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हाय ! ये खर्राटे !!

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दिन भर की आपाधापी के बाद आप थक-हारकर गहरी नींद सो रहे हों और अचानक खर्राटों की आवाज से आपकी नींद उचट जाए तो….? जाहिर है, सोने का सारा मजा किरकिरा हो जाता है। यह स्थिति कमोबेश तब और दुविधाजनक हो जाती है, जब खर्राटे भरने की आदत खुद आपके जीवन-साथी की हो। विदेशों में कई दंपतियों में इसी मुद्दे को लेकर तलाक तक हो जाया करते हैं।
बहरहाल, इन्हीं खर्राटों से निजात पाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक प्रयोग किया। उन्होंने प्रयोग के जरिए यह पाया कि यदि खर्राटो के आदतन रोगियों को एक विशेष प्रकार का स्प्रे सुंघाकर एक करवट सोने को बाध्य किया जाए तो खर्राटे भरने की आदत को काफी हद तक कम या खत्म किया जा सकता है। लेकिन हां, इस चिकित्सा के साथ मरीज को अपना वजन कम करना होगा, तभी पूरा इलाज कारगर साबित होगा।
वैज्ञानिकों ने इन ‘खर्राटावीरों‘ पर एक दिलचस्प प्रयोग किया। खर्राटों के आदी 19 रोगी छांटे गये। ये सभी ज्यादा वजन वाले थे। इन तमाम मरीजों की शयन-प्रक्रिया को दृश्य-श्राव्य माध्यम के जरिए रिकाॅड किया गया। अत्यधिक संवेदनशील टेपरिकाॅडर द्वारा उनके खर्राटों की संख्या मापी गई तो कैमरे के जरिए इनके खर्राटे भरने के दृश्य।
पहली रात को मरीजों को सामान्य नींद में ( यानी बगैर चिकित्सा के ) सोने दिया गया। औसतन एक मरीज ने एक घंटे में 372 खर्राटे भरे। दूसरी रात को ‘आॅक्सीमेटाझोलीन‘ नामक स्प्रे रोगियों की नाक में सुंघाकर सुलाया गया। इस रात खर्राटे घटकर 366 प्रति घंटा रह गए। प्रयोग की तीसरी व अंतिम रात को इन सभी रोगियों को यही स्प्रे सुंघाकर एक करवट सुलाया गया। इस हेतु हर मरीज को एक फोम का तकिया अड़ाया गया। तीसरी रात के परिणाम आश्चर्यजनक थे। मरीजो ने ‘नेसल स्प्रे‘ और एक करवट सोने के कारण औसतन 270 खर्राटे प्रति घंटा भरे। यानि खर्राटे 372 से घटकर 270 हो गए।
बस, फिर क्या था। तीसरे दिन के प्रयोग को इन्हीं मरीजो पर वजन कम करने की हिदायत के साथ छह माह तक आजमाया गया। खर्राटा भरने वाले रोगियों की आदत में काफी सुधार आ गया।
मजेदार बात यह है कि जिस मरीज ने अपना वजन जितना ज्यादा घटाया, उसके खर्राटें उसी रफ्तार से कम होते चले गए। 19 में से 9 मरीज, जिन्होंने अपना वजन 3 किग्रा कम कर लिया, उनके खर्राटे 372 से घटकर 173 हो गए। 6 किग्रा वजन कम करने वाले ‘बहादुरों‘ ने खर्राटों से पूरी तरह मुक्ति पाली। पर अफसोस ! ऐसे साहसी थे उन्नीस में ये महज तीन।