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देशी काजू ‘मूंगफली ‘

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मूंगफली हालांकि काफी सस्ती होती है लेकिन यह पौष्टिकता से भरपूर है। इसलिए मूंगफली को “देशी काजू! कहाजाता है । मूंगफली साल के बारहों महीने आसानी से मिल जाती है ।कहा जाता है कि सबसे पहले पुर्तगाली व्यापारी अपने साथ गुलाम नीग्रो कैदियों के आहार के लिए मूंगफली लाए थे।अफ्रीका होती हुई मूंगफली यूरोप तथा अन्य पश्चिमी देशों में पहुंची। 1840 में तिलहनी मांग के रुप में मूंगफली की उपयोगिता काफी बढ गई।

आज विश्व के कूल उत्पादन का 40 से भी अधिक प्रतिशत मूंगफली का उत्पादन हमारा मुल्क करता है। दुनिया भर में मुंगफली की अनेक किसमें और प्रजातियां ईजाद की जा चुकी हैं। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया भर में कुल दो करोड़ एकड़ से
भी अधिक जमीन पर मुंगफली का उत्पादन किया जाता है। वर्तमान में इसका कुल उत्पादन 70 लाख टन से अधिक है।

भारत के अलावा चीन, अमेरिका, जापान, मेडागास्कर, अल्जीरिया, अर्जेंटीना आदि देशों में भी बडे पैमाने पर मूंगफली की उपज होती है। पौष्टिकता में मूंगफली लाजवाब है। विशेषज्ञों की राय है कि मांस और मज्जा के निर्माण में मूंगफली काफी उपयोगी है।
प्रति सौ ग्राम मूंगफली से 550 केलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। एक पौंड मूंगफली से जितनी ऊर्जा प्राप्त होती है, उतनी एक पौंड मांस
से भी नहीं मिलती। इसमें प्रोटीन की मात्रा गेहूं से तकरीबन दोगुनी होती है।

प्रोटीन बनाने वाले निम्न तत्व, जिन्हें एमीनो अम्ल कहा जाता है, मूंगफली में निम्नानुसार पाए जाते हैं :- आर्थानिन 436 प्रतिशत, लाइसिन 4.4 प्रतिशत, हिस्टीडीन 2.2 प्रतिशत, ट्रिप्टोफेन 07 प्रतिशत, टायरोसिन 45 प्रतिशत और सिस्टीन १.2 प्रतिशत |जाहिर है कि मूंगफली में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है।

मूंगुफली के रासायनिक विश्लेषण से पता चलता है कि
उसमें 40 प्रतिशत वसा और 20 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है। मूंगफली को सूखे भेवों की श्रेणी में रखा जाकर स्वास्थ्य की दृष्टि से इसकी तुलना काजू , बादाम, और अखरोट से की जाती है। मूंगफली में लौह, केल्शियम, फास्फेट, विटामिन ए आदि शरीर के विकास के लिए जरुरी सभी तत्व भी बहुतायत से पाये जाते हैं। मूंगफली स्नायविक तन्तुओं को शक्तिशाली और तन्दरुस्त बनाती
है। प्लेग जैसे संक्रामक रोगों को मूंगफली के नियमित सेवन से रोका जा सकता है।

4960 में क्राम्पटन ने स्पष्ट किया कि मूंगफली और उससे निर्मित खाद्य सामग्री का उपयोग करने से रक्तस्त्राव की बीमारी में काफी आराम मिलता है। मूंगफली का तेल हमारे दैनिक जीवन में भोजन का एक अनिवार्य अंग है। मूंगफली के तेल की तुलना उपयोगिता के लिहाज से जैतून के तेल से की गई है। यह तेल शीघ्र और सरलता से पच जाता है। यूनानी और आयुर्वेदिक
चिकित्सा पद्धतियों में मूंगफली के तेल को काफी उपयोगी बताया गया है। क्षय रोगों के लिए यह विशेष फायदेमंद साबित हुआ है।
चर्म रोगों में मूंगफली क॑ तेल को हल्का-सा गर्म कर आहिस्ता- आहिस्ता मालिश करने से लाभ होता है| हाथों , पैरों और जोडों के दर्द में भी इसकी मालिश से शीघ्र राहत मिलत्ती है।

बच्चों को कुपोषण का शिकार होने से बचाने के लिए उन्हें नियमित रुप से मूंगफली खिलाई जानी चाहिए। इससे उनकी भूख भी खुलेगी। दुध पिलाने वाली माताओं को नई मूंगफली भून कर खिलाने से दूध की मात्रा में बढोतरी होती है। साथ ही दूध में प्रोटीन
की मात्रा भी बढती है। दूध में अधिक प्रोटीन होना नवजात शिशु के लिए काफ़ी उपयोगी होता है।

मूंगफली का आटा अत्यन्त पौष्टिक, सुपाच्य और पोषक तत्वों से भरपूर माना गया है। मूंगफली के आटे में प्रोटीन की मात्रा दस प्रतिशत मानी जाती है। बंगलूर की केन्द्रीय खाद्य अनुसंधान शाला में मूंगफली के अनेक आहार और प्रोटीन-युकत दुध , दही ,मक्खन आदि बड़े पैमाने पर बनाने के प्रयास जारी हैं। मूंगफली का तेल निकालने के बाद उसकी खली पशुओं के लिए पौष्टिक और पूरक आहार का काम देती है, यह खली चूंकि प्रोटीन और वसा युक्‍त होती है, अत्तएव जानवरों की सेहत के लिए हितकर भी है।

मूंगफली के छिलके भी बेकार नहीं होते। इन छिलकों का उपयोग गत्ता , हार्ड बोर्ड आदि बनाने में होता है। वैसे इन छिलकों को घरों में ईंधन के रुप में भी काम तिया जाता है। मूंगफली की जड़ों से झाड़ू व तूरे बनाए जाते हैं। इनको जलाकर उत्तम और अच्छी किस्म की खाद बनती है। इस खाद में फास्फेट, एसिड, पोटाश और चूने की पर्याप्त मात्रा होने से यह फसल के लिए बहुत उपयोगी होती है। इस तरह मूंगफली का हरेक हिस्सा खासा उपयोगी है। खासतौर से मूंगफली प्रोटीनयुक्त तथा पौष्टिक होने की वजह से उसका नियम्रित सेवन किया जाना चाहिए। वह एक सस्ता , सर्वसुलभ व पौष्टिक आहार है।