pexels cottonbro 5028445 scaled

सफरनामा सम्मोहन का

pexels cottonbro 5028445

राजस्थान विश्वविद्यालय के डाक्टर सेन स्टेज पर प्रदर्शन कर रहे थे, उन्होंने दर्शको में बैठे एक युवक को मंच पर बुलाया और कहा कि जब वह उसे रूमाल दिखायेगें तो उसे जोरदार प्यास का अनुभव होगा। रूमाल दिखाते हुए डाक्टर ने पूछा – ‘‘ क्या तुम्हें प्यास लगी है? ‘‘ युवक ने इंकार किया। दूसरी बार जब डाक्टर सेन ने अपना प्रश्न दोहराया, तब भी युवक ने इंकार करते हुए सिर हिला दिया। अंत में, डाक्टर सेन ने तीसरी बार उसे रूमाल दिखाते हुए प्यास के सम्बन्ध में पूछा तो उपस्थित जन-समुदाय ने आश्चर्य से साथ देखा कि वह युवक अपने होठों पर जीभ फेरता हुआ जोर-जोर से ‘‘ पानी…..पानी ‘‘ चिल्ला रहा था। डाक्टर सेन ने तुरन्त पानी का जग मंगाया और वह युवक पानी के जग पर इस तरह टूट पड़ा, जैसे वह कई दिनों से पानी के लिए तरस रहा हो। देखते-देखते उसने सारा जग पानी पी लिया।
आपको यह सारा घटनाक्रम जादुई लग सकता है, लेकिन यह कोई जादू-टोना नहीं होकर सम्मोहन की शक्ति का एक उदाहरण था। वास्तव में सम्मोहन को लेकर जन सामान्य में अनेको भ्रान्तियां प्रचलित हैं और इसे जादुगरों, मदारियों और बाजीगरों द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली एक विद्या का अंग समझा जाता है।
वस्तुतः सम्मोहन ‘ हिप्नाटिज्म ‘, ‘ वशीकरण ‘ या ‘ मेस्मेरिज्म ‘ आदि नामों से जानी वाली यह विद्या मानव-मन की जाग्रत-अवस्था की एक ऐसी स्थिति है, जिसके दौरान तन-मन पूर्ण शांति, हल्कापन तथा विश्राम की अनुभूति करते हैं। प्रसिद्ध सम्मोहन विशेषज्ञ डाक्टर कालीचरण के अनुसार सम्मोहन की स्थिति में पहुंचकर मन सम्मोहनकर्ता अथवा स्वयं द्वारा दिए गए आदेशों और निर्देशों का पालन अधिकाधिक मात्रा में करने लगता है। इस अवस्था में मनुष्य की कल्पना शक्ति अपने चरम बिन्दु पर पहुंच जाती है।
‘ हिप्नाटिज्म ‘ शब्द की उत्पŸिा यूनानी भाषा के ‘ हिप्नाज ‘ शब्द से हुई है। वैसे सम्मोहन की विद्या का इतिहास बहुत पुराना हैं। भारतीय संस्कृति के प्राचीन स्वरूप में इस विद्या के अस्तित्व के प्रमाण मिलते हैं। ‘ पंतजलि योग देर्शन ‘ प्रथम सूत्र में कहा गया है -‘‘ योगोचित वृŸिानिरोधः ‘‘ अर्थात मन की विकृतियों का निरोध ही योग है। सम्मोहन में भी मन की स्थिरता को शक्ति का मूल माना जाता है। मन की एकाग्रता ही सम्मोहन की शक्ति है।
आधुनिक सम्मोहन-पद्धति की शुरूआत आज से करीब 250 वर्ष पूर्व हुई। सन् 1734 में आस्ट्रिया के विएना नगर में जन्में डाक्टर एण्टन मेस्मर इसके जनक माने जाते हैं। उनके नाम से ही इस विद्या को ‘ मेस्मोरिज्म ‘ के नाम से भी जाना जाता है। मेस्मर ने सम्मोहन का उपयोग अपने मरीजों की चिकित्सा हेतु किया। सम्मोहित रोगी सम्मोहन की अवस्था में मेस्मर के निर्देशों का पालन करते हुए रोग-मुक्त होता जाता। सन् 1780 में डाक्टर मेस्मर फ्रान्स की राजधानी पेरिस चले गए, जहाॅं उनकी सम्मोहन चिकित्सा पद्धति को व्यापक लोकप्रियता मिली। डा0 मेस्मर ने इस विद्या के प्रचार प्रसार में बड़ा योगदान दिया किन्तु अंतिम समय में उनके साथ बड़ा दुव्र्यवहार किया गया। ‘ सम्मोहन ‘ को मिथ्या और जादूगरी बताते हुए उन्हें देश निकाला दे दिया गया। मेस्मर की सन् 1815 में मृत्यु हो गयी। उसके पश्चात् उनके शिष्य डाक्टर माक्र्विस ने उनके अधूरे कार्य को पूरा करने का संकल्प किया। माक्र्विस ने सम्मोहन की नई शैलियां ईजाद की तथा उसे चिकित्सा के क्षेत्र में अधिक उपयोगी बनाया। इसके अतिरिक्त इंग्लैण्ड के डाक्टर जेम्स ब्रेड ( 1795 – 1860 ) ने भी इस क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। ‘ हिप्नोटिज्म ‘ शब्द का प्रचलन भी डाक्टर ब्रेड ने शुरू किया। नैन्सी स्कूल आॅफ हिप्नाटिज्म में कार्यरत डाक्टर लीबाल्ट तथा डाक्टर बर्नहाइम के शिष्य डाक्टर सिगमंड फ्रायड ने सम्मोहन के बारे में अत्यन्त व्यापक अध्ययन तथा शोध-कार्य किया तथा अनेक नवीन सिद्धान्त प्रतिपादित किए। डाक्टर फ्रायड ने अवचेतन मन के रहस्यों का पता लगाने में सम्मोहन का प्रयोग किया।
सम्मोहन विद्या के विकास में योगदान देने वाले अन्य व्यक्तियों में ‘ सेल्पेटियर स्कूल आॅफ हिप्नोटिज्म ‘ के संस्थापक डाक्टर चारकाट तथा स्पायरल के आविष्कर्ता डाक्टर पावर्स का नाम उल्लेखनीय है।
प्रारम्भ में लोगों द्वारा इस विद्या का मजाक उड़ाया गया। लेकिन धीरे-धीरे इसके सफल चिकित्सकीय उपयोग को देखते हुए इसे स्वीकार किया जाने लगा। उस युग में क्लोरोफार्म का आविष्कार नहीं हुआ था। अतः सम्मोहित अवस्था में ही आपरेशन किए जाते थे। कलकŸाा के प्रेजीडेन्सी सर्जन डाक्टर एसडेल ने सम्मोहन चिकित्सा के जरिए लोगों को मूर्छित कर 261 आपरेशन किए। प्रथम विश्व-युद्ध के दौरान एक रूसी डाक्टर पोडियापीलेस्की ने चालीस आपरेशन सम्मोहन द्वारा सुन्न करके किए।
अब तो सम्मोहन चिकित्सा पद्धति को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा भी मान्यता प्राप्त हो चुकी है। अमेरिका, इग्लैण्ड, जर्मनी तथा कई एशियाई देशो में मेडिकल कालेजों में सम्मोहन विद्या को एक सामान्य विषय के रूप में पाठ्यक्रम मे सम्मिलित कर लिया गया हैं।
सम्मोहन शुद्ध वैज्ञानिक आधार वाली पद्धति है यह एक विशेष प्रकार की मनोवैज्ञानिक अवस्था है, जिसके कुछ शारीरिक क्रियात्मक पहलू भी होते हैं। मानव-मन के दो स्तर माने जाते हैं- चेतन मन तथा अवचेतन मन, अवचेतन अथवा अजाग्रत मन पूर्णतया तंत्रिका तंत्र पर निर्भर करता है। सम्मोहन क्रिया में अवचेतन मन को स्वयंवर्ती क्रियाओं द्वारा नियन्त्रित किया जाता है तथा चेतन मन को निष्क्रिय बना कर अवचेतन मन वाले हिस्से को क्रियाशील बनाया जाता है। रूसी मनोवैज्ञानिक पावलोव के अनुसार, सम्मोहन की स्थिति एक प्रकार की निर्देशित निद्रा है। सम्मोहनकर्ता के शब्द और निर्देश सम्मोहित व्यक्ति की मस्तिष्क कोशिकाओं को निद्रा और जाग्रति के बीच की स्थिति में ले आते हैं। उस समय मस्तिष्क का केवल वही हिस्सा जागृत रहता है, जो सम्मोहनकर्ता के निर्देश ग्रहण करता है। इस प्रकार जहां जागृत अवस्था में कोई कार्य करने से पूर्व आदमी तर्क वितर्क करता है, वहीं सम्मोहन की अवस्था में वह बिना सोचे समझें सम्मोहनकर्ता के निर्देशो का पालन करने लगता है।
सम्मोहन की अवस्था में सम्मोहित व्यक्ति को भरी गर्मी में ठंड के कारण कंपकपी महसूस कराई जा सकती है और जाड़ों में पसीने-पसीने कर सकते है। सम्मोहनकर्ता के निर्देश मनोवैज्ञानिक स्तर पर उसे अंधा, बहरा, गूंगा आदि किया जा सकता है। लेकिन सम्मोहित अवस्था में ही कई बार व्यक्ति पूरी तरह अपने सम्मोहनकर्ता के अधीन नहीं होता। मन में किसी कार्य को अत्याधिक अनैतिक मानने पर वह सम्मोहनकर्ता के निर्देशों की अवहेलना कर सकता है। एक अत्यन्त सुन्दर युवती को सम्मोहित किया गया। वह सम्मोहनकर्ता के निर्देशों का मानने लगी, किन्तु जब सम्मोहनकर्ता ने उसे नग्न होने का निर्देश दिया तो तुरन्त उसकी चेतना लौट आई।
सम्मोहन-शक्ति प्राप्त करने के लिए व्यापक और गहन अभ्यास की आवश्यकता होती है। शनैः-शनैः पर्याप्त प्रेरक शक्ति प्राप्त करने के पश्चात् वह किसी अन्य व्यक्ति को मानसिक रूप से अपने निर्देश मानने को विवश करने की दक्षता हासिल कर लेता है। सम्मोहन शक्ति का विकास करने के लिए आत्म विश्वास, दृढ़ संकल्प, परमार्थ बुद्धि, स्वस्थ शरीर, सात्विक आहार-विहार, शांति चिŸा और शुद्ध आचार विचार जैसे गुण होना आवश्यक हैं। सम्मोहित करने के लिए कई सिद्धान्त प्रचलित है। हाथों से पास करना, आंखों से प्रेरित करना, क्रिस्टल बाॅल या स्पायरल, ईगल आदि आदि साधन सम्मोहन के लिए प्रयुक्त किए जाते हैं।
आजकल कई मानसिक रोगों जैसे अत्याधिक चिंता, मानसिक तनाव, अनिद्रा, हकलाहट, अकेलापन, भय, आत्म-विश्वास का अभाव आदि का सम्मोहन-चिकित्सा के जरिए उपचार किया जाता हैं। इसके अलावा हिस्टीरिया, हीन-भावना, पौरूषहीनता का भ्रम, घूम्रपान और शराब की लत आदि व्याधियों का इलाज भी सम्मोहन चिकित्सा पद्धति द्वारा संभव है।
आमतौर पर लोगों में सम्मोहन को लेकर कई प्रकार की गलतफहमियां और भ्रान्तियाॅं फैली हुई है। इसे माया-जाल, जादू, औघड़-विद्या या रहस्यमयी शक्ति माना जाता है, जबकि यह एक विशुद्ध वैज्ञानिक-विद्या है। यह धारणा भी बिल्कुल आधारहीन है कि कमजोर मनोबल वाले व्यक्ति शीघ्र और आसानी से सम्मोहित हो जाते है तथा दृढ़ इच्छा शक्ति वाले व्यक्ति को सम्मोहित करना कठिन होता है। सम्मोहन से न तो कोई शारीरिक क्षति होती है और न ही इसके अन्य अवांतर असर ( साईड इफेक्ट्स ) होते हैं।
विगत कुछ दशकों में सम्मोहन पर व्यापक अनुसंधान व शोध किया गया है, किन्तु अभी भी इसके कई पहलू रहस्य के आवरण में छुपे हुए हैं। सम्मोहन मस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव पैदा करता है या नकारात्मक , यह पूर्णतया इस बात पर निर्भर है कि इसका प्रयोग किस दिशा में किया गया है। नकारात्मक निर्देशों का सम्प्रेषण व्यक्ति के लिए मनोवैज्ञानिक स्तर पर हानिकारक हो सकता है, जबकि सकारात्मक प्रयोग इसके आश्चर्यजनक लाभकारी परिणाम दे सकता है।
0 0 0