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कजरारे नयन और काजल | Kajrare Nayan and Kajal in Hindi

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कजरारे नयन और काजल

कजरारी आँखें – सौन्दर्य क पैमाना

बदलते समय के साथ सौंदर्य के मापदंड निरंतर बदलते रहे हैं। मगर नहीं बदला तो केवल आंखों का जादू नहीं बदला। हर युग में बड़ी-बड़ी कजरारी आंखें सौंदर्य का जीवन्त प्रतिमान बनी रहीं। नारी के सौंदर्य में आंखों की बनावट का क्या स्थान है ,यह जगजाहिर है । सोमवार के कवियों ने इन्हें खंजन ;मनि, झील, तलवार आदि न जाने कितनी उपमाएं देकर संबोधित किया है।

नेत्र -प्रसाधनों में काजल ही सबसे उपयोगी

आज आंखों की सजावट व श्रृंगार के लिए नित नए प्रसाधन व बहुमूल्य उपकरण निकल रहे हैं। बरौनियों पर मस्कारा लगाना, बनावटी पलकें, आई लाइनर, आई शैडो आदि- आदि। यह सब महंगे और समय खर्च करने वाले प्रसाधन हैं। ऐसे में काजल एक ऐसा सौंदर्य प्रसाधन है, जिसके प्रयोग से ना केवल आंखों के सौंदर्य में वृद्धि होती है बल्कि नेत्र ज्योति के लिए भी लाभदायक है। इसके अतिरिक्त यह सर्व सुलभ प्रसाधन भी है।

काजल लगाने के तरीके

आप आंखों की बनावट के अनुरूप दोनों आंखों के कोरों पर काजल लगाकर मेकअप द्वारा मनचाहा आकार प्रदान कर सकती हैं। एक बार लगाया गया काजल 4 से 6 घंटे तक बना रहता है। काजल न तो बहुत अधिक सूखा होना चाहिए और न अधिक गीला। दोनों ही स्थितियों में उसके फैलने की आशंका रहती है । आंखों में काजल आंजने के लिए शीशे अथवा चांदी की सिलाई उपयोग में लाई जाती है।

वैसे बुनाई की 12 नंबर वाली प्लास्टिक की सलाई का नुकीला टुकड़ा भी उपयोगी रहता है। अंगुली से काजल कभी नहीं आंजना चाहिए । इससे आंखों की त्वचा को क्षति पहुंचने की आशंका रहती है ।काजल लगाने से पूर्व आंखों को भली प्रकार धोकर पहले लगे काजल को साफ कर लेना चाहिए। इसके लिए साफ कपड़े पर चिकनाई लगाकर हल्के से आंखों को पौंछ लेना चाहिए। काजल को आंखों के भीतर भरने से आंखों का आकार छोटा नजर आने लगता है।

काजल लगाते समय सावधानी

काजल लगाना एक सूक्ष्म कला है । वैसे तो काजल आंखों के आकर्षण में चार चांद लगा सकता है, किंतु फूहड़पन से लगाया गया काजल आपकी आंखों को नुकसान पहुंचाने के साथ ही आपके व्यक्तित्व की गरिमा को भी ठेस पहुंचा सकता है। इसलिए काजल लगाते समय अपनी आंखों की आकृति व बनावट का ख्याल रखना अति आवश्यक है। गोलाकार आंखों में काजल इस प्रकार लगाना चाहिए, जिससे वह लंबी और तीखी नजर आएं।

यदि गोलाकार आंखों में काजल भी गोलाई में लगाया गया तो सुंदर नेत्र भी तोते की आंखों जैसे दिखाई पड़ेंगे। इसलिए गोल नेत्रों में काजल की लंबी रेखा आंखों के नीचे की ओर बनानी चाहिए तथा आंखों के दोनों सिरों से यह रेखा बाहर निकली रहे । लंबाकार आंखों में कोर के पास तक ही काजल की बारीक रेखा उपयुक्त रहती है।आंखों की पूरी गोलाई में काजल नहीं लगाना चाहिए । इससे आंखों की खूबसूरती कम हो जाती है।

काजल लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि वह आंखों के आसपास न फैलने पाए।काजल सावधानीपूर्वक लगाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसकी मोटी चिकनी परत न केवल भद्दी लगती है बल्कि नेत्र ज्योति को भी नुकसान पहुंचाती है।

काजल लगाने के पश्चात हल्का सा वैसलीन या क्रीम लगा लेने से आंखों के सौंदर्य में निखार आ जाता है।

अच्छी किस्म का काजल ही काम में लें

अंत में, एक बात और। वैसे तो बाजार में कई किस्मों और रंगों के काजल उपलब्ध हैं। लेकिन आप किसी प्रतिष्ठित कंपनी का काजल ही उपयोग में लाएं अथवा घर पर ही स्वच्छता से काजल तैयार कर सकती हैं। काजल आंखों की सौंदर्य- वृद्धि के साथ आपकी नेत्र ज्योति में भी वृद्धि करेगा।