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जब अदालत ने छक्के मारने पर कानूनी बंदिश लगाई

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………. और गेंदबाज की इस कमजोर गेंद को बल्लेबाज ने मिड-विकेट की तरफ उछाल दिया है और यह शानदार छकक्‍्का!

‘क्रिकेट मैच की कमेन्टरी सुनते समय ऐसे वाक्य अक्सर सुनाई दे जाते हैं।
किसी भी किकेट मैच में छक्का लगना एक रोमांचपूर्ण घटना हुआ करती है और
उसके लिए बल्लेबाज को शाबासी दी जाती है। प्रायः हर खिलाड़ी की यह अदम्य
इच्छा होती है कि वह कोई ऐसा जोरदार शॉट लगाऐ कि गेंद 6 रनों के लिए मैदान
से बाहर चली जाये। सिकसर लगाना हर बल्लेबाज की दिली तमन्ना भी है और
अधिकार भी ।

आप जरा उस स्थिति की कल्पना कीजिए जब अदालत स्थगन आदेश जारी
कर किकेट मैच में छक्का लगाने पर पाबन्दी आयद कर दें। है न हैरानी वाली वाली
बात? लेकिन लन्‍्दन के टेंट ब्रिज किकेट ग्राउंड में छक्‍का लगाने पर वहां की
अदालत द्वारा पाबन्दी लगा दी गई और इस मैदान पर जो भी खिलाड़ी छक्का

लगाने का दुः:साहस करता, वह मुश्किल में पड़ जाता।दरअसल इस किकेट-्राउंड के पास ही एक प्राइवेट स्कूल है, जिसमें लगभग
400 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। स्कूल मैदान के पास होने से कई बार गेंद
सीमा-रेखा को पार कर स्कूल की बाउंड्री में चली जाती, जिससे कई दफा स्कूल की
इमारत के शीशे इत्यादि टूट गये और एक-दो बार किसी छात्र को भी गेंद की चोट
लग गई। इन हालात में स्कूल के मालिक श्री विलियम फी टांक ने अदालत से
दरख्वास्त की कि वह ऐसी निषेधाज्ञा जारी करे कि गेंद मैदान की सीमा रेखा से
बाहर नहीं गिरे। इस पर न्यायालय ने नौटिंघमशायर काउटी किकेट क्लब को नोटिस ारी करते हुए स्पष्टीकरण मांगा।

अदालत द्वारा दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। स्कूल मालिक के वकील ने
अपना पक्ष प्रस्तुत करते हुए कहा कि मेरे पक्षकार किसी की खुशी में व्यवधान उत्पन्न
करना नहीं चाहते किन्तु 400 से भी अधिक छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए