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दिल का दौरा:

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अड़तालीस वर्षीय शर्माजी को आफिस में कार्य करते समय अचानक सीने में असहनीय दर्द महसूस हुआ और वह अचेत हो गए। उनके सहकर्मी अचानक हुए इस हादसे से एकदम घबरा गए और किंकर्तव्यविमूढ़-सी स्थिति में आ गए। दुर्भाग्य से उनमें से कोई दिल के दौरे के लक्षण तथा उस समय क्या किया जाना चाहिए, यह नहीं जानता था। वह मात्र पानी के छींटे देकर, हवा करके उन्हें होश में लाने के प्रयास करते रहे। समय पर डाक्टरी सहायता न मिलने और तत्काल प्राथमिक उपचार प्राप्त नहीं होने के कारण वह पहला दिल का दौरा ही जानलेवा साबित हुआ और शर्माजी असमय ही चल बसे।
दरअसल दिल के दौरे के प्राथमिक लक्षण व तत्काल उपचार की विधि किसी को ज्ञात होती तो संभवतः शर्माजी को आसानी से बचाया जा सकता था। चिकित्सकों का कथन है कि इस जानकारी के अभाव में प्रति वर्ष हजारों व्यक्तियों की मृत्यु दिल के दौरे के कारण हो जाती है।
दिल के दौरे के लक्षणों और कारणों को समझने के लिए हमें सर्वप्रथम दिल की कार्य-प्रणाली को समझना होगा। दिल हमारे शरीर का सर्वाधिक संवेदनशील तकरीबन 250 ग्राम वजन का हिस्सा है, जिसका आकार करीब पांच इंच लम्बा व साढ़े तीन इंच चैड़ा होता है। यह सीने के बीचों-बीच पसलियों के पीछे और फेफड़ों के नीचे स्थित होता है। इसका कोना बाईं ओर स्थित होने से दिल की धड़कन बाई ओर सुनाई पड़ती है। हृदय को काम करने के लिए आॅक्सीजन-युक्त रक्त की निरंतर आवश्यकता पड़ती है। दिल के चारों ओर बुने गए धमनियों के जाल से इसे रक्त की सप्लाई होती रहती है। जब किसी कारण धमनियों में रक्त-प्रवाह अवरूद्ध हो जाता है तो दिल के किसी हिस्से में पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता है। ऐसी स्थिति में सीने में एक दर्द उठता है। इसी दर्द को ‘हार्ट-अटैक‘ या ‘दिल का दौरा‘ कहा जाता है।
दिल का दौरा एक गंभीर बीमारी है। समय पर समुचित उपचार उपलब्ध नहीं होने पर यह प्राणघातक सिद्ध हो सकता है। पश्चिमी देशों के मुकाबले हमारे देश में हार्ट अटैक से मरने वालों की संख्या चार गुना अधिक है। पश्चिमी राष्ट्रों में दिल के दौरों से मरने वाले युवाओं की दर मात्र चार प्रतिशत है, जबकि भारत में यह दर 15 प्रतिशत है।
जहां तक इसके लक्षणों का प्रश्न है, हार्ट अटैक का सबसे महत्वपूर्ण और सामान्य लक्षण सीने के बीच या बाईं तरफ असहनीय दर्द होना है। यह दर्द बहुत सारी सुईयां एक साथ चुभने के दर्द के समकक्ष होता है। यह दर्द, कंधो, बांहों, गले और जबड़ो में भी हो सकता है। इसके अतिरिक्त बेतरह पसीना आना, सांस फूलना, बेहोशी आना, घबराहट व बेचैनी होना, मितली आना, आंखों के आगे अंधेरा छा जाना, दिल की धड़कन तेज होना, रक्तचाप कम हो जाना आदि लक्षण दिल के दौर की ताईद करते हंै। कई बार इनमें से कोई भी लक्षण प्रकट नहीं होता । ऐसी स्थिति को ‘साइलेंट अटैक‘ कहते हंै।
अचानक दिल दौरा पड़ने की स्थिति में रोगी के आस-पास के व्यक्तियों को बिना घबराए उसके लक्षणों को पहचानते हुए तुरंत उपचार प्रारंभ कर देना चाहिए। डाक्टरी सहायता मिलने से पूर्व मरीज को सख्त सतह पर लिटा दें और तत्काल चिकित्सक को बुलाने या रोगी को अस्पताल ले जाने की व्यवस्था करें। यदि डाक्टर के आने से पूर्व रोगी के दिल की धड़कन बंद हो जाए तो उसके मुंह से मुंह मिलाकर सांस दंे तथा उसके हृदय की मालिश करें। मालिश करने का तरीका यह है कि सीने की बीच की हड्डी पर हर सेकंड दबाव दिया जाए व छोड़ दिया जाए। इससे रोगी की धड़कन पुनः चालू होने की काफी संभावना रहती है। थोड़े – थोड़े समय के अंतराल से रोगी की सांस व नब्ज जांच करते रहना चाहिए। रोगी को डाक्टरी सहायता जितनी जल्दी संभव हो, उतनी जल्दी उपलब्ध करानी चाहिए क्योंकि इसमें मिनटों का अंतर भी जीवन-मृत्यु का अंतर बन सकता है।
यदि रोगी को समय पर समुचित चिकित्सकीय मदद उपलब्ध हो जाती है, तो प्रायः उसे बचा लिया जाता है। साधारण किस्म के दिल के दौरे में करीब 8-10 दिन में रोगी को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। किंतु उसके लिए भविष्य में काफी सावधानियां रखना व नियमित दिनचर्या रखना आवश्यक होता है।
भविष्य में ‘हार्ट अटैक की पुरावृŸिा न हो, इसके लिए रोगी को धूम्रपान तथा अन्य नशीली मादक वस्तुओं का उपयोग कतई बंद कर देना चाहिए। चाय, काफी, घी-तेल की तली हुई वस्तुओं और मांसाहार को तुरंत बंद कर देना चाहिए।
खान-पान के साथ-साथ जीवन-चर्या को नियमित बनाना भी आवश्यक है। मानसिक तनावों से यथा-संभव बचना चाहिए क्योंकि दिल के दौरे में मानसिक तनाव घातक सिद्ध हो सकता है। ताजा फलों व हरी सब्जियों का सेवन भी लाभप्रद रहता है।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद रोगी को घर पर आराम करना चाहिए। वह घर में ही कुछ टहल सकता है। करीब एक माह बाद वह आधा किलोमीटर तक चल सकता है। दौरे के बाद कम-से-कम दो माह तक रोगी को सीढ़ियां चढ़ने व सहवास से परहेज करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, डाक्टर द्वारा बताई गई दवाओं को नियमित रूप से लेते रहना चाहिए। इसमें लापरवाही करना खतरनाक सिद्ध हो सकता है। अपने स्वास्थ्य की नियमित रूप से जांच करवाते रहिए।
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