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दवाइयां लेने से पहले….!

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पिछले दिनोंपता चला कि मेरी सहेली की बेटी की अचानक तबियत ज्यादा खराब हो गई। उसके घर जाने पर पता चला कि उसने अपनी लड़की को खांसी-जुकाम में दमा की बीमार अपनी सास की दवा दे दी। मैने उससे कहा, ‘‘पढ़ी-लिखी होकर यह क्या बेवकूफी कर गई?‘‘ सहेली बोली, ‘‘ अंधेरा हो रहा था। काम की जल्दी में ठीक से पढ़ा नहीं। पास रखी दोनों बोतलों में फर्क न कर पाई।‘‘ सहेली की लापरवाही ने बच्ची को, पूरे घर को कितना परेशान कर दिया।
अक्सर महिलाएं छोटे-मोटे साधारण रोगों की दवा हर किसी से पूछती रहती हैं। डाक्टर के पास जाना वे समय और पैसे की बरबादी समझती हैं। वे स्वयं अपने आप डाक्टर बनकर घरवालों का इलाज करना चाहती हैं। वैसे भी इस देश में अंदाज से लगभग हर व्यक्ति रोग और उसकी दवा बताने के बारे में तैयार रहता है। अगर आप किसी रिक्शा चालक या मजदूर से भी छींक आने से लेकर कैंसर जैसे जटिल रोगों की दवा पूछें तो वह फटाफट मुंहजबानी कुछ दवाओं के नाम बता देगा। वह कहेगा, ‘‘फलां रोग में यह दवा फौरन असर करती है, फलां के लिए तो वह जड़ी-बूटी, कपड़-छान, भिगोकर सेवन करो, इस दवा से फलां का लाइलाज रोग ठीक हो गया था, पढ़े-लिखे डाक्टरों ने जवाब दे दिया। इसी दवा से लाभ हुआ….।‘‘ आदि-आदि। जब ऐसे सजीव प्रमाण-पत्र संलग्न किये जाएं तो परेशान मरीज सोचता है, ऐसी सस्ती दवा आजमाने में हर्ज क्या है। क्या पता दवा फायदा ही कर दे। मरीज इस तरह ऐसे फर्जी डाक्टर-वैद्यों की गिरफ्त में आ जाता है। उसका रोग और बिगड़ जाता है। उसे रोग से तभी छुटकारा मिलता है जब वह सही डाक्टर के पास पहुंचता है।
बहुत-सी महिलाएं बची हुई दवाएं अधिक समय तक यह सोचकर रखे रहती हैं कि मंहगी दवा है, फेंकने में दर्द लगता है, क्या पता कोई बीमार पड़ जाए और यही दवा काम आ जाए। लगता है, वे दवा की खपत के लिए रोग की कामना करती हैं। पड़ोस में या उनके परिचित को उस दवा की जरूरत पड़ी तो तुरन्त यह कह कर थमा देती हैं, ‘‘तुम्हें भी इसी दवा से फायदा होगा। यह दवा हमारी आजमायी हुई है।‘‘ यह सहानुभूति नहीं वरन् मरीज की जिंदगी से खिलवाड़ है। कभी भी जाने-अनजाने में, बिना सही जानकारी के किसी को किसी की दवा नहीं देना चाहिए। कोई भी डाक्टर मरीज को पूरा-पूरा निरीक्षण करके ही उचित और अनुकूल दवा का निर्णय लेता है। आप केवल अपने परिवार के रोगियों के अनुभव के आधार पर डाक्टर मत बनिये। आपका अनुभव किसी को मौत के मुंह में भी सुला सकता है।
जो रोग आपकी समझ से बाहर है, जटिल है, उसकी दवा के विषय में कभी अपना सुझाव मत दीजिए, न अपने घर के स्टोर से बेकार पड़ी कोई दवा उठाकर उसे दीजिए।
बहुत-सी दवाएं एक निश्चित समय के बाद ‘एक्सपायर‘ हो जाती हैं। एक निश्चित समय बीत जाने पर दवा की उपयोगिता नष्ट हो जाती है। ऐसी दवाएं लाभ तो करतीं नहीं उल्टे नुकसान कर जाती हैं। आंखों में डालने वाली बहुत-सी दवाएं सील टूटने के एक माह बाद बेकार हो जाती हैं। पर यह सोचकर कि अभी भी बहुत दवा बची है, फिर काम आ जायेगी, आप सालों तक उसे अपने संग्रह में रखे रहती हैं। ऐसा मत कीजिए। अगर आप चाहें तो इस प्रकार की दवाएं समय रहते ही जो आपके प्रयोग से बच रही हों अस्पताल में गरीबों को सहायतार्थ दे सकती हैं। घर में रख कर ‘डेट एक्सपायर‘ करने से क्या लाभ!
किसी महिला के बच्चे को बुखार बहुत तेज था। डाक्टर ने बुखार उतारने की गोली 6-6 घंटे बाद देने को कहा। एक गोली देने के बाद बुखार में कुछ लाभ नहीं हुआ। यह देखकर महिला ने जल्दबाजी के चक्कर में बच्चे को दो गोली एक साथ दे दीं बच्चे का शरीर एकदम ठंडा पड़ गया। डाक्टर को तुरंत बुलाना पड़ा। तेज असर दवाओं के साथ ऐसी हड़बड़ी किस काम की?
घर में दवाएं देने का कार्य अधिकतर महिलाओं को ही करना पड़ता है। अतः तमाम सावधानी उन्हें ही बरतनी चाहिए। दवाएं देने से पहले बोतल का लेबिल ठीक से पढ़ लें। उचित मात्रा में दवा दें, ठीक समय पर दें। यह नहीं कि कभी दो घंटे बाद तो बाकी खुराक एक घंटे बाद या तीन घंटे बाद। इस प्रकार का आलस्य या लापरवाही किसी काम की नहीं होती।
दवा देते समय तरल द्रव वाली दवा की शीशी हिलाकर दवा देनी चाहिए। गोलियों का केवल रंग और डिजाइन देखकर ही दवा का निर्णय न लें। सफेद गोली जब पीली पड़ जाये तो उसे नष्ट कर दें। कोई भी गोली कभी खुली न रखंे। बहुत-सी तीव्र असर वाली दवाएं खाली पेट नहीं खाना चाहिए, इस बारे में डाक्टर की राय से ही सेवन करें।
कुछ दवाएं ऐसी होती हैं, जिनका सेवन एक निश्चित ‘कोर्स‘ में किया जाता है। यह नहीं कि एक-दो से लाभ हुआ तो उसे छोड़ दिया। इससे वह दवा भविष्य में उपयोगी सिद्ध नहीं होगी। उपचार हो जाने के बाद भी डाक्टर की राय के अनुसार ‘कोर्स‘ पूरा करें।
कभी-कभी बहनें काम में व्यस्त रहने पर बच्चों से कह देती हैं, ‘फलां जगह दवा रखी है, अपने आप लेकर खा लो।‘ यह बहुत खतरनाक बात है। ऐसा कभी नहीं करना चाहिए। बच्चों को दवा देने से पहले, भले ही बच्चा पढ़ा-लिखा हो, हर खाने-पीने वाली दवा स्वयं समझ-बूझकर ही खाने की अनुमति देनी चाहिए।
दवाइयों के प्रयोग में यह कुछ सावधानियां आपको उनके पश्चातवर्तीय दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखने में मददगार होगी।