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डाकू से मुकाबला | Daku se mukbla story in hindi

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Daku se mukbla story in hindi

उत्तर भारत में बहुत पहले हस्तिनानगर नामक एक गांव था। उसी गांव की बात है यह। गांव के सभी लोग सीधे -सरल स्वभाव के थे और अपना-अपना काम कर सभी प्रसन्‍न रहते थे। किसी को किसी बात की कोई तकलीफ नहीं थी।

शैतानसिंह डाकू से परेशान लोग

इस गांव के लोगों की शांत जिंदगी में एक बार अचानक हलचल मच गई। दरअसल शैतानसिंह नामक एक क्रूर डाकू ने अपने दल-बल के साथ आकर गांव में  लूटपाट शुरू कर दी। शैतानसिंह अपने साथियों के साथ आये दिन गांव में आ  धमकता और किसी भी एक व्यक्ति के घर जाकर उससे बीस-तीस हजार रूपयों की  मांग करता। न देने पर वे लोग उस आदमी के परिवार वालों के साथ मारपीट करते  और घर में जो कुछ उनके हाथ लगता, वह लूट ले जाते।

गांव के लोग बेचारे सीधे-सादे व लड़ाई-झगड़ों से दूर रहने वाले थे। वह  झगड़ा-फसाद से बचने के लिए शैतानसिंह को जो भी रकम उनसे मांगता, चुपचाप दे  देते। इससे शैतान सिंह के हौंसले बुलंद हो गए और ऐसी घटनाएं गांव में अक्सर होने लगीं। गांव के लोग शैतानसिंह के अत्याचार से बचने के उपाय सोचते, किंतु उन्हें कुछ न सूझ पड़ता।

गाँव में आया साधु

उन दिनों गांव में एक साधु आया। उसने गांव से बाहर बस्ती के बाहर एक पेड़ के नीचे अपना डेरा जमाया। गांव के कुछ बड़े-बूढ़े लोग उसके पास गए और अपनी इस परेशानी से उसे परिचित करवाया और डाकू से बचने का कोई रास्ता  पूछा।

साधु ने गांव वालों की समस्या को ध्यान से सुना और फिर कुछ सोचकर कहा- “देखिए, मैं आपकी इस दिक्कत का उपाय तो आप लोगों को बता दूंगा और  इससे आपकी यह मुसीबत हल भी हो जाएगी, किंतु इसके लिए गांव के प्रत्येक  व्यक्ति से एक-एक रूपया लूंगा।”

गाँव वालों से रूपये लेकर भाग गया

मात्र एक-एक रूपया खर्च करने पर इस झंझट से मुक्ति पा लेना गांव वालों को बहुत सस्ता लगा और वह खुशी-खुशी इसके लिए तैयार हो गए। सबने एक-एक रूपया एकत्र किया और साधु को लाकर दे दिए।

उसी रात साधु सब रूपये लेकर,  बिना उपाय बताए गांव से बाहर चला गया।

कुछ दिनों बाद शैतानसिंह ने फिर गांव पर आक्रमण किया और अनेक लोगों से  रूपये लेकर चला गया।

इधर लगभग एक माह बाद वापस साधु आया। गांव वाले उससे नाराज थे। वे उसके पास गए और कहा – “ आपने रूपये भी ले लिए और उपाय भी नहीं बताया |”

साधु ने फिर मांगे रूपये

तब साधु ने कहा – ” भाईयों, नाराज न होइए। मैं इस संकट का उपाय ढूंढने के वास्ते ही गांव से बाहर गया था। लेकिन अब एक-एक रूपये से काम नहीं चलेगा। दस-दस रूपये एकत्र कर सकें तो कुछ बात बन सकती है।”

गांव वालों ने सोचा – “डाकू शैतानसिंह हम लोगों से हजारों रूपये हर बार ले जाता है। साधु को दस-दस रूपये देने से भी काम बन जाता है, तो कोई हर्ज नहीं। “यह सोच गांव वालों ने दस-दस रूपये एकत्र कर साधु को दे दिए।

इस बार फिर साधु रूपये लेकर गांव से चला गया। गांव वाले ठगे-से रह गए l  इस बीच दो-तीन बार शैतानसिंह आकर गांव में आराम से डकैती डालकर बला बला चला  गया।

कई दिनों बाद साधु फिर गांव आया। इस बार गांव वाले काफी गुस्से में थे। वह साधु के पास पहुंचे और बोले – “तुम एक नम्बर के बेईमान हो। हमारे रूपये वापस लौटाओ।”

साधु की नई मांग

साधु ने हंसते हुए शांत भाव से कहा – “ऐसा है, आपको इस समस्या का समाधान चाहिए तो सौ-सौ रूपये एकत्र करने पड़ेंगे।”

साधु की यह मांग सुन गांव वाले वापस गांव लौटे और पूरे गांव के लोगों को  इकट्ठा कर साधु की नई मांग बताई। यह सुन सभी गांव वाले आवेश में आ गए।

उन्होंने कहा — “यह साधु है या लुटेरा। पहले एक, फिर दस और अब सौ रूपये मांग रहा है। चलो, इसकी अभी मरम्मत करते हैं।”

लोग एकत्र होकर साधु को मारने पहुचे

 गांव वाले लाठियां लेकर साधु के ठिकाने पर पहुंचे। साधु ने दूर से ही गांव वालों को गुस्से में लाठियों सहित आते देख लिया था। वह भागकर तुरंत एक ऊंचे स्थान पर चढ़ गया। भीड़ उसके पास पहुंची तो वह चीखकर बोला – “रूकिए, अभी बताता हूं उपाय | यह लो अपने रूपये |”

साधु की सीख

साधु ने रूपये फैंक दिये। गांव वाले आश्चर्य में पड़ गए। तब साधु फिर बोला- “साथियो, यही है डाकू शैतानसिंह -से मुक्ति पाने का उपाय। सौ रूपये प्रति  व्यक्ति से मांगने पर आप लोग एकत्र होकर मुझे मारने आ गए किंतु डाकू शैतानसिंह आप लोगों से हजारों रूपये ले जाता है मगर आप एकत्र होकर उसका मुकाबला नहीं करते। क्या वजह है? दरअसल, इसकी वजह है कि हर आदमी सोचता है, डकैत मेरे घर नहीं, पड़ौसी के घर पर आए हैं। इसलिए चुप्पी साध जाते हैं। यदि आप लोग एकत्र होकर शैतानसिंह का सामना करें तो वह डर जाएगा। साथियों, एकता से आप शैतानसिंह नामक इस मुसीबत का ही नहीं, हर मुसीबत का सामना कर सकते हैं। एकता ही मेरा मंत्र है और यही उपाय भी ।”

गांव वालों ने साधु की बात को अच्छी तरह सुना और सभी उसकी बातों से  सहमत भी हुए । उन्हें लगा, यह बात पहले उन लोगों के दिमाग में क्‍यों नहीं आई?

मिला डाकू के आंतक से छुटकारा

कुछ दिनों बाद हमेशा की तरह शैतानसिंह गांव में डाका डालने आया। बस, एक घर में घुसते ही पूरे गांव में हल्ला मच गया। सभी गांव वाले अपने-अपने हथियार लाठी,  फरसा, बंदूक आदि लेकर आ धमके और डाकू शैतानसिंह और उसके साथियों पर टूट पड़े।

डाकू-दल अचानक हुए इस सामूहिक हमले से हक्‍का-बक्का रह गया और  कुछ नहीं कर पाया। शैतानसिंह घायल होकर बहुत मुश्किल से जान बचाकर अपने  कुछ साथियों के साथ भाग निकला। उसके अनेक साथी इस हमले में मारे गये।

गाँव वालों की इस अनूठी एकता से डरकर फिर शैतानसिह कभी उस गाँव में नही आया l सचमुच डाकू का मुकाबला साधू के मूलमंत्र एकता के कारण ही संभव हो पाया l

डाकू अंगुलिमाल की कहानी

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