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दो बातूनी

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एक गांव में दो बातूनी आदमी रहा करते थे। दोनों की आंखें कमजोर थीं और वे दूर की चीजें साफ-साफ नहीं देख पाते थे। मगर दोनों यह मानने को तैयार नहीं थे कि वे नजर के कच्चे हैं। उल्टे दोनों एक-दूसरे पर अपनी निगाह की तेजी सिद्ध करने की कोशिश करते रहते थे।
एक दिन उन दोनों के सुनने में आया कि गांव के चैराहे के बीच में जो प्रतिमा स्थापित की जाने वाली थी, वह बनकर तैयार हो गयी है और अगले दिन चैराहे के ऊंचे चबूतरे पर रख दी जायेगी। उन दोनों ने तय किया कि इस मौके पर वह एक-दूसरे की निगाहों की तेजी का इम्तहान लेंगे। तय हुआ कि मूर्ति रखे जाने के बाद वे चैराहे से दूर एक पेड़ पर बैठे-बैठे मूर्ति को ध्यान से देखेंगे। जो ज्यादा बारीकी से देख पायेगा, वह जीता हुआ माना जायेगा। शर्त पक्की कर ली गयी और वे विदा हुए।
शर्त तो हो गयी मगर दोनों के मन में चोर था। दोनों जानते थे कि दूर से उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं देगा, मगर कोई भी हारना नहीं चाहता था। अलग होकर दोनांे को एक उपाय सूझा। वे एक-दूसरे से छिपकर उस शिल्पकार से मिल आये, जिसने मूर्ति बनायी थी। दोनों ने शिल्पकार से मूर्ति के बारे में जानकारी ले ली, ताकि अगले दिन उसे दुहराकर दूसरे को नीचा दिखाया जा सके। शिल्पकार को तो वास्तविकता का पता था नहीं, इसलिए उसने एक को मूर्ति के मुंह और पेट के बारे में ज्यादा बताया और दूसरे को पीठ और पैरों के बारे में।
अगले दिन दोनों वादे के अनुसार चैराहे से दूर पेड़ पर चढ़कर बैठ गये। समय का अंदाजा कर उन्होंने अपना-अपना विवरण देना शुरू कर दिया।
एक ने कहा ‘‘ उसके गले में माला लटक रही है, जो सीने तक चली आती है। बीच में हीरा है।‘‘
दूसरा चट से बोला, ‘‘माला? एक बच्चा है, जिसे लादकर वह खड़ी है!‘‘
पहला बोला ‘‘ ध्यान से देखो, माला है और हीरा !‘‘
दूसरा बोला, ‘‘तुम ध्यान से देखो, इतना बड़ा बच्चा नहीं देख पा रहे! बच्चे की आंखे बंद हैं!‘‘
दोनो झगड़ने लगे। दोनों अपनी अपनी बात पर अड़े थे।
जब कुछ तय नहीं हो पाया तो उन्होंने उतावली में एक राहगीर को रोका। उसके पास पहुंचकर एक ने कहा -‘‘ जरा बताइये तो वह मूर्ति है ना उसकी….‘‘
‘‘जी हां, उस मूर्ति की ……‘‘ दूसरा बीच ही में बोल पड़ा।
राहगीर ने अचरज से आंखे फेलाकर दोनों को देखा और सिर पर हाथ मार कर दोनों की बात काटते हुए बोला, ‘‘मूर्ति…..कैसी मूर्ति? मूर्ति तो अभी तक रखी ही नही गयी है1‘‘
इस तरह अचानक उनकी पोल खुल गयी और खुद से शर्मिंदा होते हुए वे घर लौट गये।