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स्वाद, सुगंध और गुणों का संगम: हरा धनिया

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हमारे यहां हरे धनिये का इस्तेमाल प्रायः भोजन व सब्जियों का स्वाद तथा खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है। हरे धनिये की चटनी भी एक लोकप्रिय सहायक खाद्य पदार्थ है। यही सही है कि हरे धनिये के प्रयोग से भोजन की खूबसूरती और स्वाद बढ़ता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि इसे मात्र स्वाद या सजावट की वस्तु माना जाए।
वस्तुतः हरा धनिया बहुत सारे पोषक तत्वों से युक्त वस्तु है। विटामिन ‘ए‘ का तो यह एक तरह से खजाना ही है, जिसके कारण नेत्र-रोगों तथा दृष्टि दोष सम्बन्धी रोगों में यह बहुत उपयोगी है। आधुनिक वैज्ञानिक खोजें तो यहां तक कहती हैं कि कच्चे हरे धनिये के इस्तेमाल से शरीर में कैंसर जैसे रोग के विरूद्ध प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।
हरा धनिया लाभदायक एवम् पोषक तत्वांे से भरपूर है। विटामिन ‘ए‘ के अतिरिक्त इसमें विटामिन बी-काम्पलेक्स और विटामिन-सी भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। रासायनिक संरचना की दृष्टि से प्रति सौ ग्राम हरा धनिया में निम्न तत्व उपलब्ध रहते हैं।
प्रोटीन 14.1 ग्राम
वसा 26.1 ग्राम
कैल्शियम 4.4 ग्राम
कार्बोहाइडेªट 21.6 ग्राम
फास्फोरस 0.37ग्राम
नमी 11.2 ग्राम
लौह तत्व 0.17ग्राम
इसके अतिरिक्त प्रति सौ ग्राम धनिये से 44 कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है।
हरे धनिये को हमेशा कच्चा ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। धनिये की पŸिायों को सब्जियों के साथ पका देने से उनके कई पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। अतः हरा धनिया कच्चा ही ऊपर से सब्जियों में डाला जाए या उसकी चटनी बनाकर इस्तेमाल किया जाए।
हरा धनिया लगभग पूरे वर्ष बाजार में उपलब्ध रहता है। धनिया मूलतः भूमध्य सागरीय प्रदेशांे का आदिवासी पौधा है। एशिया माइनर, मध्य यूरोप, रूस, भारत आदि देशों में इसकी खेती की जाती है। धनिये के पौधे की ऊंचाई एक से ढाई फुट तक होती है। सर्दियों के दौरान यह पौधा हरी पŸिायों से भरपूर रहता है। बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही इसमें सफेद और नीले रंग के फूल आने लगते हैं। इसके बाद धनिये में फल आते हैं, ये गोलाकार हरे और पीले रंग के धारीयुक्त होते हैं। सूखने पर धनिये के इन फलों का इस्तेमाल मसाले के रूप में किया जाता है।
वैसे तो हरा धनिया प्रायः सदैव बाजार में उपलब्ध रहता है, लेकिन यदि आप चाहें तो अपने निजी उपयोग के लिए घर या आंगन में ही गमलों या छोटी क्यारियांे में हरा धनिया उगा सकते हैं। इससे आप जब भी चाहे ताजा हरा धनिया प्राप्त कर सकते हैं।
आप यह न समझें कि हरे धनिये का इस्तेमाल केवल भोजन की महक बढ़ाने या स्वादिष्ट चटनी बनाने तक ही सीमित है। इसकी छोटी-छोटी महकती हरी पŸिायों में कई औषधीय गुण छुपे हुए हैं बल्कि कहना चाहिए कि हरा धनिया अपने आप में कोई छोटा-मोटा घरेलू चिकित्सक है तो आइए जरा हम हरे धनिये के चमत्कारी उपचारों के बारे में जानें।
अनिद्रा की शिकायत होने पर हरा धनिया पीसकर उसमें शक्कर और पानी मिलाकर नियमित रूप से सेवन करें। इससे चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा आना और सिरदर्द में भी राहत मिलती है।
नकसीर (नाक से खून बहना) में हरा धनिया रामबाण औषधि का काम करता है। धनिये की पŸिायां पीसकर सिर पर मलने और धनिये का रस सूंघाने से नकसीर रूक जाती है। रात-भर धनिये को पानी में भिगो कर सुबह मिश्री के साथ सेवन करने से भी नकसीर में लाभ होता है।
भोजन से अरूचि होने पर प्रतिदिन हरे धनिये का करीब 25 ग्राम रस पीएं, इससे भूख खुलती है। पेशाब में जलन होने पर हरे धनिये का शरबत बनाकर सेवन करें।
अधिक गर्मी के कारण होने वाले सिरदर्द में आप हरे धनिये की चार-चार बूंद रस दोनों में डालें तथा इस रस को माथे पर मले। इससे गर्मी दूर होकर शीतलता प्राप्त होगी। सिर के बाल उड़ने अर्थात गंजेपन के रोग में हरे धनिया के रस की प्रभावित स्थान पर मालिश करें, इससे गंजे सिर पर बाल उग आने की संभावना रहती है।
मुंह में छाले हो जाने पर हरे धनिये की पŸिायांे को साफ धोकर चबाएं, इससे छाले शीघ्र ठीक हो जाते हैं। हरे धनिये के रस में तिल्ली का तेल मिलाकर मालिश करने से सिरदर्द, हाथ पैर की जलन और लू की जलन नष्ट होकर मस्तिष्क को तरावट मिलती है। हरे धनिए को आंवले के साथ पीसकर खाने से नेत्र-ज्योति में अभिवृद्धि होती है। हरा धनिया, काला नमक और काली मिर्च को मिलाकर चटनी बनाए। इसके सेवन से दस्त ओर कब्ज की शिकायत दूर होती है।
हरे धनिये के रस, गुलाबजल और बेसन को मिलाकर कंठमाला पर लेप करने से राहत मिलती है। मधुमक्खी या बर्र के काटने पर हरे धनिए का रस और सिरका मिलाकर काटे हुए स्थान पर लगाए। तुरन्त आराम मिलेगा।
धनिये की पŸिायों का लेप करने से फोड़े की सूजन कम हो जाती है। शरीर पर पिŸाी होने पर धनिये की पŸिायों के रस में रोगन गुल व शहद मिलाकर लेप करने से लाभ होता है।
धनिये की चटनी भी स्वादिष्ट बनती है। वजन बढ़ने की समस्या से ग्रस्त व्यक्ति टोस्ट या डबलरोटी पर मक्खन के स्थान पर धनिये की चटनी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे नाश्ता तो स्वादिष्ट होगा ही, साथ ही आप अतिरिक्त कैलोरीज से भी बच सकेंगे। चटनी को और अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए काला नमक काली मिर्च, सेंधा नमक, नींबू के रस आदि का भी उपयोग कर सकते हैं। किन्तु जो व्यक्ति उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, वह चटनी में अत्यंत अल्प मात्रा में नमक का इस्तेमाल करें क्योंकि अधिक नमक से रक्तचाप बढ़ने का खतरा रहता है।
आयुर्वेद के ग्रंथों में धनिये को ठंडा, कसैला, पिŸानाशक, शूलनाशक, मधुर बताया गया है तथा खांसी, बुखार, उल्टी, प्यास और कब्ज जैसे रोगों का नाशक कहा गया है। धनिया भूख बढ़ाने वाला होता है। सौ ग्राम धनिये की पŸिायों के रस को सब्जी में मिलाकर खाने से शरीर को सभी प्रकार के विटामिन्स उपलब्ध हो जाते हैं।
यूं तो हरा धनिया सैकड़ों प्रकार के रोगों और तकलीफों में मुफीद उपचार उपलब्ध करवाता है लेकिन विशेषज्ञांे का कहना है कि जो व्यक्ति यौन-शक्ति दौर्बल्य से पीड़ित हैं, उन्हें धनिये का इस्तेमाल कम करना चाहिए।
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