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रस- भरा फल: अनन्नास| Juicy Fruit: Pineapple

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रस भरे फलो में अनन्नास का महत्वपूर्ण स्थान है। ग्रीष्म काल में यह फल आसानी से उपलब्ध रहता है। यह घरेलू फल नहीं होकर प्रायः ज्यूस सेंटर पर अधिक देखा जाता है क्योंकि इस फल को खाने की अपेक्षा इस के रस का सेवन अधिक किया जाता है।

इतिहास:

ऐसा माना जाता है ;अनन्नास का मूल जन्म स्थान  अमेरिका है। इतिहासज्ञों  के अनुसार, जब क्रिस्टोफर कोलंबस भारत की खोज में अमेरिका पहुंच गया तो अमेरिका के इंटालीस द्वीप के एक छोटे से गांव में उसने पहली बार अनन्नास फल को खाया। कोलंबस और उसके साथियों को अनन्नास बहुत ही सुमधुर और स्वादिष्ट लगा ।अपने देश लौटते हुए वह अनन्नास को ले आया। इस प्रकार पुर्तगाल और स्पेन का सफर तय करते हुए अनन्नास भारत पहुंचा। भारत के  समुद्र तटीय प्रदेशों की जलवायु अनन्नास की उत्पत्ति के लिए काफी अनुकूल थी इसलिए यहां पर यह तेजी से फैला।

विभिन्न भाषाओं में अनन्नास को क्या कहते हैं? :

वनस्पति शास्त्र की दृष्टि से अनन्नास को आपनस परिवार का सदस्य माना जाता है। अंग्रेजी में इसे पाइनएप्पल तथा लेटिन भाषा में  एनानास कोमोसस के नाम से जाना जाता है । संस्कृत में इसे :बहुनेत्र ‘ बंगाली में ‘आनारस’गुजराती में ‘अनन्नास ‘ मराठी में ‘अननस ‘तेलुगु में ‘अनानाश ‘और तमिल में ‘आनाशपाइनम ‘ कहा जाता है।इस फल को मूल रूप से अमेरिका का फल माना जाता है।  भारत में इसका प्रवेश लगभग पांच शताब्दी पूर्व पुर्तगालियों के माध्यम से हुआ।

अनन्नास स्वाद में कुछ मीठा, सौंधा व तीखा होता है। इसमें कृमिनाशक गुण बहुतायत से पाए जाते हैं।  इसमें पेप्सिन जैसा तत्व ब्रोमेलिन पाया जाता है, जो प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को पचाने में सहायक होता है।  विटामिन `ए’ और ‘सी’ पर्याप्त मात्रा में तथा विटामिन बी अल्प मात्रा में अनानास में पाया जाता है। इस  रस पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है तथा एसिडिटी को खत्म करता है।

अनन्नास का फल देखने में भी बेहद सुंदर लगता है। यह फल सौ से अधिक परस्पर जुड़े हुए लघु फलों का समूह होता है। इसके फलों को अच्छी तरह परिपक्व होने में लंबा समय लगता है। यह अवधि कभी-कभी दो वर्ष तक हो सकती है।

रासायनिक संरचना:

पानी : 85.3 प्रतिशत , प्रोटीन : 0.4 प्रतिशत , वसा : 0.2 प्रतिशत , कार्बोहाइड्रेट : 13.6 प्रतिशत , रेशा : 0.4 प्रतिशत । प्रति सौ ग्राम अनन्नास में कैल्शियम : 16 ग्राम , फास्फोरस : 11 ग्राम , लौह  0.3 ग्राम होता है । इसके अतिरिक्त विटामिन ए , थायोमिन , नाइसिन , विटामिन सी आदि तत्व भी इसमें पाए जाते हैं । प्रति सौ ग्राम अनन्नास में 58 कैलोरी उर्जा भी प्राप्त होती है ।

अनन्नास रसीला व स्वादिष्ट फल होने के साथ – साथ अनेक औषधीय गुणों से से भी परिपूर्ण है । अजीर्ण , शरीर की सूजन , बदहजमी , अधिक पेशाब आना , घबराहट आदि रोगों में इसके रस का सेवन उपयोगी है ।

अनन्नास के रस में विद्यमान क्लोरीन मूत्र – पिण्ड को सक्रिय कर शरीर के भीतरी विषों को बाहर निकाल देता है । पका हुआ अनन्नास मूडल , कृमिहन एवं पित्तशामक होता है । यह हृदय – के लिए लाभकारी , उदर – विकारों , पीलिया और पांडु रोग में राहत पहुंचाता है ।

अनन्नास का ताजा रस गले को तर कर उसे राहत देता है । गले के रोगों से रक्षा करता है ।

विभिन्न रोगों के उपचार में अनन्नास का उपयोग:

 उदर कृमि :

• बच्चों के पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए छुआरा, अजवाइन और बायबिडंग को बराबर मात्रा में मिलाकर महीन पाउडर बना लें । इस चूर्ण की पांच ग्राम मात्रा शहद और अनन्नास के रस में मिलाकर दें ।

•  नित्य अनन्नास का ताजा रस पीने से कब्ज दूर होती है ।

• अनन्नास के सफेद पत्तों के रस में शक्कर मिलाकर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं ।

सूजन :

• शरीर की सूजन को दूर करने के लिए एक सप्ताह तक प्रतिदिन अनन्नास के एक पूरे फल का सेवन करें ।

 • आंखों पर सूजन होने पर अन्नास के गुदे को पीसकर आंखों पर बांधने से लाभ होता है।

 .शरीर की सूजन का मुख्य कारण पेशाब कम आना है । इसके लिए पके हुए अनन्नास   का सेवन करे तथा उस पर दूध पीएं । इससे चेहरे की सूजन,खासतौर पर आंखों के नीचे की सूजन में राहत मिलेगी ।

• अधिक पेशाब आने की स्थिति में अनन्नास के रस में जायफल, जीरा, काला नमक , और पीपल का चूर्ण मिलाकर सुबह शाम सेवन करें ।

घबराहट / बेचैनी:

घबराहट , अधिक प्यास लगना , बेचैनी रहना आदि रोगों में नियमित रूप से अनन्नास का ठंडा रस इस्तेमाल करना चाहिए ।

  • गर्मियों में अनन्नास का शीतल शर्बत दिल और दिमाग को तरावट प्रदान करता है ।

 गले से सम्बन्धित रोग :

• गले की सूजन और खराश में अनन्नास खाने से तुरन्त लाभ होता है ।

• टान्सिल के रोगियों को अनन्नास का नियमित रूप से उपयोग करना चाहिए ।

अन्य :

• बवासीर के मस्सों पर अनन्नास का गुदा पीसकर लेप करने से लाभ होता है ।

•  गर्मी के कारण होने वाले फोड़े – फुन्सियों पर अनन्नास का गुदा रगड़ने से राहत मिलती है ।

 • पथरी के रोगियों के लिए अनन्नास का सेवन उपयोगी है।

• बदहजमी होने पर अनन्नास के टुकड़ो पर काली मिर्च का पाउडर और सेंधा नमक छिड़ककर खाना चाहिए ।

 • अनन्नास का रस पाचन शक्ति बढ़ाने में सहायक होता है तथा अम्लजनित बदहजमी में राहत पहुंचाता है ।

• मुंह के छाले होने पर पके हुए अनन्नास के टुकड़े मुंह में डालकर चूसते रहें ।

• ज्वर की स्थिति में अनन्नास के रस में दो चम्मच शुद्ध शहद मिलाकर पीने से शीघ्र लाम होता है ।

• यकृत बढ़ जाने, पर पाचन क्रिया दुर्बल होने और नेत्रों के आसपास सूजन दिखने पर अनन्नास का सेवन   बहुत लाभदायक होता है।

• त्वचा पर अनार के रस का लेप करने से त्वचा का सौंदर्य निखर जाता है और वह कोमल हो जाती है।

परहेज / सावधानियां :

 • अनन्नास भूखे पेट सेवन नहीं किया जाना चाहिए ।

 • अनन्नास का बाहरी छिलका और भीतरी कठोर हिस्से को निकालकर शेष भाग के टुकड़े कर उपयोग में लिए जाने चाहिए ।

• गर्भवती महिलाओं को कच्चा अनन्नास नहीं खाना चाहिए एवं पके हुए अनन्नास का भी अधिक उपयोग नहीं करना चाहिए ।

• अनन्नास का अधिक सेवन कफ बढाता है ।