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बुद्धिमानी

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बात उस समय की है, जब आस्ट्रिया के साथ प्रसिया और इटली का युद्ध
जारी था। उस जमाने में सैनिक अक्सर मार्म में आने वाले ग्रामों में लूटपाट करते हुए
युद्ध किया करते थे। एक गांव के निवासियों को मालूम हुआ कि प्रसियन सेना के
सेनापति और पूरी सेना गांव की तरफ आ रहे हैं। यह सुन गांव के लोग भयभीत हो
गये। उस गांव एक के बालक को जब यह पता चला तो वह कतई नहीं घबराया।
वह चुपचाप गांव के उस स्थान पर पहुंचा, जहां से गांव में प्रवेश किया जा सकता
था। इस बालक का नाम था – ‘मैसरिक।’ मैसरिक ने वहां जो सबसे पहला घर
पड़ता था, उसकी खाली दीवार पर चूने से बड़े-बड़े अक्षरों में लिख दिया — इस
गांव में भयंकर महामारी फैली हुई है।’

प्रसियन सिपाही जब वहां पहुंचे तो उन्होंने दूर से ही दीवार पर लिखा हुआ देखा। यह देख सिपाहियों ने महामारी के भय से गांव में प्रवेश करने से इंकार कर दिया। सेना गांव के बाहर-बाहर से ही निकल गई, गांववासियों ने मैसरिक की यह बुद्धिमानी की बात सुनी तो उन्होंने उसकी काफी तारीफ की। यह चतुर बालक बड़ा होकर चेकोस्लावाकिया का प्रथम राष्ट्रपति बना।