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गुणकारी जामुन

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यह मौसम जामुनों का है। जामुन अकेला ऐसा फल है, जो देश के कोने-कोने में सुलभता से मिल जाता है। काले-काले, बड़े और रस-भरे मीठे जामुन देखकर भला किसका जी नहीं ललचा जाता? जामुन स्वादिष्ट और मनभावन होने के साथ-साथ सेहत के लिए बहुत फायदेमंद फल भी है। अनेक छोटे-बड़े रोगों में इसका उपयोग औषधि के रूप में किया जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार भी जामुन एक गुणकारी फल है। इसके अम्ल से वायु का नाश होता है तथा कषाय रस से कफ का नाश होता है। यह स्वाद में मीठी, कसैली, गुण में शीतल, रूचिकर, पाचक, पिŸा कफ तथा रक्त विकार नाशक है।
जामुन में सेहत भरी पड़ी है। इसमें निम्नलिखित पौष्टिक तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं –
जल 78.2 प्रतिशत
कार्बोज 19.7 प्रतिश प्रोटीन 0.7 प्रतिशत
लवण 0.4 प्रतिशत
वसा 0.1 प्रतिशत
कैल्शियम 0.2 प्रतिशत
फास्फोरस 0.7 प्रतिशत
रेशा 0.9 प्रतिशत
जामुन में इतने पौष्टिक तत्वों की भरपूर उपस्थिति से साफ जाहिर है कि जामुन का फल सेहत के लिए कितना फायदेमंद है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि जामुन का फल ही नहीं, जामुन के वृक्ष का प्रत्येक भाग रोगनाशक शक्ति रखता है। जामुन के वृक्ष की पŸिायां, छाल, जड़ आदि में औषधीय गुण विद्यमान होते हैं। जामुन की गुठली तक कई रोगों में उपचार के लिए दवा का काम दे सकती है।
जामुन के मौसम में जामुन का नियमित सेवन कर मधुमेह, वीर्य-दोष, खांसी, रक्त-दोष, वमन, पीलिया, कब्ज, पेट-दर्द आदि रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है। जामुन कफ, पिŸा, तिल्ली, वायु-गोला और अतिसार दोनों के दमन में भी उपयोगी है। दांत एवं मसूढ़ों के रोगों में भी यह लाभकारी है।
जामुन खाने से पहले भली प्रकार धो लिया जाना चाहिए ताकि उस पर लगे हानिकारक तत्व पेट में न जा सकें। यथा संभव जामुन का सेवन भोजन के पश्चात् ही किया जाना चाहिए। ऐसी लोक मान्यता है कि जामुन खाने के बाद उस पर दूध पीना सेहत के लिए हानिकारक है। इसलिए आप जामुन खाने के बाद एक घंटे तक दूध का सेवन न करें तो बेहतर रहेगा।
जामुन का सिरका भी गुणकारी तथा स्वादिष्ट होता है। इसे घर पर ही आसानी से तैयार किया जा सकता है। सिरका बनाने के वास्ते आप पके हुए तथा बिना दाग के बड़े-बड़े जामुन चुन लें। इन जामुनों को धोकर एक साफ मिट्टी के बर्तन में नमक मिलाकर रख दें। बर्तन का मुंह एक साफ धुले हुए कपड़े से बांधकर इस बर्तन को धूप में रख दीजिएगा।
एक सप्ताह तक धूप में रखने के पश्चात इन जामुनों का रस साफ कपड़े से छानकर शीशे की बोतलों में भरकर ढक्कन लगाकर रख दें। जामुन का सिरका तैयार है। इसे जरूरत के अनुसार उपयोग में लाएं। इस सिरके का उपयोग आप सलाद में आसानी से कर सकते हैं। इसके अलावा मूली, गाजर, शलजम, प्याज, मिर्च आदि सब्जियों के अचार भी आप इस जामुन के सिरके में डाल सकते हैं।
आइए, जामुन, उसके वृक्ष की पत्तियों, गुठली आदि के औषधिय गुण जानेः-
पेचिश के रोगी को जामुन के रस में चीनी मिलाकर पिलाइए।
यदि आपको कब्ज की शिकायत रहती है अथवा पेट संबंधी अन्य कोई शिकायत रहती है तो जामुन का सिरका और पानी बराबर-बराबर मात्रा में पिएं। सप्ताह-भर में आपको फायदा महसूस करेंगे।
मुंह में छाले हो जाने पर जामुन का रस छालों पर लगाएं। शीघ्र ही छाले मिट जाएंगे।
कै अधिक होने पर जामुन के रस का सेवन करें तथा जामुन खाएं। आश्चर्यजनक रूप से लाभ होगा।
जामुन की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से पुराने दस्त बंद हो जाते हैं। इस काढ़े के सेवन से मसूढ़ों की सूजन भी कम हो जाती है।
यदि आप मुंहासों से परेशान हैं तो जामुन की गुठलियों को सुखाकर महीन पीसकर एक शीशी में रख लीजिएगा। सप्ताह-भर तक रात को सोते समय एक चुटकी चूर्ण गाय का दूध मिलाकर मुंहासों पर लगाएं। सवेरे चेहरा भली प्रकार से ठंडे पानी से धो डालें। मुहासे मिट जाएंगे।
जामुन के पत्तियों का रस मिलाकर कुछ दिनों तक तिल्ली के रोगी को नियमित पिलाएं। रोग सहजता से दूर हो जाएगा।
जामुन की छाल को दूध में उबाल कर सेवन करने से संग्रहणी रोग दूर हो जाता है।
यदि आपकी पाचन-शक्ति बिगड़ गई है तथा आपको ठीक से भूख नहीं लगती तो कुछ दिनों तक नियमित भूखे पेट जामुन खाएं। भूख खुल जाएगी।
जामुन के पत्तियों की भस्म को मंजन के समान प्रयोग करने से दांत और मसूढ़े मजबूत होते हैं।
तंग जूता पहनने की वजह पैरों पर पड़े छालों पर जामुन की गुठली घिसकर लगाने से वहां ठंडक पड़ जाती है तथा छाले ठीक हो जाते हैं।
जामुन की गुठली सुखाकर उसका चूर्ण बना लें तथा दूध के साथ इस चूर्ण को मिलाकर फोड़े-फुंसियों पर लगाएं।
जामुन के की पत्तियों भस्म को मंजन के समान प्रयोग करने से दांत और मसूढे मजबूत होते हैं।
जामुन के इतने औषधीय गुणों को देखते हुए आज से ही जामुन का नियमित सेवन प्रारंभ कर दें।