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सफरनामा आइसक्रीम का | Journey of ice cream

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आइसक्रीम का पहला स्वरूप ice cream

आज से हजारों साल पहले ऊंचे बर्फीले पर्वतीय क्षेत्रों में किसी पात्र में दूध लेकर उसे बाहर  रख दिया जाता था, जो कि सवेरे तक जम जाता था और इसे मजे से खाते थे। यही था  आइसक्रीम का प्रांरभिक स्वरूप l  चीन में ईसा से कोई एक हजार वर्ष पूर्व लिखी गई कविताओं में आइसक्रीम का उल्लेख मिलता है।

नीरो ने बनवाई पहली आइसक्रीम ice cream

रोम के सम्राट नीरो ने पहली बार दूध, फलों के रस और शहद के साथ पर्वतों पर जमी बर्फ मिलाकर आइसक्रीम तैयार करवाई। यह स्वादिष्ट व्यंजन पूरे रोम में बहुत लोकप्रिय हुआ। नीरो ने  तो पहाड़ों से बर्फ लाने के काम में तीन हजार गुलामों को लगा दिया।

बर्फ थी अजूबा ice cream

आदमी ने तब तक कृत्रिम बर्फ जमाने की विधि नहीं खोजी थी। उस समय बर्फ मनुष्य के  लिए प्रकृति का सबसे बड़ा अजूबा था। बर्फ की सर्वाधिक उपयोगिता गर्मियों में होती है,  बादशाहों और अमीरों के लिए उसे दूर-दूर से ढोकर लाया जाता। बर्फ का अधिकांश हिस्सा रास्ते में ही पिघल जाता। इस प्रक्रिया  मे बर्फ इतनी महंगी हो जाती कि गरीबों के लिए तो उसे खरीदना ही मुश्किल था।

मार्कोपोलो ने खोजा आइसक्रीम का फार्मूला ice cream

आज से करीब सात सौ साल पूर्व तेरहवीं शताब्दी में विश्व विख्यात वेनिस यात्री मार्कोपोलो  चीन पहुंचा। वहां उसने सम्राट को आइसक्रीम का आनन्द लेते देखा। मार्कौपोलों को आइसक्रीम का  स्वाद बहुत भाया किन्तु वह चीन में आइसक्रीम बनाने का फार्मूला प्राप्त करने में सफल नहीं हो  सका क्योंकि सम्राट कुबलई खान ने आइसक्रीम के निर्माण की प्रकिया को गोपनीय रखे जाने की घोषणा कर रखी थी , इससे उसे काफी निराशा हुई।

मगर जब वह अपनी यात्रा के दौरान पूर्वी द्वीप समूह (ईस्ट इंडीज) पहुंचा तो उसे आखिर  आइसक्रीम बनाने का रहस्य हाथ लग ही गया। कैथे द्वीप में उसने लोगो को बर्फ़ पर नमक  छिड़ककर उस पर किसी पात्र को आइसक्रीम बनाने के लिए रखे गए घोल से आइसक्रीम जमाते देखा और मार्कोपोलो तत्काल इस रहस्य की तह में जा पहुंचा।

ईस्ट इंडीज़ में आइसक्रीम बनाने का फार्मूला चीन की तरह गोपनीय व सिर्फ राज परिवार के लिए नहीं था। इटली लौटकर मार्कोपोलो ने वहां के सम्राट को आइसक्रीम बनाकर खिलाई। सम्राट  ने इसे बेहद पसंद किया। उस वक्‍त भी आइसकीम केवल शाही परिवार के सदस्यों तक सीमित थी  किन्तु सन्‌ 1533 ई. में जब इटली की राजकुमारी कैथरीद द मेडिसी का विवाह फ़्रांस के राजकुमार फांसिस (प्रथम) के साथ हुआ, तो राजकुमारी फांस जाते  समय खानसामों का एक दल अपने साथ  वहां लेती गई। इस प्रकार आइसकीम का ‘फार्मूला’ बतौर दहेज इटली से फ़्रांस तक पहुंचा। फ़्रांस के राज-परिवार में इस नायाब चीज को इतना पसंद किया गया कि इसे फ़्रांस का ‘शाही तोहफा’ घोषित कर दिया गया।

आइसक्रीम  ‘दहेज’ में ice cream

फ़्रांस  की तरह इंग्लैण्ड को भी आइसक्रीम  ‘दहेज’ में मिली। सन्‌ 1630 ई. में फांस की राजकुमारी हेनरीटा मारिया का विवाह इंग्लैण्ड के राजकुमार चार्ल्स प्रथम के साथ हुआ और फांस के खानसामें जेराल्ड टिसां के द्वारा आइसक्रीम बनाने की विधि इंग्लैण्ड के राजमहलों में पहुंची। राजकुमार चार्ल्स इतने प्रस॒न्‍न हुए कि उन्होंने खानसामा जेराल्ड की बीस पौंड की वार्षिक पेंशन बांध दी, जो सन्‌  1949 में चार्ल्स के निधन होने तक जारी रही।

इसके बाद धीरे-धीरे आइसक्रीम का प्रचलन बढ़ने लगा किन्तु अब भी यह राजा रईसों व धनवानों के बूते की बात थी। आम जनता के लिए यह शौक एक महंगा सौदा था और आइसक्रीम  विलासिता की वस्तु समझी जाती थीं। सन्‌ 1660 में पहली बार प्रोकोपी कलटल्ली नामक व्यक्ति ने व्यावसायिक तौर पर आइसक्रीम का उत्पादन शुरू किया किन्तु अत्यधिक महंगा होने के कारण उसकी आइसक्रीम सफल नहीं हो सकी।

क्रत्रिम बर्फ़ की खोज के बाद सस्ती हुई आइसक्रीम ice cream

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आइसक्रीम के महंगा होने का सबसे प्रमुख कारण था – उस समय तक कृत्रिम बर्फ बनाने की विधि का आविष्कार नहीं हुआ था। आइसक्रीम के निर्माण के लिए दूरदराज के ठण्डे पर्वतीय क्षेत्रों से  बर्फ ढोकर लाई जाती थी। यह एक अत्यन्त श्रमसाध्य व खर्चीला काम था। बर्फ का  अधिकांश हिस्सा तो मार्ग में ही पिघल कर नष्ट हो जाता था। सन्‌ 1834 में जैकब पार्किन्स नामक प्रतिभाशाली वैज्ञानिक ने निरन्तर प्रयासों के बाद कृत्रिम रूप से बर्फ जमाने वाले यंत्र का आविष्कार किया। उसने अपनी इस अनूठे यंत्र को लंदन में पेटेंट करवाया।

पार्किन्स का यह यंत्र ईंथर के प्रयोग पर आधारित था,  जो पानी की सारी गर्मी को सोखकर  उसे इस हद तक ठण्डा कर देता कि वह बर्फ की शक्ल में बदल जाता। इस आविष्कार  ने  आइसक्रीम के निर्माण के क्षेत्र में एक जबरदस्त क्रांति ला दी। अब बर्फ और आइसक्रीम की कई फैक्ट्रियां खुलने लगी। 1851  में अमरीका के मेरिलैंड प्रान्त के बड़े शहर वाल्दिमोर में आइसक्रीम की एक विशाल फैक्ट्री स्थापित की गई , जो तत्कालीन विश्व की आइसक्रीम की सबसे बड़ी फैक्ट्री थी।

अब तक  आइसक्रीम के निर्माण की लागत काफी कम हो  चुकी थी क्योंकि इसके निर्माण की प्रक्रिया   सरल और कम खर्चीली हो गई थीं। इसी कारण आइसक्रीम की लोकप्रियता तेजी से बढ़ने लगी  और यह आम आदमी तक पहुंचने लगी। 1896 में इटली के एक नागरिक मास्चायोंनी ने आइसक्रीम कोन बनाया, जिसे आज हम ‘सोफटी’  के नाम से जानते है।

धीरे-धीरे आइसक्रीम के स्वाद और स्तर एवं गुणवत्ता में बहुत अधिक परिवर्तन हुए और  निरन्तर इस क्षैत्र में प्रयोग जारी रहे । नतीजतन आज अनेक  किस्मों की आइसक्रीम बाजार में  उपलब्ध है।

आइसक्रीम आम आदमी तक ice cream

आइसक्रीम के कारखाने अब गांव-गांव में खुल चुके है। भारत में पहले आइसक्रीम विदेशो से आयात की जाती थी किन्तु उन्‍नीसवीं शत्ताब्दी के अंतिम दशक में भारत में भी बर्फ जमाने के कारखाने खुलने शुरू हो गए। 1900 में फ्रिज के आविष्कार के बाद आइसकीम का मजा घर में  बनाकर भी लिया जाने लगा।

सिर्फ दूध से बनाए वनीला आइसक्रीम

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बाल कहानी – जादुई आइसक्रीम

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