्राप्त करने के वास्ते एक बड़ी परियोजना के तहत आधुनिक व वैज्ञानिक तरीके से खरगोश-पालन का कार्य किया जाता है। भारत में ये हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा इनका पालन किया जाता है, क्योकि वहां की जलवायु इनके लिए उपयुक्त है । वहां आने जाने वाले टूरिस्ट इनके साथ फोटो खिंचवाते है।

खरगोश पालने के फ़ायदे ? क्यों लोग खरगोश पालते हैं ?

– खरगोश एक बहुत ही सीधा और वफ़ादार जानवर है, ये हमेशा जहा रहता है वहां नकारात्मकता हटाता है और सकरात्मता बढ़ाता है।
– ऐसा भी कहा जाता है की जहाँ खरगोश रहता है वह धन धान्य और समृद्धता बढ़ती है।
– अगर घर में खरगोश हो तो प्रसन्न्ता और खुशिया आती हैं। घर में बच्चे बीमार रहते हो तो खरगोश पाल लीजिये, इससे बच्चे का मन तो लगेगा ही, साथ में आपकी ऊर्जा में भी विस्तार होगा।
– इन्हे ट्रैन करना आसान है

क्या खरगोश को दूध दे सकते है ?

नहीं। भूल कर भी खरगोश को गाय का दूध ना पिलाये, क्योंकि गाय दूध और इससे बनी चीजे खरगोश के पाचन तंत्र को ख़राब कर सकती है। खरगोश मूलतः लैक्टोस पचाने में असमर्थ होते हैं। शिशु खरगोश केवल अपनी माँ का दूध पी सकते है।

खरगोश ( Khargosh ) की औसत उम्र कितनी होती है ?

खरगोश की औसत उम्र 7 से 12 साल होती है।


आज खरगोश धीरे धीरे लुप्त होते जा रहे हैं, किसानों की फसलों आदि को नुकसान पहुंचाने की वजह से कृषक-वर्ग इससे अधिक सहानुभूति नहीं रखता मगर पर्यावरण-संतुलन बनाए रखने में खरगोशो की महत्वपूर्ण भूमिका को अनदेखा नहीं किया जा सकता। इस खूबसूरत और निरीह प्राणी की हर संभव रक्षा की जानी चाहिए।

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