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जाने पुदीने के औषधिय गुण

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सब्जी मण्डी में आसानी से उपलब्ध हो जाने वाला पुदीना बेहद उपयोगी, सुगंधित और स्वास्थ्यप्रद होता है। पुदीने की हरी-हरी छोटी पत्तियों गर्मियों के तपते मौसम में शीतलता, ताजगी और स्फूर्ति प्रदान करती हैं। पुदीने को अंग्रेजी में ‘मिंट‘ कहा जाता है। वैसे इसका वानस्पतिक नाम ‘ मेन्था स्पाईकेटा ‘ है। पुदीना उदर-विकारों में औषधि का काम करता है। खट्टी डकारों, कफ, पेट-दर्द, उल्टियों, हैजा, पेचिश और अपचन के रोगों में पुदीना एक अचूक औषधि है। पुदीने का अर्क जिगर और गुर्दे को शक्ति प्रदान करता है। इसका उपयोग रायते, आम के पने और पकौड़ियों मे भी किया जाता है। पुदीने की चटनी का तो कहना ही क्या? स्वाद में यह चटनी बड़ी लाजवाब होती है। पुदीने को सुखाकर आसानी से वर्ष-भर उपयोग में लिया जाता है। पुदीने के गुणों से युक्त छोटी-छोटी गोलियां भी आज कल ‘पुदीन हरा‘ नाम से दुकानों और मेडिकल स्टोर्स पर मिलने लगी हैं। एक छोटे से गमले या फूलदान में बालू व मिट्टी मिलाकर भर लें। थोड़ा सा पानी डालकर उसमें आप पुदीना उगा सकते हैं। रसाईघर की खिड़की में रखने से यह खूबसूरत भी लगेगा और रसोईघर में दिन भर ताजा पुदीने की गंध आपको महकाती रहेगी। पुदीना विविध औषधिय गुणों से सम्पन्न है। आइये, इसके कुछ औषधीय उपयोग जाने:
 यदि उल्टी, दस्त या हैजे की शिकायत है तो रोगी को आधा कप पुदीने का रस हर दो घंटे में पिलाने से राहत मिलेगी।
 सुखा पुदीना और शक्कर बराबर-बराबर मात्रा में मिलाकर दो चम्मच की फंकी लेने से पेट-दर्द में शीघ्र राहत मिलती है।
 हरे पुदीने की चटनी ( मसाला रहित ) पीसकर रात्रि को शयन से पूर्व चेहरे पर लेप कर लें और सवरे शीतल जल से चेहरा धो डालें। इससे चेहरे के मुंहासे और फुंसियां मिट जायेंगी और चेहरा कान्तिवान हो जायेगा। यह प्रयोग चेहरे की त्वचा की अनावश्यक गर्मी भी शांत कर देता है।
 हिचकी यदि बंद होने का नाम नहीं ले रही है तो पुदीने की पत्तियां चूसें। पुदीने के साथ शक्कर भी चबा सकते हैं।
 नाक, कान आदि पर घाव हो गये हों तो पुदीने का अर्क उन घावों में पड़े कीड़े को नष्ट कर देता है तथा घाव के जल्दी भरने में सहायक होता है।
 पित्तियाँ -विकारों में दस ग्राम हरे पुदीने में बीस ग्राम गुड़ मिलाकर पानी में उबाल लें और इसे रोगी को सेवन करायें। उसे निश्चित रूप से लाभ होगा।
 फ्रिज में यदि एक गुच्छा पुदीना रख दें, तो फ्रिज के भीतर की हवा में कोई खराब दुर्गंध नहीं पनपेगी।
 फुलदान में फूलों के साथ पुदीने की कुछ ताजा पत्तियां भी सजा दें। इससे फूलदान की खूबसूरती मे तो अभिवृद्धि होगी ही, साथ ही ड्राइंग-रूम की हवा में ताजगी और सुगंध घुली रहेगी।
 खांसी, जुकाम और हल्का बुखार होने की स्थिति में पांच काली मिर्च, पुदीने की पत्तियां और नमक डालकर चाय की भांति उबाल कर दिन में तीन दफा पीने से काफी लाभ होगा।
 पित्ती हो जाने पर बीस ग्राम गुड़ में दस ग्राम पुदीना मिलाकर एक चैथाई लीटर के करीब पानी में उबालकर छानकर रोगी को पिलाने से बार-बार होने वाली पित्तियों ठीक हो जाती है।
 कई बार चोट लग जाने पर चोट के स्थान पर खून जमा हो जाता है। पुदीने का अर्क पीने से यह खून पिघल जाता है।
 चैथाई कप पुदीने का रस, आधा कप पानी में आधे नीबू का रस निचोड़कर थोड़ा हिलाकर पी लेने से गैस के कारण हो रहा पेट-दर्द तत्काल ठीक हो जाता है।
 हरा पुदीना पीसकर यह लेप चेहरे पर आधा घंटा लगा रहने दें। इससे त्वचा की सारी गर्मी निकल जाती है।
 बिच्छू के काटने पर पुदीने का लेप करें एवं पानी में पीसकर पीड़ित व्यक्ति को पिलायें।