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डायरी-लेखन को आदत बनाइए | Information on diary writing in Hindi

व्यस्तता से भरी आधुनिक जीवन – शैली के कारण आज ‘डायरी-लेखन’ जैसी
विधा हमारे दैनिक जीवन से लुप्त प्रायः हो चली है। अब बहुत कम लोगों में प्रतिदिन
नियमित रूप से डायरी लिखने की आदत शेष बची है। आइये हम आपको डायरी लेखन के बारे जानकारी देते है !

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Information on diary writing in Hindi

लुप्त होती डायरी लेखन की परम्परा

कभी डायरी लिखना एक रचनात्मक व भावनात्मक शौक हुआ करता था। अतीत होते वर्तमान को अपनी स्मृतियों में कैद करने का एक सशक्त माध्यम थी – डायरी | डायरी पुरानी यादों को
जीवित रखने के अतिरिक्त अनुभवों का एक अनूठा खजाना हुआ करती थी।

डायरी लेखन का इतिहास

यूं डायरी लेखन की परंपरा बहुत पुरानी है। डायरी का अपना एक इतिहास
है। ‘डायरी’ शब्द की उत्पत्ति लेटिन भाषा के शब्द ‘डाइस’ से हुई है, जिसका अर्थ
होता है ‘दिन-भर की घटनाओं का लेखा-जोखा’।| ऐसा माना जाता है कि डायरी
लेखन का शौक दुनिया को रोमन साम्राज्य की देन है। छठी शताब्दी में रोमन सम्राट
किसी जटिल मुद्दे का फैसला करते समय सारे तथ्य एक डायरी में अंकित कर
लिया करते थे ताकि भविष्य में उन्हें नीति-निर्धारक तत्वों के रूप में इस्तेमाल कर
सकें। रोमन सम्राट सस्टिनियम द्वारां अपने पूर्ववर्तियों द्वारा डायरी में लिपिबद्ध तथ्यों
का संपादन कर उससे रोमन-साम्राज्य के लिए विधि-संहिता तैयार की गई |

मुगल-काल के दौरान लिखी गई पुस्तकें ‘बाबरनामा’, ‘आईने अकबरी’, ‘तौजके
जहांगीर’ आदि आत्मकथा की शैली में लिखी हुई डायरियां ही थीं। इनमें तात्कालीन
साम्राज्य, समाज, धर्म तथा परंपरा के संबध में सिलसिलेवार जानकारी मिलती है।

इंग्लैण्ड में सत्रहवीं सदी में डायरी लिखने का शौक जोरों पर था। जोन
एवलिन, सैमुअल पेप्सी, जोनाथन स्विफ्ट आदि की डायरीयां उस युग की चर्चित
डायरियां थीं। शैली और बायरन जैसे अंग्रेज साहित्यकारों की डायरियां
विश्व-साहित्य की अनमोल धरोहर है।

विश्व-विख्यात साहित्यकार टाल्सटाय तथा उनकी पत्नी की डायरियां तो पूरी
दुनिया में विवाद का विषय रही हैं। टाल्सटाय की पत्नी का आरोप था कि टाल्सटाय
अपनी डायरी में अपनी पत्नी को एक खलनायिका के रूप में पेश करते थे। हिटलर
और मुसोलिनी जैसे तानाशाह को भी डायरी-लेखन का शौक था। एक दशक पूर्व
हिटलर की डायरियों को लेकर बहुत हंगामा मचा था। बाद में, वे डायरियां नकली
साबित हुईं।

भारत में डायरी-लेखन का शौक पाश्चात्य जगत के माध्यम से आया। भारतीय
स्वाधीनता संग्राम के सभी प्रमुख नेता नियमित रूप से अपनी दैनिक गतिविधियों को
डायरी में लिखते थे। महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, विनोबा भावे, महादेव भाई
देसाई, मौलाना आजाद, चकवर्ती राज गोपालाचारी, जयप्रकाश नारायण, सरदार पटेल
आदि आजादी के महानायक तात्कालीन समय को अपनी डायरी के पन्‍नों पर अंकित
करने के आदी थे। इन डायरियों से हमें अपनी आजादी के इतिहास को समझने में
मदद मिलती है। पं० जवाहरलाल नेहरू और मौलाना अबुल कलाम आजाद की
डायरियां तो समकालीन इतिहास का एक जीवंत दस्तावेज हैं। इन्होंने अपनी डायरियों
के माध्यम से इतिहास की पुर्नरचना की।

महात्मा गाँधी नियमित डायरी लिखते थे

महात्मा गांधी, जो स्वयं नियमित रूप से डायरी लिखा करते थे, ने
डायरी-लेखन के बारे में विचार प्रकट करते हुए कहा था – डायरी मेरे लिए एक
बहुत मूल्यवान वस्तु है। डायरी में केवल सच्चाई का वर्णन होना चाहिए अन्यथा वह
एक खोटे सिक्‍के की भांति हो जाती है। डायरी बिना व्यवधान के प्रतिदिन लिखी
जानी चाहिए। इसके फायदे शायद आपको तुरन्त महसूस न हों, मगर डायरी हमें
हमारे अनेक गुनाहों से बचाती है। वह हमारे गुनाहों की गवाह होती है। अपनी गलती
और दोषों का उल्लेख आप अपनी डायरी में अवश्य करें किंतु दूसरों की गलतियां
दर्ज न करें|”

खुद गांधीजी की डायरी उनके व्यक्तिगत जीवन की सच्चाईयों का दस्तावेज
है। अपने खुद के बारे में शायद ही कोई व्यक्ति इतनी निर्मम सच्चाई के साथ लिख
पाता। गांधीजी की डायरियां उनके व्यक्तित्व का आईना है तथा उनकी डायरियों को
५ डायरी-साहित्य में बहुत उच्च कोटि का स्थान अर्जित है।

नियनित रूप से लिखें डायरी

डायरी लेखन का जहां सच्चा होना जरूरी है, वहीं इसका नियमित होना भी
आवश्यक है। डायरी-लेखन से व्यक्ति में वैचारिक परिपक्वता बढ़ती है। अपने विगत
का अध्ययन कर व्यक्ति अपनी भूलों से सबक लेता है। डायरी में उल्लेखित
असफलताएं, निराशाएं, और दुःख हमारा भविष्य में मार्ग-दर्शन करने में सहायक सिद्ध
होते हैं। जीवन में कमबद्धता डायरी-लेखन की ही देन है।

डायरी लेखन आपको बनाएगी एक बेहतर लेखक

डायरी-लेखन वस्तुत: लेखन की ही एक विधा है। निरंतर लिखने से भाषा
प्रवाहमान होती है और विचारों में एक स्पष्टता आने लगती है। ऐसे कई लेखकों के
उदाहरण सामने हैं, जिन्होंने अपने लेखन की शुरूआत डायरी लिखने से की और
कालांतर में लेखन के क्षेत्र में शिखर तक पहुंचे।

यह सच है कि डायरी लिखना एक नितांत वैयक्तिक विधा है। अतः स्वाभाविक
रूप से इसमें कथ्य के स्थान पर भावनाओं की प्रमुखता रहती है। अपने आस-पास
के परिवेश, घटनाओं और पात्रों का समावेश डायरी में होना अनिवार्य है। यथा-संभव
किसी व्यक्ति के प्रति अपनी व्यक्तिगत राय की अभिव्यक्ति डायरी में खुले शब्दों में
नहीं की जानी चाहिए। यदि यह उल्लेख आवश्यक ही हो तो सांकेतिक भाषा का
इस्तेमाल किया जा सकता है।

डायरी में रोजमर्रा की जानकारी डायरी के लिए शिष्टाचार

डायरी में रोजमर्रा के लिए उपयोगी जानकारी का उल्लेख कर लिया जाना
लाभदायक रहता है। यह जानकारी अक्सर बड़े काम की साबित होती है। अतः आप
अपनी डायरी का इस्तेमाल अपनी याद्दाश्त को ताजा करने के लिए भी करें। किसी
के जन्मदिन या महत्वपूर्ण तिथियों या कार्यों को आप अपनी डायरी में नोट करके
भूलने की गलती से बच सकते हैं।

खट्टी मीठी यादों का खजाना डायरी

डायरी के भी कुछ अपने शिष्टाचार होते हैं। किसी भी व्यक्ति की डायरी कभी भी चोरी-छिपे पढ़ना सीधा-सीधा उसके व्यक्तिगत-जीवन में ताकझांक करने जैसा है। आजकल डायरी-लेखन की परंपरा लुप्त होते जाने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि दूसरे की डायरी पढ़ लेने के बाद कई दफा व्यर्थ के विवाद खड़े हो जाते हैं। डायरी आपकी अपनी खट्टी-मिठ्ठी यादों का खजाना है। आपके अतीत केअनुभवों का सार है। व्यस्तम जीवन से कुछ पल चुरा कर डायरी-लेखन को आदत बनाइए । आप देखेंगे कि यह मनोरंजन का ऐसा स्तरीय साधन सिद्ध होगा, जो आपके अनुभवों और वैचारिक स्तर को भी समृद्धता प्रदान करेगा।

डायरी लेखन: कुछ मजेदार तथ्य

  • प्राचीन समय में राजा महाराजाओं के समय में रोजनामचा बनाया जाता था, जो प्रतिदिन के क्रिया-कलाप और घटनाओं का ब्यौरा देता था।
  • व्यापारियों द्वारा हिसाब किताब और लेन-देन को सुरक्षित रखने हेतु वही खातेखाते के उपयोग को भी डायरी लेखन माना जाता है।
  • महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, श्यामसुंदर दास, वियोगी हरिवंश राय बच्चन, विनोद शंकर व्यास देवेंद्र सत्यार्थी, मोहन राकेश आदि की लिखी डायरियां पुस्तक के रूप में प्रकाशित हो चुकी हैं।
  • टॉलस्टॉय की डायरियां काफी चर्चा में रहीं। उनकी पत्नी का आरोप था कि टालस्टाय उनकी डायरी में अपनी पत्नी को खलनायिका के तौर पर चित्रित करते थे।
  • हिटलर और मुसोलिनी जैसे तानाशाह की डायरी लिखा करते थे!
  • डायरी लेखन विश्व को रोमन साम्राज्य की देन है, छठी शताब्दी में रोमन सम्राट किसी पेचीदा मामले का फैसला करते समय सारे तथ्य एक डायरी में अंकित कर लिया करते थे।