jukham | नाक में दम करने वाला रोग : जुकाम

                                                                                                                                                

 

जुकाम jukham एक बेहद आम बीमारी है।

सामान्यतया इसे कभी भी गंभीरता से नहीं लिया जाता। जुकाम होता है और दो-चार दिन में अपने आप ठीक भी हो जाता है। हरेक व्यक्ति कमी-न-कभी जुकाम से अवश्य पीड़ित होता है। जुकाम इस अर्थ में “साम्यवादी बीमारी’ कही जा सकती है, जो कभी भी अमीर-गरीब, छोटे-बड़े, स्त्री-पुरूष, महल-झोपड़ी में भेद नहीं करती। यह ‘समदर्शी’ रोग जुकाम जब चाहे, जिसको चाहे, हो जाता है।

एक हजरत ने तो जुकाम और काम के अंर्तसम्बधों का बड़ा दिलचस्प विश्लेषण किया है। रोमांस और जुकाम के रिश्ते को परिभाषित करते हुए वह कहते हैं कि दोनों ही रोगों में रूमाल की बड़ी अहम्‌ भूमिका है। काम और जुकाम की दूसरी समानता यह है कि दोनों ही जाड़ों में ज्यादा सताते हैं।

बहरहाल, हम जुकाम के कारणों की खोज करते हैं, तो पाते हैं कि यह एक बहुआयामी समस्या है, जिसकी आज तक कोई रामबाण औषधि नहीं खोजी जा सकी है। यह कितनी विचित्र बात है कि आदमी चेचक और प्लेग जैसी महामारियों पर काबू पा चुका है और केंसर व एड्स के खिलाफ उसका संघर्ष जारी है, लेकिन वही आदमी जुकाम जैसी मामूली बीमारी की कोई कारगर दवा नहीं खोज सका।

दरअसल बात इतनी सरल नहीं है। जुकाम जिन वाइरसों से फैलता है, उनमें प्रमुख ‘राइनो वाइरस है। इन वाइरसों की संख्या दो-चार नहीं, बल्कि पूरी नब्बे है। अब तक पचास से अधिक किस्म के वाइरसों की खोज हो चुकी है, किन्तु चिकित्सा-विज्ञान अभी इतना सक्षम नहीं हुआ है कि इन सभी ७० वाइरसों के विरूद्ध ऐसा कारगर टीका खोज सके, जो आदमी के लिए बिल्कुल निरापद हो।

आमतौर पर यह माना जाता है कि जुकाम का सम्बन्ध ठंडे मौसम से है,किन्तु यह मान्यता सत्य नहीं है। भयंकर गर्मी के मौसम में भी लोग जुकाम के शिकार हो जाते हैं। दुनिया के निम्न तापमान वाले क्षेत्रों के निवासियों को जुकाम की शिकायत नहीं के बराबर होती है। और तो और सामान्य से सौ डिग्री फारेनहाइट कम तापक्रम वाले क्षेत्रों में अनुसंधान कर रहे शोधकर्ता कभी जुकाम से पीड़ित नहीं होते।

वस्तुतः जुकाम एक संक्रामक रोग है, जो इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को छूने, उसके द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली वस्तुओं का इस्तेमाल करने या वायुमंडल में व्याप्त इसके रोग के रोगाणुओं के शरीर में प्रविष्ट हो जाने से फैलता है। इसके रोगाणुओं में तेजी से विकसित होने की क्षमता विद्यमान होती है। जब कोई रोगाणु पहली बार शरीर में प्रविष्ट होता है तो वह तत्काल विकसित होने लगता है, क्योंकि शरीर की सुरक्षा-प्रणली यकायक उसका सामना करने के लिए तैयार नहीं हो पाती। किन्तु जब वही रोगाणु दुबारा आक्रमण करता है, तो रक्त में मौजूद सुरक्षा-तत्व प्रायः उसका मुकाबला करते हैं और उसे नाकाम कर देते हैं। अक्सर जुकाम हर बार एक ही प्रकार के रोगाणु द्वारा नहीं होता।

कहने को तो जुकाम एक साधारण-सी बीमारी है। लेकिन इसने सारी दुनिया की नाक में दम कर रखा है। इसके बीमार को न बैठने से चैन मिलता है और न ही लेटने से। सिर भारी हो जाता है, आंखें जलने लगती हैं, नाक बहने लगती है। किसी भी काम में मन नहीं लगता। लगातार छींकें आती हैं।

ऋतु-परिवर्तन का संधि-काल जुकाम के रोगाणुओं के पनपने का सबसे अधिक उपयुक्त समय होता है। अतः इस संधिकाल में अधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। जाड़े की शुरूआत में ठंड लग जाना, गर्मी के मौसम में लू लग जाना तथा प्रारंभिक बरसात में भीग जाना जुकाम होने के महत्वपूर्ण कारण हैं। अतएव बदलते

मौसम की शुरूआत में पर्याप्त सतर्कता बरतें। जुकाम के अन्य कारणों में एलर्जी उल्लेखनीय है। एलर्जी साधारण सर्दी-जुकाम से भिन्‍न है। इसमें मरीज को अचानक निरंतर छींकें आने लगती हैं और नाक से पानी जैसा द्रव बहने लगता है। एलर्जी से बचाव का सबसे सही उपाय यही है कि एलर्जी पैदा करने वाली वस्तुओं के सम्पर्क से बचा जाए।

अक्सर लोग जुकाम की शुरूआत होते ही दवाओं और गोलियों का सेवन आरंभ कर देते हैं। यह उचित नहीं है। अधिकांश मामलों में जुकाम का इलाज शरीर की सुरक्षा-प्रणाली अपने आप कर लेती है और अधिकतम एक सप्ताह में जुकाम स्वतः ठीक हो जाता है। अतएव दवाओं का इस्तेमाल यथा-संभव नहीं

अथवा कम से कम किया जाना चाहिए। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मत है कि तीन-चार दिन के जुकाम में कफ और नाक से बहने वाले पानी के रूप में शरीर की गंदगी व विजातीय पदार्थ बाहर निकल जाते हैं।

दवाओं के बजाय जुकाम को दूर करने में कई घरेलू उपचार अधिक कारगर होते हैं। जुकाम होते ही आपका शरीर जितना अधिक गर्म पानी सहन कर पाये, उससे स्नान कीजिए तथा नहाने के उपरांत गर्म बिस्तर पर अधिक से अधिक समय आराम कीजिए |

मांसपेशियों की अकड़न, गले की खराशं दूर करने तथा बंद नाक खोलने के लिए गर्म दूध में अदरक मिलाकर पीना बहुत फायदेमंद है। गर्म पानी में नींबू का रस मिलाकर उबालें तथा उसमें शहद मिलाकर सेवन करें। इससे भी जुकाम में राहत मिलेगी। थकावट भी जुकाम का एक कारण है। अतएव जुकाम की अवस्था में अधिकाधिक आराम करना चाहिए।

 दिन में तीन-चार बार उबले हुए गर्म पानी में नमक मिलाकर गरारे करें। इससे जुकाम के रोगाणु नष्ट हो जाते हैं और आराम मिलता है। दूध में काली मिर्च तथा शक्कर के स्थान पर मिश्री मिलाकर पीने से भी राहत मिलती है। इसके अलावा, शहद के साथ अदरक पीसकर खाने से तथा अजवाइन का काढ़ा पीने सेभी जुकाम में फायदा पहुंचता है।

चुंकि जुकाम एक संक्रामक रोग है और छूत की बीमारी है, इसलिए जुकाम के रोगी को अपने वस्त्र, तौलिया, रूमाल आदि अलग रखने चाहिए तथा पूर्ण सावधानी बरतनी चाहिए अन्यथा जुकाम पूरे परिवार तथा मिलने-जुलने वालों में फैलते समय नहीं लगेगा।

अंत में यह दिलचस्प जानकारी कि वास्तव में मेंढकी को जुकाम नहीं होता। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि जुकामकेवल आदमी की ही बपौती है। गाय, भैंस, मुर्गा-मुर्गी तथा अन्य कई पशु-पक्षियों को जुकाम होते देखा गया है। बछड़ों और मेमनों में भी जुकाम के विषाणु पाये गये हैं। लेकिन तसल्लीबख्श बात यह है कि जानवरों से आदमियों में जुकाम फैलने का कोई खतरा नहीं रहता।