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Hathi | हाथी | elephant

हाथी Hathi का प्रजनन

हाथियों को प्रजनन के लिए भी ऐसी जगह चाहिए, जहां पानी की उपलब्धता हो। घने जंगल के साथ थोड़ी समतल और नमी वाली जगह हो। ऐसी कई जगह जिले के जंगल में हैं। जिसका उपयोग हाथी शावकों को जन्म देने में करते हैं।

हाथी Hathi का गर्भ कितने महीने का होता है?

अधिकांश प्रजातियों के लिए, जन्म से पहले भ्रूण कितना बढ़ता है वह गर्भ काल की लंबाई निर्धारित करता है। छोटी प्रजातियों का गर्भ काल सामान्य रूप से बड़े जानवरों की तुलना में छोटी अवधि का होता है। उदाहरण के लिए, एक हाथी का गर्भ काल 624 दिन का होता है, जबकि एक बिल्ली का गर्भ काल सामान्य रूप से 58-65 दिन का होता है।

हाथी Hathi क्या खाता है

एक हाथी हर रोज 350-400 किलो चारा और फल खाता है,

हाथी Hathi के शरीर में कुल कितनी हड्डियां होती हैं

हाथी के पूरे कंकाल का वजन उसके शरीर के कुल वजन का लगभग 16.5% होता है। एक वयस्क मादा एशियाई हाथी में 282 हड्डियाँ होने की सूचना है (शोशानी और अन्य 1982)। औसतन ५२ किलो वजनी सिर, जो आकार में बड़ा दिखता है, उतना भारी नहीं है जितना कि साइनस की बड़ी संख्या में मौजूद होने के कारण दिखाई देता है।

ज़ब हाथियों ने रेल इंजिन से युद्ध किया

एक रोमांचक सत्य घटना

यह रोमांचक घटना अफ़्रीका के केन्या क्षेत्र में सन्‌  1952 में घटी थी। इस क्षेत्र मे रेलवे-लाइन देश के ऐसे मार्ग से गुजरती है, जो शुष्क, उमसभरी और जंगली जानवरों से व्याप्त है। जंगली हाथी वहां पर बहुत पाये जाते हैं। वहां स्वच्छंद घूमते हैं और रेलवे लाइन पार भी करते हैं।  रेल-इंजिनों से इन हाथियों की मुठभेड़ एक बार नहीं, अनेक बार हुई है। इन मुठभेड़ों में अनेक बार रेल पटरी से उतर गई और कई यात्रियों को जान से हाथ धोने पड़े।

जिस रोमांचक घटना का जिक्र यहां किया जा रहा है, वह मोसाम्बा से नैरोबी तक बोर्ड होते हुए जा रही एक मालगाड़ी के साथ हुई। इस मालगाड़ी में एक ड्राइवर, एक फायरमेन तथा पीछे एक गार्ड था।

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सबेरे तड़के का वक्‍त था। ट्रेन पूरी रफ्तार से आ रही थी। सहसा दो बड़े हाथियों ने मोड़ पर इंजिन पर धावा बोल दिया। ड्राइवर इस अप्रत्याशित घटना से भौंचक्‍का रह गया। इससे पहले कि वह आपातकालीन ब्रेक लगाकर गाड़ी को रोकता, इंजिन पूरी गति से हाथियों से जा टकराया। इससे एक हाथी की उसी वक्त मृत्यु हो गई। दूसरे की पिछली टांग दूट गई। वह पहले लंगड़ा कर उठा और फिर अपने मृत साथी के साथ सटकर गिर गया।

रेलवे लाइन का रास्ता पूरी तरह अवरूद्ध हो गया। रेल – इंजिन एक ओर गिर पड़ा और गाड़ी के डिब्बे एक दूसरे पर लुढ़क पड़े।  उगांडा की कपास की गांठों के सभी बण्डल इधर-उधर फैल गए। फायरमेन की घटनास्थल पर मृत्यु हो गई। हां, संयोग से ड्राइवर बाल-बाल बच गया। मगर उसकी टांग व गर्दन की हड्डी में फ्रेक्चर हो गया।

गार्ड चूंकि सबसे पीछे वाले डिब्बे में था, इसलिए उसे मामूली खरोंचे आई। फिर भी वह इस स्थिति में नहीं था कि आसपास के किसी रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर इस दुर्घटना की खबर कर पाता |

यह एक्सीडेंट दो स्टेशनों के बीच हुआ था। उस समय स्याह घुप्प अंधेरा चारों ओर पसरा था। रेलवे स्टेशनों पर ड्यूटी पर तैनात स्टेशन-मास्टरों ने दोनों ओर से टेलिफोन-संदेश लगातार एक दूसरे के पास भेजे। फिर सबेरा होने पर दोनों ने खोई हुई ट्रेन को खोजने के लिए रनर्स भेजे।

इधर सवेरे का उजाला फैलते ही घटनास्थल पर अफ्रीकी लोगों की भीड़ जमा होने लगी। लेकिन जंगली हाथियों के भय से कोई भी रेल-इंजिन के पास पहुंचने का साहस नहीं कर सका। तब तक एक रेलवे अधिकारी एम्बुलेंस के साथ आ पहुंचे। बाद में सड़क मार्ग से रेलवे पुलिस के इंचार्ज आ गए। उन्होंने सबसे पहले गार्ड और ड्राइवर पर ध्यान दिया। दोनों को ही प्राथमिक चिकित्सा हेतु मोम्बासा अस्पताल भेजा गया। फायरमेन का शव भी एम्बुलेंस में मोम्बासा अस्पताल भेज दिया गया।

मृत हाथी मादा थी। दूसरा नर हाथी अपनी हथिनी से सटा हुआ पड़ा था। उसकी सूंड़ हथिनी की पीठ से सटी थी। बीच-बीच में वह आंख खोलता था और इतमीनान कर लेता था कि कोई उन्हें नुकसान तो नहीं पहुंचा रहा है। चूंकि वह जीवित था, इसलिए लोग भयभीत थे। पहले उसे ढोल की आवाज कर डरा कर भगाने की चेष्टा भी की गई। लेकिन वह हिला तक नहीं। जल्दी ही यह बात साफ हो गई कि वह चलने या उठने की स्थिति में नहीं है। उसकी पिछली टांग बुरी तरह जख्मी हो गई थी और उसे काफी दर्द हो रहा था। उसको तकलीफ से राहत पहुंचाने के लिए उस क्षेत्र के वार्डन ने उसे दवा देकर सुला दिया।

इसके पश्चात एक रेल-इंजिन द्वारा एक बड़ी रेलवे क्रेन मोम्बासा से आ गई। उसने रास्ते को साफ किया। मृत हाथी को रेलवे लाइन से हटाकर दूर कर दिया गया।

डिब्बों और सामानों की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात कर दी गई। अब इस दुर्घटना की जांच के लिए आए रेलवे-पुलिस के इंचार्ज ने उपस्थित सब लोगों से पूछा कि क्‍या कोई इस दुर्घटना का आंखों देखा वर्णन दे सकता है ? लेकिन यह घटना तड़के हुई थी और उस समय पर्याप्त अंधेरा था, इसलिए कोई भी घटना का चश्मदीद गवाह नहीं था। तब पुलिस-इंचार्ज ने उन लोगों से आगे आने को कहा, जो सबसे पहले घटनास्थल पर आये थे और जो इन हाथियों के बारे में जानते थे।

उस समय दोपहर खत्म हो रही थी। सूरज की झुलसाने वाली गर्मी कम हो गई थी। रेलवे अधिकारी अभी भी रास्ता साफ करने में व्यस्त थे। रेलवे पुलिस-इंचार्ज ने गवाहों को छायादार स्थान पर ले जाकर उनकी गवाहियां दर्ज की। उनमें से पांच ऐसे थे, जो दुर्घटना स्थल से आधा किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव में रहते थे। जब दुर्घटना हुई तो जोरों की डरावनी आवाज हुई, जिससे वह जाग गये थे। उन लोगों ने बताया कि पहले तो रेलवे-इंजिन की दो तेज सींटियां सुनी, फिर डरावनी टकराव की विस्फोट जैसी आवाज सुनी।

एक गवाह का बयान था-‘ वह नर हाथी “डने” (जबर्दस्त सांड) के नाम से प्रसिद्ध था। उसकी आयु तकरीबन 50 वर्ष थी। वह बहुत भला व सीधा-सादा हाथी था। लेकिन उसके साथ में आई संगिनी एकदम युवा और तुनक मिजाज थी। हाथी का उस पर बहुत अधिक ध्यान दिये जाने से उसका दिमाग और अधिक बिगड़ गया था। उसके बिगड़े हुए दिमाग व आक्रामक स्वभाव की वजह से उस क्षेत्र में रहने वाले सभी उससे डरते थे। उक्त घटना में भी यही हुआ होगा।

गुस्सैल हथिनी अपने रास्ते से गुजर रहे विशालकाय “दानव” को सहन करने के लिए तैयार नहीं हुई होगी। फिर वह अपने जीवन-साथी और प्रेमी के साथ सैर के वास्ते निकली थी। इसलिए इंजिन को सबक सिखाने के इरादे से वह उससे जा भिड़ी होगी। अपने  प्रेमी को  हाथी को भी जख्मी करवा दिया। उसे इसमें उसकी सहायता करनी पड़ी। नतीजतन वह अपने प्राणों से हाथ धो बैठी l

इंजिन के ड्राइवर के बयान भी इस बयान से काफी कुछ मिलते-जुलते थे। इस तरह एक हथिनी के आक्रोश का शिकार रेलवे-इंजिन को होना पड़ा और वह खुद भी नहीं बच पाई।